महाराष्ट्र की राजनीति में महाविकास आघाडी को सांगली में बड़ा झटका लगा है. वहां से कांग्रेस नेता विशाल पाटिल ने बगावत कर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकनपत्र भरा है. यह सीट टिकट बंटवारे के तहत महाविकास अघाडी के पार्टनर शिवसेना यूबीटी के खाते में गई है, जिसने यहां से चंद्रहार पाटिल को टिकट दिया है. आज कांग्रेस के तमाम नेताओं के साथ विशाल पाटिल ने शक्ति प्रदर्शन किया और एक बड़ी जनसभा को संबोधित किया. विशाल पाटिल के मंच पर सांगली के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री अजित घोरपड़े भी मौजूद रहे..
पाटिल बोले- 25 साल से कर रहा हूं कांग्रेस के लिए काम
जनसभा को संबोधित करते हुए विशाल पाटिल ने कहा, 'मैं 1998 से लेकर 25 साल से कांग्रेस का काम कर रहां हूं. 2002 मे मैने कांग्रेस से जिला परिषद सदस्य के लिए टिकट मांगा. पर लोगों ने कहा कि यह परिवारवाद हो जाएगा. मै रुक गया. 2005 मे मेरे पिता का निधन हुआ. मुझे लगा कि चुनाव लडना चाहिए, लेकिन मेरे अलावा हमारे परिवार के अन्य सदस्य को टिकट मिला. मैने फिर भी काम किया. जब जब मुझे रुकने के लिए बोला मैं रुक गया. 2019 मे पार्टी ने टिकट ही छोड़ दिया. मुझे बोला की आप दूसरी पार्टी के चुनाव चिन्ह पर लड़ें. मैने वह भी मंजूर किय क्योंकि मेरा पार्टी से एकतरफा प्यार है. लेकिन मैने काम करना नहीं छोडा.'
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महाविकास अघाडी में खलबली
विशाल पाटिल के बागी अवतार देखने के बाद महाविकास आघाडी मे खलबली मची है. विशाल पाटिल को उम्मीदवारी मिले और सांगली की लोकसभा सीट कांग्रेस के हिस्से मे आए इसके लिए दिल्ली तक जानेवाले कांग्रेस नेता विश्वजीत कदम, जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष विक्रम सावंत को नाना पटोले ने नागपूर तलब किया था. मीडिया से बात बात करते वक्त विश्वजीत कदम ने कहां की, 'हमें आशा है कि सांगली को लेकर जो समस्या खडी हुई है, उसपर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जरूर कोई रास्ता निकालेंगे. वहां पर कांग्रेस के कार्यकर्ता आक्रोशित हैं. कुछ सकारात्मक कदम निकल कर आएगा ऐसी हमे आशा है.’
क्या है सांगली का पेच..?
सांगली लोकसभा चुनाव क्षेत्र कांग्रेस का गढ़ माना जाता है. इस लोकसभा सीट से कांग्रेस के दो विधायक हैं और एनसीपी शरद पवार खेमे का एक विधायक है. लेकिन शिवसेना यूबीटी का ना कोई विधायक है, ना झेडपी सदस्य ना महापालिका सदस्य. फिर भी कोल्हापुर की सीट शाहू महाराज को छोड़ने के बदले में उद्धव ठाकरे गुट ने इस सीट पर दावा किया. इतना ही नहीं, जब सीट शेयरिंग की चर्चा पूरी भी नहीं हुई थी, तब डबल महाराष्ट्र केसरी का खिताब जीतने वाले चंद्रहार पाटिल को यहां से उम्मीदवार घोषित किया. इसके बाद आक्रोशित कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कड़ा विरोध कर पार्टी आलाकमान से इसकी शिकायत की. लेकिन कोई हल नहीं निकला.
कौन है सांगली के शिवसेना यूबीटी के उम्मीदवार?
चंद्रहार पाटिल को शिवसेना यूबीटी ने सांगली से अपना उम्मीदवार घोषित किया है. उन्होंने यह भी माना है की कांग्रेस की तुलना मे यहां पर शिवसेना यूबीटी की ताकत कम है. लेकिन महाविकास आघाडी के नेता यहां पर जान लगा दें तो यह सीट हम जीत सकते हैं. चंद्रहार पाटिल पहलवान हैं. उन्होंने डबल महाराष्ट्र केसरी का खिताब जीता है. इतना ही नहीं, दस साल पहले उन्होने जिला परिषद सदस्य के तौर पर एनसीपी का प्रतिनिधित्व भी किया है. चंद्रहार पाटिल एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल के करीबी माने जाते हैं और कहा जाता है कि चंद्रहार के लिए जयंत ने ही उद्धव से बात की.
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क्या है सांगली लोकसभा सीट का इतिहास
सांगली लोकसभा चुनाव क्षेत्र पूर्व मुख्यमंत्री और दिवंगत नेता वसंत दादा पाटिल का गढ़ रहा है. 1980 से लेकर 2014 तक इस चुनाव क्षेत्र से वसंत दादा के परिवार के ही लोग चुनकर सांसद गए हैं. लेकिन 2014 में यहां पर बीजेपी ने संजय काका पाटिल को पार्टी में लाकर चुनाव मे खड़ा किया और उनकी जीत हुई. 2019 में विशाल पाटिल को उम्मीदवारी देने पर कांग्रेस विचार कर रही थी. लेकिन एनसीपी और स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के साथ चुनाव लड़ते वक्त यह सीट कांग्रेस ने स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के लिए छोड़ दी. विशाल पाटिल को बैट का चिन्ह लेकर मैदान मे उतरना पडा. लेकिन उस वक्त वंचित बहुजन आघाडी ने अन्य दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ा जिसमें विशाल पाटिल की हार हुई, और फिर एक बार संजय काका पाटिल लोकसभा पहुंच गए. इस बार भी बीजेपी ने संजय काका पाटिल को ही मैदान में उतारा है.