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उमा भारती दरकिनार या पिक्चर अभी बाकी है? BJP की पहली सूची और MP की राजनीति का समझें पूरा गणित

पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने पहले ही बोला था कि वह 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ेंगी. बीजेपी की पहली सूची में उमा भारती का नाम नहीं है. इसलिए सवाल उठ रहे हैं कि क्या उमा भारती को बीजेपी ने दरकिनार कर दिया है? इसके कयास इसलिए भी लगाए जा रहे हैं क्योंकि उमा भारती जिन सीटों से लोकसभा चुनाव लड़ती आयी हैं उन तीनों ही सीटों (झांसी, भोपाल, खजुराहो) पर बीजेपी ने उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है.

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उमा भारती ने 2024 का चुनाव लड़ने का ऐलान किया था लेकिन बीजेपी की पहली सूची में उनका नाम नहीं है. (PTI Photo)
उमा भारती ने 2024 का चुनाव लड़ने का ऐलान किया था लेकिन बीजेपी की पहली सूची में उनका नाम नहीं है. (PTI Photo)

लोकसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने 195 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है, जिसमें मध्य प्रदेश से दो बड़े नाम भी शामिल हैं, पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया. लेकिन 2024 में लोकसभा चुनाव लड़ने का दावा कर चुकीं पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती का नाम पहली सूची में नहीं है. हम आपको बीजेपी की पहली सूची में मध्य प्रदेश की सीटों का विश्लेषण बता रहे हैं, साथ ही साध्वी प्रज्ञा और केपी यादव के टिकट कटने की वजह भी. यह भी बताएंगे कि भाजपा ने राज्य की 5 सीटों को अभी होल्ड पर क्यों रखा है? 

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शिवराज सिंह चौहान

एमपी के पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान को बीजेपी ने विदिशा से उम्मीदवार बनाया है. शिवराज सीएम बनने से पहले इसी सीट से पांच बार सांसद रह चुके हैं. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने यह सीट उनको सौंपी थी और जब वह मुख्यमंत्री बने तो बीजेपी ने यहां से सुषमा स्वराज को टिकट दिया. अब पूरे 20 साल बाद शिवराज एक बार फिर विदिशा से लोकसभा का चुनाव लड़ेंगे. उनको टिकट देकर बीजेपी ने बता दिया है कि अब उनकी जरूरत दिल्ली में है. शिवराज का जन्म भी जैत गांव में हुआ है, जो इसी लोकसभा सीट का हिस्सा है. 

ज्योतिरादित्य सिंधिया

बीजेपी ने केंद्रीय मंत्री ज्योतोरादित्य सिंधिया को उनकी पारंपरिक गुना-शिवपुरी लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है. पिछले कुछ समय से सिंधिया जिस तरह से यहां सक्रिय थे उसे देखकर इसका आभास पहले ही हो गया था. दरअसल, यह लोकसभा क्षेत्र सिंधिया परिवार का गढ़ रहा है. यहां से 2019 में लोकसभा चुनाव हारने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया चाह रहे थे कि उन्हें हार का कलंक मिटाने का मौका मिले. लिहाजा बीजेपी ने सिंधिया की इच्छा का ध्यान रखा और गुना-शिवपुरी से उन्हें टिकट दिया.

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उमा दरकिनार या पिक्चर अभी बाकी है?

पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने पहले ही बोला था कि वह 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ेंगी. आजतक से बातचीत में उन्होंने कहा था, 'मैंने 2019 में 5 साल लिए ब्रेक लिया था और अब 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ूंगी. मुझे कोई किनारे नहीं लगा सकता'. पर बीजेपी की पहली सूची में उमा भारती का नाम नहीं है. इसलिए सवाल उठ रहे हैं कि क्या उमा भारती को बीजेपी ने दरकिनार कर दिया है? 

