पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कन्याकुमारी में मेडिटेशन को टेलीविजन पर प्रसारित किया गया, तो तृणमूल कांग्रेस चुनाव आयोग से शिकायत करेगी. क्योंकि यह आचार संहिता का उल्लंघन होगा. ममता ने कहा कि पीएम मोदी मेडिटेशन कर सकते हैं, लेकिन इसे टेलीविजन पर प्रसारित नहीं किया जा सकता है. उन्होंने पूछा क्या मेडिटेशन के लिए किसी को कैमरा चाहिए? सीएम ममता ने दावा किया कि यह प्रचार समाप्त होने और अंतिम चरण की वोटिंग के बीच प्रचार करने का एक तरीका है.
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने दावा किया कि पीएम मोदी हर चुनाव में अंतिम चरण के मतदान से 48 घंटे पहले ध्यान में चले जाते हैं. प्रधानमंत्री ने 2019 के चुनाव अभियान के बाद केदारनाथ की गुफा में इसी तरह का ध्यान किया था. उन्होंने कहा कि अगर वे (भाजपा) इस बार सत्ता में लौटते हैं, तो कोई राजनीतिक दल, चुनाव, स्वतंत्रता, धर्म, मानवता या संस्कृति नहीं रहेगी.
30 मई को लोकसभा चुनाव प्रचार समाप्त होने के बाद पीएम मोदी कन्याकुमारी में स्वामी विवेकानंद को श्रद्धांजलि देने के लिए बनाए गए स्मारक रॉक मेमोरियल में मेडिटेशन करेंगे. भाजपा नेताओं के अनुसार पीएम मोदी 30 मई की शाम से 1 जून की शाम तक ध्यान मंडपम में ध्यान करेंगे, ये वही स्थान है, जहां विवेकानंद ध्यानरत रहे थे.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक TMC सुप्रीमो ने मोदी के इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि भाजपा इस चुनाव में बंगाल में सर्वश्रेष्ठ परिणाम हासिल करेगी. ममता ने जोर देकर कहा कि इसका मतलब है कि वे हार गए हैं, उन्हें बंगाल में रसगुल्ला (शून्य) मिलेगा. उन्होंने कहा कि टीएमसी दिल्ली में सरकार बनाने में विपक्षी इंडिया ब्लॉक का समर्थन करेगी. हालांकि ममता ने लोगों से ये भी अपील की कि बंगाल में सीपीआई (एम) या कांग्रेस को वोट न दें.
पश्चिम बंगाल में सातवें चरण की 9 लोकसभा सीटों के लिए चुनाव से पहले बरुईपुर में एक चुनावी सभा में उन्होंने कहा कि अगर मैं कांग्रेस से बाहर नहीं आती और तृणमूल कांग्रेस नहीं बनाती, तो आज भी हम बंगाल में सीपीआई (एम) को नहीं हरा पाते. ममता ने जोर देकर कहा कि उन्होंने बंगाल से सीपीआई (एम) की सरकार हटाने के लिए 34 साल तक उसके खिलाफ लड़ाई लड़ी, साथ ही कहा कि अगर हम ऐसा कर सकते हैं, तो हम भाजपा को भी हरा सकते हैं. ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि सीपीआई (एम) और भाजपा ने मौजूदा चुनावों के लिए कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में मौन सहमति बना ली है.