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Gujarat: सिर्फ एक वोटर के लिए यहां बनेगा पोलिंग बूथ, 15 चुनाव अधिकारी रहेंगे तैनात

Gujarat News: आज हम आपको ऐसे बूथ के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां सिर्फ एक ही वोटर है. दुनिया में सबसे बड़ी लोकशाही को मजबूत बनाने के लिए एक मतदाता के लिए भी चुनाव आयोग पोलिंग बूथ बनाता है. यह पोलिंग बूथ गिर जंगल के अंदरूनी हिस्से में नेशनल पार्क के बिल्कुल अंदर जूनागढ़ से 110 किमी दूरी पर स्थित है.

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प्रतीकात्मक तस्वीर.
प्रतीकात्मक तस्वीर.

देश में लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election) का बिगुल बज चुका है. ऐसे में हम ऐसे अनोखे बूथ के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां सिर्फ एक ही वोटर है. एक मतदाता के लिए भी चुनाव आयोग ने पोलिंग बूथ बनाया है. इस खास पोलिंग बूथ पर कर्मचारी सुबह से शाम तक तैनात रहेंगे. ये पोलिंग बूथ बाणेज में बनाया जा रहा है.

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यह बूथ गिर जंगल के अंदरूनी हिस्से में नेशनल पार्क के बिल्कुल अंदर है. यह जूनागढ़ से 110 किलोमीटर की दूरी पर पौराणिक मंदिर के पास है. इसे बाणगंगा के नाम से भी जाना जाता है. मंदिर के महंत हरिदास बानेज पोलिंग बूथ के इकलौते मतदाता हैं. गिर सोमनाथ के जिला प्रशासक अधिकारी ने बानेज मंदिर का जायजा लिया और मतदान की व्यवस्था के बारे में चर्चा की.

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साल 2002 से बन रहा है खास पोलिंग बूथ 

चुनाव आयोग साल 2002 से यहां खास बूथ की व्यवस्था करता चला आ रहा है. इस बार भी 7 मई को यहां पोलिंग बूथ बनेगा, जिसमें हरिदास मतदान करेंगे. हरिदास इस खास बूथ के बारे में कहते हैं कि मैं चुनाव आयोग का आभारी हूं, जो लोकशाही को जीवंत रखते हुए मेरे लिए खास व्यवस्था करते हैं.

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हरिदास का कहना है कि मेरे वोट डालते ही मतपेटी में 100 प्रतिशत मत होने का संकेत मिलता है. मैंने किसे वोट दिया, वो भी पता चल जाता है. मैं सबसे अपील करता हूं कि वोट जरूर दें. हरिदास ने कहा कि मतदान करना हमारा कर्तव्य है. हमें जरूर मतदान करना चाहिए. चुनाव लोकशाही की धरोहर है.

पहले महंत भरतदास के लिए बनता था पोलिंग बूथ 

महंत हरिदास से पहले महंत भरतदास के लिए यहां खास पोलिंग बूथ बनाया जाता था. महंत भरतदास के लिए चुनाव आयोग हर चुनाव में बाकायदा 5 से 8 लोगों की टीम भेजकर स्पेशल बूथ की व्यवस्था करता था. पांच साल पहले 1 नवंबर 2019 को बानेज के महंत का देहावसान हो गया था. अब चुनाव आयोग भरत दास के अनुगामी हरिदास के लिए पोलिंग बूथ की व्यवस्था करता है.

गिर जंगल एशियाई शेरों के लिए जाना जाता है. ऐसे सुदूर जंगल में और खूंखार वन्यजीव होने के बावजूद भरतदास मंदिर में अकेले ही रहते थे. वे मतदान करते थे और लोगों को भी प्रेरित करते थे. हरिदास भी लोगों से मतदान करने की अपील कर रहे हैं.

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