इसके कयास इसलिए भी लगाए जा रहे हैं क्योंकि उमा भारती जिन सीटों से लोकसभा चुनाव लड़ती आयी हैं उन तीनों ही सीटों (झांसी, भोपाल, खजुराहो) पर बीजेपी ने उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है. अब एमपी की 5 सीटें होल्ड पर हैं तो सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या उमा भारती को बीजेपी इनमें से किसी सीट से उम्मीदवार बनाती है या उनके राजनितिक भविष्य पर ब्रेक लगाती है. 

केपी यादव और साध्वी प्रज्ञा का टिकट क्यों कटा?

केपी यादव

2019 के लोकसभा चुनाव में गुना सीट से ज्योतिरादित्य सिंधिया को पटखनी देने वाले केपी यादव का टिकट काट दिया गया है. जाहिर है सिंधिया की गुना से चुनाव लड़ने की इच्छा का ध्यान रखते हुए बीजेपी ने उनको हराने वाले केपी यादव को साइडलाइन कर दिया है. दरअसल, सांसद केपी यादव और सिंधिया समर्थक नेताओं की वजह से कई बार पार्टी आलकमान के सामने असहज स्थिति उत्पन्न हो रही थी. केपी यादव खुद कई बार इसकी शिकायत आलकमान से कर चुके थे कि सिंधिया समर्थक मंत्री उनके सांसद होते हुए भी इलाके की महत्वपूर्ण बैठकों में उन्हें नहीं बुलाते और शिलान्यास पट्टिका में नाम नहीं देते. 

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हाल ही में गुना के जिला पासपोर्ट केंद्र का केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया उद्घाटन करने वाले थे. उनसे पहले केपी यादव ने बिना किसी कार्यक्रम के पासपोर्ट केंद्र का उद्घाटन कर दिया था, जिससे सिंधिया गुट में नाराजगी थी. वहीं आलाकमान ने भी इसे गलत माना था. देखना यह है कि अब केपी यादव का अगला कदम क्या होगा? क्या वह कांग्रेस में जाकर इस सीट पर फिर सिंधिया को चुनौती देंगे या पार्टी से जुड़े रहेंगे?  
 
साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर

2019 के लोकसभा चुनाव में दिग्विजय सिंह को साढ़े तीन लाख से भी ज्यादा वोटों से हराने वालीं साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर का टिकट बीजेपी ने काट दिया है. माना जा रहा है कि उनके दिए बयानों की वजह से पीएम मोदी ने जो नाराजगी  जताई थी उसका खामियाजा उन्हें टिकट गंवाकर उठाना पड़ा है. पीएम मोदी ने तब कहा था कि वह दिल से कभी उन्हें माफ नहीं करेगे. हालांकि टिकट कटने के बाद आजतक से बात करते हुए साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने कहा कि संगठन और पार्टी को जहां और जैसे उनकी जरूरत होगी वह उपलब्ध रहेंगी और बीजेपी को वह नहीं छोड़ेंगी. 

विधानसभा चुनाव हारने वाले सांसदों को टिकट 

हाल ही में विधानसभा चुनाव हारने वाले सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते और गणेश सिंह को बीजेपी ने फिर लोकसभा का टिकट दिया है. आपके मन में सवाल उठा होगा कि 3 महीने पहले ही चुनाव हारने के बावजूद इन्हे टिकट क्यों मिला? तो आपको बता दें कि जातिगत समीकरणों को ध्यान में रखते हुए इन्हे लोकसभा का टिकट दिया गया है. मंडला से उम्मीदवार फग्गन सिंह कुलस्ते सूबे के बडे़ आदिवासी नेता हैं, जबकि सतना से उम्मीदवार गणेश सिंह कुर्मी समाज से आते हैं. बीजेपी एमपी में बड़ी ओबीसी आबादी को गणेश सिंह का टिकट काटकर निराश नहीं करना चाहती. वैसे भी सतना लोकसभा सीट पर कुर्मी वोटर निर्णायक भूमिका में हैं.

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