महाराष्ट्र (Maharashtra) के अमरावती से कांग्रेस उम्मीदवार बलवंत वानखेड़े (Balwant Wankhede) के लिए एक रैली में भाषण के दौरान शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत की जुबान लड़खड़ा गई. मंच से बोलते हुए संजय राउत ने बीजेपी प्रत्याशी और मौजूदा सांसद नवनीत राणा के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल कर बैठे. उन्होंने बीजेपी कैंडिडेट नवनीत को "नाची" कह दिया, जिसका मतलब होता है- डांसर.
संजय राउत ने कहा, 'यह लड़ाई कांग्रेस के बलवंत वानखेड़े और उस तथाकथित नाची के बीच नहीं है, बल्कि यह लड़ाई महाराष्ट्र और नरेंद्र मोदी के बीच है. यह लड़ाई मोदी और उद्धव ठाकरे, मोदी और शरद पवार और मोदी और राहुल गांधी के बीच है.
संजय राउत ने याद किया 'मोतीश्री' विवाद
इसके बाद संजय राउत ने दो साल पहले उद्धव ठाकरे के आवास 'मातोश्री' के बाहर हुए विवाद को याद किया. जब सांसद नवनीत राणा, ठाकरे के आवास के खिलाफ आक्रामक थीं और उनके घर के बाहर हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहती थीं.
संजय राउत ने कहा, 'उन्होंने मातोश्री को चुनौती दी, उन्होंने मातोश्री और हिंदुत्व के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया. इसलिए उन्हें हराना शिवसैनिकों का पहला कर्तव्य है. हमें उन्हें हराने में सबसे ज्यादा योगदान देना चाहिए. आप कह सकते हैं कि यह शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे का आदेश है.'
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नवनीत राणा और शिवसेना के बीच क्या है लड़ाई?
ठीक 2 साल पहले, जब एमवीए सत्ता में थी और उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री थे, निर्दलीय सांसद नवनीत राणा ने उद्धव ठाकरे के निजी आवास मातोश्री के बाहर हनुमान चालीसा का पाठ करने का ऐलान किया. राणा दंपति के इस जानबूझकर किए गए कृत्य को शिवसैनिकों ने एक चुनौती के रूप में लिया और उनसे कहा कि वे मातोश्री आएं और हम उन्हें प्रसाद देंगे. कानून व्यवस्था की स्थिति को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने राणा दंपत्ति को नोटिस दिया था और उन्हें उनके खार स्थित आवास से बाहर नहीं निकलने दिया था.
दूसरी तरफ मातोश्री और नवनीत राणा के आवास के बाहर बड़ी संख्या में शिवसैनिक मौजूद रहे. महाराष्ट्र में दोनों जगहों पर हाई वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला. बाद में राणा दंपति ने मातोश्री के बाहर हनुमान चालीसा का पाठ करने की योजना रद्द कर दी. लेकिन खार पुलिस ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के आवास के बाहर हनुमान चालीसा का पाठ करने की योजना बनाने के आरोप में सांसद नवनीत राणा और विधायक रवि राणा को गिरफ्तार कर लिया था.
नवनीत राणा और रवि राणा पर IPC की धारा 153 (ए) (धर्म, जाति, जन्म स्थान, निवास, भाषा आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना और सद्भाव बनाए रखने के लिए प्रतिकूल कार्य करना) और धारा 135 के तहत मामला दर्ज किया गया था. नवनीत राणा और रवि राणा दोनों ने लगभग 6 दिन न्यायिक हिरासत में गुजारे और बाद में उन्हें जमानत पर रिहा किया गया.
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अमरावती में क्या है चुनावी समीकरण?
अमरावती शिवसेना का गढ़ माना जाता है लेकिन साल 2019 में नवनीत राणा ने कांग्रेस और एनसीपी के समर्थन से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा. नरेंद्र मोदी के दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के कुछ महीनों बाद नवनीत राणा ने पाला बदल लिया और संसद में बीजेपी का समर्थन कर दिया. अब सीट बंटवारे में कांग्रेस ने अमरावती लोकसभा सीट पर दावा किया है और दरियापुर विधायक बलवंत वानखेड़े को मैदान में उतारा है, जो लो प्रोफाइल और विनम्र स्वभाव के हैं.
दूसरी ओर जनशक्ति पार्टी के प्रमुख बच्चू कडू ने दिनेश बूब (Dinesh Bub) को लोकसभा उम्मीदवार बनाया है. शिवसेना द्वारा कांग्रेस के लिए यह सीट छोड़ने से दिनेश बूब नाखुश थे और लोकसभा लड़ना चाहते थे. बीजेपी इस सीट पर चुनाव लड़ना चाहती थी, लेकिन नवनीत राणा निर्दलीय और युवा स्वाभिमान पार्टी की सदस्य थीं और उनके जाति प्रमाण पत्र पर फैसला सुप्रीम कोर्ट में लंबित था. फिर भी बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष चन्द्रशेखर बावनकुले की उपस्थिति में बीजेपी में शामिल होने के बाद पार्टी ने उन्हें अपना उम्मीदवार बनाया. बाद में 4 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने उनके जाति प्रमाण पत्र को रद्द करने के बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को पलट दिया.
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आनंदराव अडसुल से क्या है राणा की लड़ाई?
अमरावती लोकसभा सीट पर हार के बाद शिवसेना नेता आनंदराव अडसुल ने नवनीत राणा के जाति प्रमाण पत्र की वैधता को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी. 2021 में बॉम्बे हाई कोर्ट के जस्टिस आरडी धानुका और वीजी बिष्ट की बेंच ने 2013 में कौर-राणा द्वारा प्राप्त "गलत जाति प्रमाण पत्र" को रद्द कर दिया था और जब्त कर लिया था, जिसे 2017 में जाति जांच समिति द्वारा मान्य किया गया था.