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'INDIA' अलायंस की कांटों भरी राह... सीट शेयरिंग पर कवायद शुरू होते ही बंगाल से बिहार तक दंगल

कांग्रेस चुनावी मोड में आ गई है. आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर सीट शेयरिंग से लेकर घोषणा पत्र तैयार करने पर काम तेज कर दिया है. गुरुवार को पार्टी हाईकमान ने बड़ी बैठक की. इसमें नेताओं से चर्चा की और 255 सीटों पर चुनाव लड़ने पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहा है. कांग्रेस इन सीटों को जिताऊ मानकर चल रही है. कांग्रेस का गठबंधन पैनल जल्द ही इंडिया अलायंस के सहयोगियों के साथ बातचीत शुरू करेगा.

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कांग्रेस हाईकमान ने दिल्ली में अलायंस में सीट शेयरिंग पर चर्चा की. (File Photo)
कांग्रेस हाईकमान ने दिल्ली में अलायंस में सीट शेयरिंग पर चर्चा की. (File Photo)

विपक्षी दलों के गठबंधन इंडिया ब्लॉक में सहयोगियों के बीच सीट शेयरिंग को लेकर खींचतान और तनाव बढ़ गया है. सबसे ज्यादा मुश्किलें कांग्रेस के सामने आ रही हैं. अलायंस में सबसे बड़ी और नेशनल पार्टी होने के कारण कांग्रेस को सभी दलों को साधने की चुनौती है. इस बीच, क्षेत्रीय और सहयोगी दल अपने-अपने प्रभाव वाले राज्यों में कांग्रेस पर एडजस्ट करने का दबाव बना रहे हैं. फिर चाहे पश्चिम बंगाल हो या दिल्ली और पंजाब. बिहार हो या यूपी. हर जगह सीट शेयरिंग पर मंथन के बीच विवाद की खबरें आ रही हैं. यही वजह है कि डेडलाइन निकलने के हफ्तेभर बाद भी सहमति नहीं बन सकी है. अब दिल्ली हाईकमान सीटें फाइनल करेगा.

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इंडिया ब्लॉक में 28 पार्टियां सहयोगी हैं. दिल्ली में गठबंधन के सहयोगी दलों ने 19 दिसंबर को चौथी बैठक की थी. इसमें सीट शेयरिंग को लेकर सभी पार्टियों को अपने-अपने राज्यों में फॉर्मूला निकालने और 30 दिसंबर तक सहमति बनाने की अंतिम तारीख रखी गई थी. लेकिन, देखने में आ रहा है कि कोई भी दल समझौता या पीछे हटने को तैयार नहीं है. हर दल अपने राज्य में ज्यादा से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने का मन बना रहा है. हालांकि, यह संभव नहीं है. ऐसे में गठबंधन के सहयोगी दलों में राज्य स्तर पर विवाद होना शुरू हो गया है.

'255 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी'

सबसे ज्यादा मुसीबत और चुनौती कांग्रेस के सामने है. उसे नॉर्थ से लेकर साउथ तक सीट शेयरिंग पर माथापच्ची और सहमति बनाने में अब तक सफलता नहीं मिली है. गुरुवार को कांग्रेस नेतृत्व ने राज्य इकाइयों से कहा कि पार्टी आगामी लोकसभा चुनावों में 255 सीटों पर फोकस करेगी. यानी इन सीटों पर वो चुनाव लड़ने का इरादा बना चुकी है और वो इसे जीतने योग्य मानती है. हालांकि, यह सीटों की संख्या 2019 के आम चुनावों की तुलना में कम है. कांग्रेस ने इन सीटों को जीतने की संभावना की श्रेणी में रखा है.

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'जल्द अलांयस के सहयोगियों से बात करेगी कांग्रेस'

कांग्रेस जल्द ही लोकसभा चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की पहली सूची भी जारी करेगा. उसने राज्यों से यह प्रक्रिया तुरंत शुरू करने के लिए कहा है. पार्टी इस सप्ताह इस प्रैक्टिस के हिस्से के रूप में प्रत्येक राज्य के लिए स्क्रीनिंग कमेटीज भी बनाएगी. कांग्रेस ने यह भी कहा है कि इंडिया ब्लॉक के सहयोगियों के साथ सीट शेयरिंग पर तुरंत बातचीत शुरू करेंगे. सहमति बनाने के लिए कांग्रेस की पांच सदस्यीय नेशनल अलायंस कमेटी को जिम्मेदारी दी गई है. वो बातचीत करके फॉर्मूला फाइनल करेगी.

