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कर्नाटक: खनन कारोबारी जनार्दन रेड्डी ने फिर थामा बीजेपी का दामन, 2022 में बना ली थी अलग पार्टी

कर्नाटक के खनन कारोबारी और राज्य सरकार में पूर्व पर्यटन मंत्री, जी जनार्दन रेड्डी एक बार फिर से भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए हैं. उन्होंने पार्टी की सदस्यता लेते हुए बीजेपी में अपनी पार्टी का विलय किया. रेड्डी पर अवैध खनन और भ्रष्टाचार मामले में कथित संलिप्तता का आरोप है और वो 2015 से जमानत पर बाहर हैं.

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बीजेपी में शामिल हुए जनार्दन रेड्डी
बीजेपी में शामिल हुए जनार्दन रेड्डी

कर्नाटक (Karnataka) में गंगावती निर्वाचन क्षेत्र से कल्याण राज्य प्रगति पक्ष (KRPP) विधायक और खनन कारोबारी, जी जनार्दन रेड्डी (G Janardhana Reddy) ने एक बार फिर बीजेपी का दामन थाम लिया है. पार्टी ज्वाइन करने के बाद उन्होंने कहा कि आज मैं अपनी पार्टी का बीजेपी में विलय करके बीजेपी में शामिल हो गया. मैं पीएम मोदी को तीसरी बार प्रधानमंत्री बनाने के लिए एक बीजेपी कार्यकर्ता के रूप में काम करूंगा. मैं बिना किसी शर्त के पार्टी में शामिल हुआ हूं. मुझे किसी पद की जरूरत नहीं है. 

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बता दें कि जनार्दन रेड्डी ने दिसंबर 2022 में बीजेपी के साथ अपने दो दशक पुराने रिश्ते को तोड़ते हुए नई पार्टी बनाई थी. खनन घोटाले में कथित भूमिका के लिए रेड्डी को सीबीआई ने गिरफ्तार किया था.

जनार्दन रेड्डी सूबे में कई सालों तक बीजेपी से जुड़े रहे, लेकिन 2011 में अवैध खनन और भ्रष्टाचार मामले में कथित संलिप्तता के बाद उन्हें पद से हटा दिया गया था. रेड्डी, कर्नाटक के बीजेपी मंत्री श्रीरामुलु के करीबी सहयोगी थे. 2018 के विधानसभा चुनाव में, उन्होंने पार्टी से अनबन के बावजूद मोलकालमुरु विधानसभा सीट पर बीजेपी नेता के लिए प्रचार किया था.

2015 में मिली थी जमानत

जनार्दन रेड्डी को सितंबर 2011 में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने कर्नाटक के बेल्लारी और आंध्र प्रदेश के अनंतपुर में करोड़ों रुपये के अवैध लौह अयस्क खनन के मामले में गिरफ्तार किया था. वह 2015 से जमानत पर बाहर हैं. सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई जमानत शर्तों के मुताबिक उन्हें बेल्लारी के साथ-साथ आंध्र प्रदेश के अनंतपुर और कडप्पा जाने पर भी प्रतिबंध है. 

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बीजेपी से विधान परिषद सदस्य रह चुके हैं रेड्डी

जनार्दन रेड्डी तब सुर्खियों में आए, जब उन्होंने 1999 के लोकसभा चुनाव में पूर्व केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज के लिए अपने भाइयों के साथ प्रचार किया, जब वह बेल्लारी से सोनिया गांधी के खिलाफ लड़ी थीं. 2006 में रेड्डी को बीजेपी ने कर्नाटक विधान परिषद का सदस्य बनाया था. ऐसा कहा जाता है कि उन्होंने 2008 के विधानसभा चुनाव में बीएस येदियुरप्पा के साथ अहम भूमिका निभाई थी, जिसने बीजेपी के लिए पहली बार दक्षिणी राज्य में सरकार बनाने का रास्ता साफ किया था. उन्हें बीएस येदियुरप्पा के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार में पर्यटन और बुनियादी ढांचा मंत्री के रूप में नियुक्त किया गया था. बाद में उन्हें राजस्व मंत्री के रूप में नियुक्त किया गया, जिससे उन्हें राज्य के खनन उद्योग पर नियंत्रण मिल गया. 

जनार्दन रेड्डी के लिए हालात तब खराब हो गए, जब 2011 में, कर्नाटक में भ्रष्टाचार विरोधी निगरानी संस्था लोकायुक्त ने राज्य में अवैध खनन पर एक रिपोर्ट जारी की. इस रिपोर्ट में उन्हें और उनके भाई करुणाकर रेड्डी को एक खनन माफिया के सरगना के रूप में नामित किया गया था, जिसने राज्य के खजाने को 16 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान पहुंचाया था.

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