महाराष्ट्र की सोलापुर लोकसभा सीट पर दो मौजूदा विधायकों के बीच मुकाबला हो रहा है जो पहली बार संसदीय राजनीति में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. कांग्रेस ने सोलापुर से पूर्व मुख्यमंत्री सुशील कुमार शिंदे की बेटी प्रणीति शिंदे को टिकट दिया है तो भाजपा ने मालाशिरस से विधायक राम सातपुते को चुनावी मैदान में उतारा है.
सोलापुर सीट पर कांग्रेस और बीजेपी के बीच मुकाबला भी दिलचस्प हो गया है, क्योंकि नामांकन वापसी लेने के आखिरी दिन डॉ बाबासाहेब अंबेडकर के बेटे प्रकाश अंबेडकर के नेतृत्व वाली वंचित बहुजन आघाडी के उम्मीदवार राहुल गायकवाड़ ने अपना नामांकन वापस ले लिया. और निर्दलीय उम्मीदवार आतिश बंसोडे को अपना समर्थन दिया है. साथ ही AIMIM ने इस बार सोलापुर सीट पर अपना उम्मीदवार नहीं उतारा है.
नोटबंदी से हुई बीड़ी मजदूरों के परेशानी: कांग्रेस प्रत्याशी
प्रणीति शिंदे ने कहा कि सोलापुर अलग-अलग समस्याओं वाला एक बड़ा निर्वाचन क्षेत्र है. मैंने वहां जाकर प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र को कवर करने की कोशिश की है और लोगों की समस्याओं को समझा है. कैसे उन्हें भाजपा शासन में कष्ट सहना पड़ रहा है.
उन्होंने ये भी कहा कि जब नोटबंदी हुई तो बीड़ी मजदूरों को बहुत नुकसान हुआ. उन्हें साप्ताहिक आधार पर नकद भुगतान मिलता था, लेकिन अब उन्हें नकद नहीं मिलता है जो उनके लिए एक मुद्दा है. दैनिक वेतन भोगी श्रमिकों को हाथ में नकदी की जरूरत होती है. प्रणीति शिंदे सोलापुर सिटी सेंट्रल विधानसभा क्षेत्र से तीन बार एमएलए का चुनाव जीत चुकी हैं.
BJP प्रत्याशी ने खारिज किए कांग्रेस के आरोप
कांग्रेस के इन आरोपों पर भाजपा प्रत्याशी ने कहा कि राम सातपुते ने कहा, 'यह सिर्फ कांग्रेस की कहानी है. मैं चाहता हूं कि सोलापुर के निवासियों को पता चले कि 650 करोड़ रुपये की समानांतर पाइपलाइन की जल योजना शुरू की गई है. उजानी बांध से सोलापुर तक पानी लाने की केंद्र की योजना पर काम चल रहा है और आने वाले पांच महीनों में पानी की समस्या दूर हो जाएगी. निकटवर्ती अक्कलकोट क्षेत्र में, मोदी सरकार द्वारा सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया गया था, लेकिन 40 वर्षों तक कांग्रेस ने कुछ नहीं किया.
तीसरी बार जीतेगी भाजपा
भाजपा प्रत्याशी ने आगे कहा कि उनके (प्रणिति के) पिता (सुशील कुमार शिंदे) को यहां से दो बार लोकसभा चुनावों में हार का सामना करना पड़ा. हमारी पार्टी के नेता सुभाष देशमुख ने उनकी मां (उज्वला शिंदे) को हराया. यह चौथी बार होगा जब कांग्रेस ने किसी एक ही परिवार के सदस्य को टिकट दिया है, क्योंकि उन्हें कोई अन्य पार्टी कार्यकर्ता नहीं मिला. वह भी हार जाएंगी. सोलापुर का मतदाता बुद्धिमान है और भाजपा को चुनेगा.
वहीं, भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोलापुर में 29 अप्रैल को एक चुनावी रैली कर चुके हैं. जबकि प्रणीति शिंदे के समर्थन में उद्धव ठाकरे भी एक रैली को संबोधित कर चुके हैं.
इस सीट पर 7 मई को होगा मतदान
सोलापुर लोकसभा क्षेत्र की सीमा कर्नाटक सीमा के करीब है. यह अपने सूती चादर, सोलापुरी चादर के लिए प्रसिद्ध है. यह हथकरघा और पावरलूम उद्योग के लिए भी जाना जाता है. इस इलाके में तेंदू के पत्तों में से बनने वाली बीड़ी, हाथ से बनाई जाने वाली सिगरेट का काम होता है. सोलापुर में सबसे बड़ी समस्याओं पानी की कमी है, स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें छह से सात दिनों में एक बार पानी मिलता है. यहां बेरोजगारी और यहां के न होने वाला औद्योगिक विकास भी बड़ा मुद्दा है.
कांग्रेस का गढ़ रहा है सोलापुर
ऐतिहासिक रूप से सोलापुर सीट कांग्रेस का गढ़ रही है. प्रणीति शिंदे परिवार की तीसरी सदस्य हैं जो सोलापुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ रही हैं. उनके पिता ने इस निर्वाचन क्षेत्र का तीन बार 1998, 1999 और 2009 में प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. लेकिन कांग्रेस ने अपने इस गढ़ को 2014 और 2019 में गंवा दिया.वर्तमान में इसका प्रतिनिधित्व भाजपा के जय सिद्धेश्वर शिवाचार्य स्वामी कर रहे हैं. 2014 में इसका प्रतिनिधित्व एक अन्य पार्टी नेता शरद बंसोडे ने किया था.