लोकसभा चुनाव को देखते हुए बसपा ने अपनी कमर कस ली है. इसी के चलते इस बार बसपा सुप्रीमो मायावती के अलावा उनके उत्तराधिकारी आकाश आनंद और वरिष्ठ नेता सतीश चंद्र मिश्रा समेत उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल प्रचार अभियान की कमान संभाल कर मैदान में उतरेंगे. बहुजन समाज पार्टी ने कुल 40 स्टार प्रचारकों की सूची जारी की है. बसपा प्रमुख मायावती यूपी के अलावा कई अन्य प्रदेशों में भी ताबड़तोड़ रैलियां करेंगी.
पहले चरण में 19 अप्रैल को होने वाले मतदान को देखते हुए बसपा ने पहले चरण की सभी सीटों पर चुनाव प्रचार के लिए प्रचारकों के नाम घोषित किए हैं. इसमें पूर्व मुख्यमंत्री मायावती, राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद, राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा और प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल समेत कई अन्य वरिष्ठ पार्टी नेताओं के नाम शामिल हैं. वहीं एक बसपा नेता द्वारा मिली जानकारी के मुताबिक बताया जा रहा है कि आगामी 6 अप्रैल को यूपी की नगीना लोकसभा सीट से मायावती अपने प्रचार प्रसार अभियान का शंखनाद कर सकती हैं.
कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाएंगी मायावती
चर्चा यह भी है कि बसपा सुप्रीमो मायावती उत्तर प्रदेश में लगभग 50 प्रमुख जिलों में रैली के जरिए प्रचार करेंगी. कयास लगाए जा रहे हैं कि इन सभी जिलों में रैलियां कर मायावती बसपा कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाना चाहती हैं ताकि इस बार लोकसभा चुनाव में कार्यकर्ता लोकसभा प्रत्याशियों के हक में वोट मांगने और परिश्रम करने में कोई कसर न छोड़ें और बसपा के उम्मीदवारों को जनता बढ़-चढ़कर वोट करे.
मायावती का गढ़ रहा है बिजनौर जिला
वरिष्ठ पत्रकार हेमंत तिवारी ने बताया कि मायावती सबसे पहले बिजनौर जिले की नगीना लोकसभा सीट से चुनाव प्रचार कर सकती हैं क्योंकि उनका राजनीतिक सफर वहीं से शुरू हुआ था और पहला चुनाव वह वहीं से लड़ी थीं. इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. साथ ही अगर कोई भी पार्टी कैंपेन करेगी तो वह पहले और दूसरे चरण से ही करेगी. बिजनौर जिला और नगीना लोकसभा सीट मायावती का गढ़ रहा है जो एक महत्वपूर्ण रिजर्व्ड सीट है इसीलिए मायावती आरक्षित सीट से चुनाव प्रचार कर सकती हैं ताकि दलितों में सकारात्मक संदेश जाए.
सीट से ज्यादा काडर वोट अहम
हेमंत तिवारी ने आगे बताया कि राजनीतिक दलों की मजबूरी है कि वह पहले चरण से ही अपने कैंपेन की शुरुआत करेंगे क्योंकि उनके पास ज्यादा समय नहीं बचा है और उसमें भी मायावती अपने पुराने गढ़, जो बिजनौर जिले से जुड़ा हुआ है, को चुन सकती हैं.
उन्होंने बताया कि एक बड़ी बात यह कि इस लोकसभा चुनाव में मायावती ने किसी से भी गठबंधन नहीं किया ताकि वह अपनी एससी जातियों को अपने प्रभाव में रख सकें. ऐसे में पॉलिटिकल एक्सिस्टेंस के लिए वह अपने काडर वोट को बचाने की मुहिम में लगी हुई हैं. सीट जीतने से ज्यादा महत्वपूर्ण मायावती के लिए अपने काडर वोट को साथ जोड़े रखना है और इसी की कवायद चल रही है.