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'गेस्ट हाउस कांड के मुख्य सरगना थे शिवपाल, मेरे डर से चुनाव छोड़ भागे', बदायूं में बोले BJP प्रत्याशी दुर्विजय शाक्य

BJP प्रत्याशी दुर्विजय सिंह शाक्य ने सपा नेता शिवपाल सिंह यादव पर जमकर हमला बोला. शुक्रवार को बीजेपी द्वारा बदायूं क्लब परिसर में आयोजित महिला सम्मेलन को संबोधित करने के बाद कहा कि उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख बहन मायावती जी के साथ स्टेट गेस्ट हाउस में जो हुआ था. उसके मुख्य सरगना शिवपाल सिंह यादव थे.

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भाजपा प्रत्याशी दुर्विजय सिंह शाक्य
भाजपा प्रत्याशी दुर्विजय सिंह शाक्य

बदायूं से भाजपा प्रत्याशी दुर्विजय सिंह शाक्य ने सपा नेता शिवपाल सिंह यादव पर जमकर हमला बोला. शुक्रवार को बीजेपी द्वारा बदायूं क्लब परिसर में आयोजित महिला सम्मेलन को संबोधित करने के बाद कहा कि उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख बहन मायावती जी के साथ स्टेट गेस्ट हाउस में जो हुआ था. उसके मुख्य सरगना शिवपाल सिंह यादव थे और वो मेरे खिलाफ चुनाव लड़ने से डरकर भाग गए थे. इसके अलावा उन्होंने कहा कि सपा सरकार में महिलाएं घर से निकलने में डरती थीं. अब बाबा की सरकार है, इसमें गुंडागर्दी नहीं चलेगी. ऐसे गुंडो को सबक सिखाने के लिए महिलाएं एक-एक वोट कमल के फूल पर लगाकर इन्हें मुंहतोड़ जवाब देंगी. 

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बता दें, समाजवादी पार्टी ने बदायूं लोकसभा सीट से शिवपाल यादव की जगह उनके बेटे आदित्य यादव को उम्मीदवार बनाया है. बदायूं का हिंदू और मुस्लिम दोनों के लिए एक धार्मिक महत्व वाला जिला माना जाता है. यहां ऐसे कई खंडहर और स्मारक हैं जो इसके अतीत की कई किंवदंतियों को बताते हैं.

2019 का जनादेश

2019 में बदायूं लोकसभा क्षेत्र से 9 उम्मीदवार मैदान में थे. मुख्य मुकाबला सपा के उम्मीदवार धर्मेंद्र यादव और बीजेपी की संघमित्रा मौर्य के बीच थी. कांग्रेस ने सलीम इकबाल शेरवानी को मैदान में उतारा था. इनके अलावा 4 उम्मीदवार बतौर निर्दलीय थे. 

इस सीट से बीजेपी की संघमित्रा मौर्य ने जीत हासिल की, उन्हें 5,11,352 वोट मिले थे. सपा को इस बार हार का सामना करना पड़ा, धर्मेन्द्र यादव को 4,92,898 वोट मिले थे. जबकि कांग्रेस के सलीम इकबाल शेरवानी 51,947 वोटों के सात तीसरे स्थान पर रहे.  

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2014 का जनादेश

2014 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव ने यहां एकतरफा जीत हासिल की, उन्हें करीब 48 फीसदी वोट मिले थे. 2014 में मोदी लहर के भरोसे चुनाव में उतरी बीजेपी का जादू यहां नहीं चला और उनके उम्मीदवार को सिर्फ 32 फीसदी ही वोट मिले थे. 2014 के चुनाव में इस सीट पर कुल 58 फीसदी मतदान हुआ था, जिसमें से करीब 6200 वोट NOTA में गए थे.

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