'गुजरात और हरियाणा में भी चुनावी मोड में AAP'

फिलहाल, कांग्रेस ने प्रत्येक राज्य के आधार पर सहयोगी पार्टियों के साथ बातचीत करने का फैसला किया है. दूसरे शब्दों में कहा जाए तो कांग्रेस दिल्ली और पंजाब को लेकर AAP के साथ बातचीत करेगी. AAP ने अब गुजरात और हरियाणा में भी हिस्सेदारी मांगने की तैयारी कर ली है. इस बात के संकेत भी मिल रहे हैं. केजरीवाल तीन दिन के दौरे पर 6 जनवरी को गुजरात जा रहे हैं. वे वहां चुनावी तैयारियों की भी समीक्षा करेंगे. इसी तरह AAP ने हरियाणा में भी संगठन खड़ा किया है. इन राज्यों में भी केजरीवाल की पार्टी अपना कुछ प्रभाव होने का दावा करती है. यही मसला वामपंथियों और अन्य पार्टियों को लेकर भी है, जो इंडिया ब्लॉक में शामिल हैं और एक से ज्यादा राज्यों में चुनाव लड़ना चाहती हैं.

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'कांग्रेस जानती है- मुश्किल भरा है यह रास्ता'

इसी तरह, पश्चिम बंगाल में टीएमसी, बिहार में राजद और जदयू के साथ सीटें फाइनल करना होंगी. यूपी में सपा और आरएलडी से बातचीत होना बाकी है. जानकार इसे आसान नहीं मान रहे हैं. कांग्रेस भी जानती है कि कुछ राज्यों खासकर दिल्ली, पंजाब, पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश में सीटों का बंटवारा मुश्किलों भरा होने वाला है. इधर, कांग्रेस की राज्य इकाइयां भी ज्यादा से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने पर जोर दे रही हैं. पंजाब कांग्रेस का मानना ​​है कि राज्य में सत्तारूढ़ AAP के साथ कोई भी समझौता आत्मघाती होगा. बंगाल इकाई भी तृणमूल कांग्रेस के साथ किसी भी गठबंधन के खिलाफ है. 

'पंजाब से लेकर महाराष्ट्र तक तनाव...'

AAP ने भले यह संकेत दिया है कि वो पंजाब में कांग्रेस के साथ सीट शेयरिंग करने के लिए तैयार है. लेकिन यह इतना आसान नहीं है. पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने हाल ही में 'एक थी कांग्रेस' कहकर तंज कसा था. उससे पहले खुद AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पंजाब की सभी 13 सीटों पर दावेदारी कर दी थी. इसी तरह, पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी ने कांग्रेस को सिर्फ दो सीटें ऑफर किए जाने के संकेत दे दिए हैं. वहीं, सपा अध्यक्ष पहले से ही साफ करते आ रहे हैं कि वो यूपी में खुद बड़े भाई की भूमिका में रहेंगे. यूपी में समाजवादी पार्टी ने संकेत दिया था कि वो 65 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. कांग्रेस और आरएलडी के लिए सिर्फ 15 सीटें छोड़ेगी. बिहार में राजद और जदयू का प्रभाव है. भले कांग्रेस महागठबंधन का हिस्सा है. महाराष्ट्र में उद्धव गुट के साथ खींचतान भी पिछले हफ्ते सुर्खियां बटोर चुकी है.

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'बातचीत से रास्ता निकालने की तैयारी में कांग्रेस'

दिल्ली और पंजाब में AAP के साथ सीट बंटवारे पर कांग्रेस नेता मुकुल वासनिक ने कहा, मैं यह कहने की स्थिति में नहीं हूं कि हम गठबंधन में प्रत्येक राजनीतिक दल से कैसे निपटेंगे. जब भी वे उपलब्ध होंगे, हम उनके साथ बातचीत कर रास्ता निकालेंगे. कांग्रेस नेशनल अलायंस कमेटी में मुकुल वासनिक संयोजक हैं. इसमें पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, भूपेश बघेल के अलावा मोहन प्रकाश और सलमान खुर्शीद शामिल हैं. इन नेताओं ने ही अंतिम बातचीत की और पार्टी नेतृत्व को आगे का रास्ता सुझाया.

'2019 में सिर्फ 55 सीटें जीती थी कांग्रेस'

2019 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस ने 421 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 52 सीटें जीती थीं. कांग्रेस कुछ राज्यों में गठबंधन का हिस्सा थी. इनमें बिहार में राजद, महाराष्ट्र में एनसीपी, कर्नाटक में जद (एस), झारखंड में झामुमो और तमिलनाडु में डीएमके के साथ मैदान में थी. कांग्रेस ने बिहार की 40 सीटों में से सिर्फ 9 सीटों पर, झारखंड की 14 सीटों में से 7 सीटों पर, कर्नाटक की 28 सीटों में से 21 सीटों पर, महाराष्ट्र की 48 सीटों में से 25 सीटों पर और तमिलनाडु की 39 सीटों में से 9 सीटों पर चुनाव लड़ा था. उत्तर प्रदेश में कांग्रेस ने 80 में से 70 सीटों पर चुनाव लड़ा था.

