scorecardresearch
 

Hot Seat: पौड़ी गढ़वाल में BJP को जीत की हैट-ट्रिक बनाने से रोक पाएगी कांग्रेस? जानें क्या कहता है Exit Poll

Pauri-Garhwal Lok Sabha Seat: पौड़ी गढ़वाल सीट की खास बात यह है कि ठाकुर बाहुल्य होने के बावजूद यहां से ब्राह्मण चेहरे जीतते रहे हैं. 1991 के बाद से गढ़वाल सीट पर 7 बार ब्राह्मण उम्मीदवार जीते हैं. भौगोलिक लिहाज से यह उत्तराखंड का सबसे बड़ा संसदीय निर्वाचन क्षेत्र है. यहां एक बार फिर मुकाबला दो ब्राह्मण प्रत्याशियों बीजेपी के अनिल बलूनी और कांग्रेस के गणेश गोदियाल के बीच है.

Advertisement
X
पौड़ी गढ़वाल लोकसभा सीट से बीजेपी के अनिल बलूनी और कांग्रेस के गणेश गोदियाल चुनावी मैदान में हैं.
पौड़ी गढ़वाल लोकसभा सीट से बीजेपी के अनिल बलूनी और कांग्रेस के गणेश गोदियाल चुनावी मैदान में हैं.

लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे 4 जून को घोषित होंगे. उस​ दिन राजनीति में रुचि रखने वाले लोगों की नजरें उत्तराखंड की पौड़ी गढ़वाल संसदीय सीट पर भी होंगी. बीजेपी ने इस बार यहां से अपने मुख्य प्रवक्ता एवं मीडिया प्रभारी अनिल बलूनी को उम्मीदवार बनाया है. वहीं कांग्रेस ने अपने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल को चुनावी मैदान में उतारा है. इंडिया टुडे-एक्सिस माय इंडिया के एग्जिट पोल के मुताबिक पौड़ी गढ़वाल सीट पर बीजेपी उम्मीदवार बलूनी कांग्रेस उम्मीदवार गोदियाल पर भारी पड़ सकते हैं.  

Advertisement

बता दें कि 1957 में पौड़ी गढ़वाल संसदीय सीट अस्तित्व में आया था. उत्तराखंड के पांच जिलों चमोली, नैनीताल (कुछ हिस्सा), पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग और टिहरी-गढ़वाल (कुछ हिस्सा) को शामिल करके इस संसदीय निर्वाचन क्षेत्र का गठन किया गया था. पौड़ी गढ़वाल संसदीय सीट में उत्तराखंड के 14 विधानसभा क्षेत्र आते हैं- बद्रीनाथ, थराली (एससी), कर्णप्रयाग, केदारनाथ, रुद्रप्रयाग, देवप्रयाग, नरेंद्रनगर, यमकेश्वर, पौड़ी (एससी), श्रीनगर, चौबट्टाखाल, लैंसडाउन, कोटद्वार और रामनगर.

कांग्रेस 1998 से सिर्फ एक बार जीती है पौड़ी गढ़वाल सीट
        
इन 14 विधानसभाओं में बद्रीनाथ को छोड़कर बाकी सब जगह बीजेपी के विधायक हैं. जब उत्तराखंड उत्तर प्रदेश का हिस्सा हुआ करता था तब पौड़ी गढ़वाल लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में पांच विधानसभा क्षेत्र शामिल थे- नजीबाबाद, बद्री-केदार, कर्णप्रयाग, लैंसडाउन और पौड़ी. 1998 से 2019 के बीच कांग्रेस पौड़ी-गढ़वाल संसदीय सीट से सिर्फ 1 बार जीत दर्ज कर सकी है. बीजेपी की नजर इस बार यहां जीत की हैट-ट्रिक बनाने पर है. 1998, 1999 और 2004 में इस सीट पर बीजेपी के भुवन चंद्र खंडूरी ने जीत दर्ज की.
        
साल 2009 के लोकसभा चुनाव में सतपाल महाराज ने पौड़ी गढ़वाल सीट कांग्रेस की झोली में डाली. अब वह बीजेपी में शामिल हो चुके हैं. साल 2014 में यहां से एक बार फिर बीजेपी के बीसी खंडूरी चुनाव जीते. वहीं 2019 के लोकसभा चुनाव में पौड़ी गढ़वाल से बीजेपी के तीरथ सिंह रावत ने जीत हासिल की. अगर जातिगत और धार्मिक समीकरण की बात करें तो यह एक हिंदू बाहुल्य सीट है. पौड़ी गढ़वाल में करीब 45% ठाकुर मतदाता हैं. ब्राह्मण वोटर्स की संख्या 30% और दलित करीब 18% हैं.
    
पौड़ी गढ़वाल सीट की खास बात यह है कि ठाकुर बाहुल्य होने के बावजूद यहां से ब्राह्मण चेहरे जीतते रहे हैं. 1991 के बाद से गढ़वाल सीट पर 7 बार ब्राह्मण उम्मीदवार जीते हैं. भौगोलिक लिहाज से यह उत्तराखंड का सबसे बड़ा संसदीय निर्वाचन क्षेत्र है. यहां एक बार फिर मुकाबला दो ब्राह्मण प्रत्याशियों बीजेपी के अनिल बलूनी और कांग्रेस के गणेश गोदियाल के बीच है. 

Advertisement

एग्टिज पोल में बीजेपी उत्तराखंड में कर रही क्लीन स्वीप

लोकसभा चुनाव 2024 के लिए इंडिया टुडे-एक्सिस माय इंडिया के एग्जिट पोल की मानें तो उत्तराखंड में बीजेपी एक बार फिर क्लीन स्वीप करती हुई दिख रही है. अगर एग्जिट पोल सही साबित होता है तो यह लगातार तीसरा चुनाव होगा जब भाजपा उत्तराखंड की पांचों लोकसभा सीटें जीतेगी. इंडिया टुडे-एक्सिस माय इंडिया एग्जिट पोल के मुताबिक उत्तराखंड में बीजेपी को 60 फीसदी वोट शेयर हासिल होता दिख रहा है. यहां 2019 के मुकाबले भगवा पार्टी को 1 फीसदी वोटों का नुकसान होने का अनुमान है, लेकिन उसकी सीटों में कोई अंतर नहीं आ रहा. वहीं कांग्रेस का वोट शेयर 4 फीसदी बढ़ने का अनुमान एग्टिज पोल में लगाया गया है. उसे उत्तराखंड में 2019 के 31 के मुकाबले 2024 में 35 फीसदी वोट मिल सकते हैं. लेकिन सीट एक भी नहीं मिलती नजर आ रही है.
 

Live TV

Advertisement
Advertisement