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भोजपुरी एक्टर अपना पहला लोकसभा चुनाव हारे, क्या पवन सिंह तोड़ पाएंगे ये रिकॉर्ड?

1980 से फिल्मी सितारों की संसद में एंट्री एक नियमित घटना रही है. बाद के दौर में क्षेत्रीय भाषाओं के फिल्म एक्टर भी राजनीति में आए और संसद भी पहुंचे. हालांकि, आज कई भोजपुरी एक्टर भी सांसद हैं लेकिन दिलचस्प बात यह है कि आज तक के तमाम चुनाव में भोजपुरी एक्टरों को अपने पहले लोकसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है. ऐसे में सवाल है कि क्या पवन सिंह, जो पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ रहे हैं, इस रिकॉर्ड को तोड़ पाएंगे?

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पवन सिंह
पवन सिंह

पिछले कुछ लोकसभा चुनावों से फिल्मी सितारों की संसद में एंट्री खासा चर्चा का विषय रही है. संसद से उनका जुड़ाव 1980 के दशक से देखा गया है. पिछले कुछ चुनावों से यह चलन और बढ़ा है, जहां राजनीतिक पार्टियां चुनाव जीतने के लिए फिल्मी सितारों पर दांव लगाती हैं. 

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इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि फिल्मी सितारों की छवि जनता के बीच खराब नहीं होती, जिसके कारण जनता के बीच उनकी स्वीकार्यता ज्यादा होती है. लोकसभा चुनाव 2024 की बात करें तो बीजेपी, टीएमसी समेत अन्य पार्टियों ने कई फिल्मी सितारों को मैदान में उतारा है.

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बॉलीवुड और अन्य क्षेत्रीय सिनेमा की तरह भोजपुरी फिल्मी सितारों ने भी लोकसभा चुनाव लड़ा और सांसद बने. इस चुनाव में भोजपुरी एक्टर और गायक पवन सिंह बिहार की काराकाट लोकसभा सीट से राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा के खिलाफ निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं.

दिलचस्प बात यह है कि, अब तक कोई भी भोजपुरी एक्टर अपना पहला लोकसभा चुनाव नहीं जीत सका है. ऐसे में एक बड़ा सवाल ये है कि क्या पवन सिंह यह रिकॉर्ड तोड़ पाएंगे और पहली बार में ही संसद पहुंच पाएंगे? आइए एक नजर डालते हैं उन भोजपुरी एक्टर्स पर जिन्होंने अपना पहला चुनाव लड़ा लेकिन हार का सामना करना पड़ा.

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पवन सिंह

भोजपुरी सिंगर और एक्टर पवन सिंह बीजेपी के सहयोगी और पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा के खिलाफ चुनाव लड़ रहा है. भोजपुरी सिंगर के काराकाट लोकसभा सीट से मैदान में आने से कुशवाहा की परेशानी बढ़ी है. इस सीट पर चुनाव जीतना उनके लिए मुश्किल हो गया है. दरअसल, पवन सिंह को बीजेपी ने पश्चिम बंगाल के आसनसोल सीट से मैदान में उतारा था लेकिन उन्होंने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया था.

बाद में पवन सिंह ने बिहार की काराकाट सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान किया तो 22 मई को बीजेपी ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया. कथित रूप से उनके भोजपुरी गानों में महिलाओं के चित्रण पर आपत्ति जताए जाने के बाद उन्हें अपना नाम वापस लेना पड़ा था. बाद में उन्होंने काराकाट से अपनी उम्मीदवारी की घोषणा की और 9 मई को अपना नामांकन दाखिल किया.

काराकाट सीट पर ऐसे तो मुकाबला पवन सिंह और उपेन्द्र कुशवाहा के बीच ही माना जा रहा है लेकिन इस सीट से महागठबंधन के राजाराम सिंह और एआईएमआईएम की प्रियंका चौधरी भी मैदान में हैं. पवन के प्रवेश ने अब काराकाट की लड़ाई को चतुष्कोणीय बना दिया है.

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काराकाट सीट पर असल में 18.5 लाख मतदाता हैं और इनमें यादव और कुशवाहा बहुतायत में हैं. तीन लाख से ज्यादा यादव वोटर हैं और तीन लाख से ज्यादा कुशवाह और कुर्मी वोटर हैं. वहीं राजपूत वोटर भी दो लाख हैं. इसी समुदाय से आने वाले पवन सिंह और उपेन्द्र कुशवाह उम्मीदवारों के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती हैं. इस सीट पर दो लाख वैश्य समाज के मतदाता हैं, 50 हजार भूमिहार और एक लाख ब्राम्हण मतदाता भी हैं.

मनोज तिवारी

भोजपुरी एक्टर मनोज तिवारी अभी नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली लोकसभा सीट से सांसद हैं लेकिन उन्हें भी पहले चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था. उन्होंने 2009 में अपना पहला लोकसभा चुनाव समाजवादी पार्टी (सपा) के टिकट पर गोरखपुर लोकसभा से लड़ा था. सपा ने उन्हें माफिया डॉन से नेता बने हरि शंकर तिवारी, बीजेपी के योगी आदित्यनाथ और बसपा के विनय शंकर तिवारी के खिलाफ मैदान में उतारा था.

मनोज तिवारी को चुनाव में महज 11 फीसदी वोट मिले थे और तीसरे स्थान पर रहे थे. इस चुनाव में योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर से बसपा के विनय शंकर तिवारी को 2,20,271 वोटों से हराया था. बाद में 2013 में बीजेपी में शामिल हो गए और 2014 में अपना पहले लोकसभा चुनाव लड़ा और बदलाव की लहर में जीत हासिल की. मनोज तिवारी 2019 में उसी सीट से अपना दूसरा लोकसभा चुनाव जीते और तीसरी बार 2024 लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं.

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रवि किशन

भोजपुरी एक्टर से नेता बने रवि किशन ने अपना पहला लोकसभा चुनाव कांग्रेस के टिकट पर जौनपुर से लड़ा था. उन्हें महज 4.2 फीसदी वोट मिले थे. फरवरी 2017 में वह बीजेपी में शामिल हो गए और 2019 में अपना पहला लोकसभा चुनाव गोरखपुर से लड़ा. उन्होंने समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार रामभुआल निषाद को 301,664 वोटों से हराया था. 2024 में वह फिर से गोरखपुर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं.

दिनेश लाल यादव "निरहुआ"

निरहुआ के नाम से मशहूर भोजपुरी स्टार दिनेश लाल यादव ने 2019 में अपना पहला लोकसभा चुनाव लड़ा. उन्होंने सपा प्रमुख अखिलेश यादव के खिलाफ चुनाव लड़ा लेकिन सपा प्रमुख ने उन्हें 259,874 वोटों से हराया था. बाद में उन्होंने मैनपुरी से विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए इस्तीफा दे दिया और 2022 में विधायक बन गए. हालांकि, निरहुआ ने इसी सीट से जून 2022 में उपचुनाव जीता था. उन्होंने सपा के धर्मंद्र यादव को आठ हजार से ज्यादा वोटों से हराया था. निरहुआ एक बार फिर आजमगढ़ से ही चुनावी मैदान में हैं और उनके सामने धर्मेंद्र यादव ही चुनाव लड़ रहे हैं.

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कुणाल सिंह

मशहूर भोजपुरी एक्टर कुणाल सिंह ने अपना पहला लोकसभा चुनाव 2014 में कांग्रेस की टिकट पर पटना साहिब से लड़ा. हालांकि, बीजेपी के उम्मीदवार शत्रुघ्न सिन्हा ने उन्हें 265,805 वोटों से हराया था. 

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