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पंजाब पर कांग्रेस का रेड अलर्ट...

दिल्ली में पार्टी हाईकमान के साथ बैठक में सभी राज्यों के पदाधिकारियों को बुलाया गया था. इन नेताओं ने अपने प्रस्ताव रखे. बिहार इकाई ने कहा, अगर कांग्रेस अलायंस में 25 सीटों की मांग करेगी तो हमें 10-12 सीटें मिल सकती हैं. हम गठबंधन चाहते हैं और जहां तक ​​जदयू और राजद को समायोजित करने का सवाल है तो हम प्लस और माइनस के लिए तैयार हैं. झारखंड के नेताओं ने कहा, हमें 12 सीटों का दावा करना चाहिए और 7 से नीचे सहमत नहीं होना चाहिए. यूपी इकाई ने 40 सीटों की मांग रखी, लेकिन समाजवादी पार्टी के साथ सौदेबाजी में 20 सीटें मिलने की उम्मीद जताई. पश्चिम बंगाल के नेताओं ने कहा, हमें 6 सीटों की मांग करनी चाहिए और टीएमसी पर 4 सीटें देने का दबाव बनाना चाहिए. पंजाब की इकाई AAP के साथ गठबंधन के खिलाफ देखी गई. दिलचस्प बात यह है कि अलायंस कमेटी ने पंजाब के लिए अपनी रिपोर्ट सबमिट नहीं की है. इसे पंजाब में AAP-कांग्रेस अलायंस के लिए एक रेड अलर्ट माना जा रहा है. पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वारिंग ने कहा, AICC ने हमें सभी 13 सीटों पर लड़ने के लिए कहा है. बैठक में पंजाब के बारे में सीट बंटवारे या अलायंस पर कोई चर्चा नहीं हुई. हमने सभी 13 सीटों पर लड़ने की तैयारी कर ली है. हम आने वाले 3-4 महीनों में उम्मीदवारों और चुनाव लड़ने की रणनीति पर चर्चा करेंगे.

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'पीएम मोदी की सेवा में व्यस्त हैं ममता'

इससे पहले बंगाल कांग्रेस के अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने ममता बनर्जी पर हमला बोला था. अधीर ने कहा था, हमने भीख नहीं मांगी. ममता बनर्जी ने खुद कहा कि वो गठबंधन चाहती हैं. हमें ममता बनर्जी की दया की जरूरत नहीं है. ममता, पीएम मोदी की सेवा में व्यस्त हैं. उन्होंने यह भी दावा किया कि ममता कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं चाहती हैं. कांग्रेस अपने दम पर आम चुनाव चुनाव लड़ सकती है.

'बंगाल में कांग्रेस आठ सीटें मांग रही है...'

इससे पहले टीएमसी के प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा था, 2021 के विधानसभा चुनावों में टीएमसी अकेले लड़ी और सत्ता में आई. जबकि कांग्रेस ने वामपंथियों के साथ गठबंधन किया और शून्य सीटें जीतीं. पश्चिम बंगाल में किसी को भी कांग्रेस की जरूरत नहीं है. लेकिन इंडिया अलायंस में होने की वजह से टीएमसी कांग्रेस का समर्थन कर रही है. अंतिम फैसला ममता बनर्जी करेंगी. जब ममता बनर्जी ने उन्हें आगामी चुनाव के लिए बंगाल में दो सीटों की पेशकश की तो उन्होंने (कांग्रेस) कहा कि वे आठ सीटें चाहते हैं. मैं उनसे पूछना चाहता हूं, आपके पास विधानसभा चुनाव में 294 सीटें थीं तो आप किसी पर भी क्यों नहीं जीते?

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'आपस में लड़ रहे अलायंस के नेता'

बीजेपी नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा, 'इंडिया अलायंस में अंदरूनी कलह खूब चल रही है. वे समझ नहीं पा रहे हैं कि वे कहां एकजुट हो रहे हैं, उनका नेतृत्व कौन करेगा और उनका आयोजक कौन है. वे तय नहीं कर पा रहे हैं कि गठबंधन का नेतृत्व कौन करेगा और इसका निर्देशन कौन करेगा. वे पीएम मोदी से लड़ने से पहले आपस में लड़ रहे हैं.

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