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AAP दिल्ली में साथ-पंजाब में खिलाफ, लेफ्ट केरल में खिलाफ-बंगाल में साथ, 'INDIA' में कहां-कहां कनफ्यूजन?

लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी इंडिया गठबंधन में यूपी से लेकर दिल्ली तक सीट शेयरिंग हो गई लेकिन पंजाब का पेच नहीं सुलझ सका. केरल में भी लेफ्ट अकेले लड़ने के मूड में है. इंडिया गठबंधन में कहां-कहां कनफ्यूजन की स्थिति है और जहां गठबंधन खटाई में पड़ता दिख रहा है, वहां क्या पेच हैं?

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मल्लिकार्जुन खड़गे और अरविंद केजरीवाल
मल्लिकार्जुन खड़गे और अरविंद केजरीवाल

लोकसभा चुनाव करीब आ रहे हैं और विपक्षी इंडिया गठबंधन में सीट शेयरिंग की गाड़ी भी फुल स्पीड से दौड़ रही है. यूपी, हरियाणा, गुजरात और गोवा के साथ ही केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली और चंडीगढ़ में इंडिया गठबंधन में शामिल कांग्रेस और अन्य घटक दलों के बीच सीट शेयरिंग का ऐलान हो चुका है. लेकिन कुछ राज्य ऐसे भी हैं जहां इंडिया गठबंधन के दो घटक दल आमने-सामने होंगे. कुछ राज्यों में कनफ्यूजन की स्थिति भी है.

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कांग्रेस और दिल्ली-पंजाब की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी के बीच पांच राज्यों में गठबंधन का ऐलान हो गया है. केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली और चंडीगढ़ के साथ ही हरियाणा, गोवा और गुजरात में ये दोनों दल गठबंधन कर चुनाव लड़ेंगे. लेकिन पंजाब में दोनों ही दल एक-दूसरे को चुनौती देते नजर आएंगे. कुछ ऐसी ही स्थिति लेफ्ट और कांग्रेस गठबंधन की भी नजर आ रही है. कांग्रेस और लेफ्ट बिहार से लेकर पश्चिम बंगाल तक मिलकर चुनाव लड़ेंगे जबकि केरल में जहां लेफ्ट की सरकार है, वहां दोनों ही दलों के नेता और उम्मीदवार एक-दूसरे को पटखनी देने के लिए जोर लगाते नजर आएंगे.

तृणमूल कांग्रेस के साथ भी कुछ ऐसी ही तस्वीर नजर आ रही है. टीएमसी और कांग्रेस के बीच पश्चिम बंगाल में सीट शेयरिंग को लेकर बातचीत फिर से बेपटरी होती दिख रही है. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी की प्रमुख ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने कहा है कि हम अकेले ही चुनाव मैदान में उतरेंगे. टीएमसी एक तरफ पश्चिम बंगाल में अकेले चुनाव लड़ने की बात कर रही है तो दूसरी तरफ मेघालय समेत नॉर्थ ईस्ट के राज्यों और उत्तर प्रदेश में अपने लिए सीट भी चाह रही है. चर्चा इस बात की भी है कि यूपी में टीएमसी अपने प्रवक्ता ललितेश पति त्रिपाठी के लिए एक सीट चाह रही है.

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कहीं साथ, कहीं खिलाफ की सियासत से कनफ्यूजन

कहीं साथ, कहीं खिलाफ की इस सियासत से न सिर्फ जनता, बल्कि राजनीतिक दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए भी कनफ्यूजन की स्थिति बनने का खतरा है. नेता और कार्यकर्ता के लिए दूसरे राज्यों में विरोध या गठबंधन की स्थिति जनता को समझा पाना चुनौतीपूर्ण होगा तो साथ ही जहां खिलाफ लड़ रहे, वहां एक-दूसरे पर हमला करते समय भी लक्ष्मण रेखा का ध्यान रखना होगा.

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यह खतरा भी होगा कि कहीं इंडिया गठबंधन के घटक दलों के नेता विरोधियों को अपने ही खिलाफ हमले का हथियार न दे बैठें. दूसरी तरफ, एनडीए इस गठबंधन को शुरुआत से ही अवसरवादी बताता रहा है और अब उसकी रणनीति कहीं साथ, कहीं खिलाफ के आधार पर विपक्ष को घेरने की भी होगी.

पंजाब से केरल और पश्चिम बंगाल तक गठबंधन का पेच क्या

अब सवाल यह भी उठ रहे हैं कि कहीं दोस्ती, कहीं विरोध की स्थिति क्यों बन रही है? राजनीतिक विश्लेषक अमिताभ तिवारी ने कहा कि किसी भी राज्य में दूसरे और तीसरे या पहले और तीसरे नंबर की पार्टियों में गठबंधन हो सकता है लेकिन पहले और दूसरे नंबर की पार्टी में गठबंधन नहीं हो सकता. पंजाब से केरल तक सबसे बड़ा पेच यही है. दिल्ली में आम आदमी पार्टी सत्ता में है तो कांग्रेस तीसरे नंबर की पार्टी है. पंजाब में ये दोनों पार्टियां पहले और दूसरे नंबर पर हैं. केरल में लेफ्ट और कांग्रेस प्रमुख प्रतिद्वंदी हैं. सरकार और विपक्ष कैसे साथ आएंगे?

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अब दिक्कत यही है कि पंजाब में आम आदमी पार्टी, कांग्रेस को हटाकर ही सत्ता में आई है. कांग्रेस की लोकल लीडरशिप ने भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है तो वहीं आम आदमी पार्टी भी कांग्रेस को लेकर आक्रामक है. मान सरकार में कांग्रेस के कई नेताओं के खिलाफ कार्रवाई को लेकर भी लोकल कांग्रेसी नाराज हैं और शुरू से ही इंडिया गठबंधन में आम आदमी पार्टी की एंट्री का विरोध करते आए हैं. सूबे में दोनों दलों का साथ चुनाव लड़ना स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए भी असहज करने वाला होता.

नए गठबंधन में पुराना फॉर्मूला

लेफ्ट और कांग्रेस के गठबंधन की बात करें तो दोनों दल केरल छोड़कर दूसरे राज्यों में पहले से भी गठबंधन में हैं जहां ये नंबर वन या नंबर दो की पोजिशन से नीचे हैं. पश्चिम बंगाल में लेफ्ट-कांग्रेस का गठबंधन पुराना है. यहां टीएमसी सत्ता में है और पिछले चुनाव में बीजेपी दूसरे नंबर की पार्टी बनकर उभरी लेकिन उससे पहले कांग्रेस-लेफ्ट गठबंधन ही मुख्य विपक्ष था. बिहार में भी नंबर वन और नंबर दो की लड़ाई आरजेडी-बीजेपी में है और इस राज्य में भी कांग्रेस-लेफ्ट, आरजेडी के नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा हैं.

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