उत्तर प्रदेश की मेरठ लोकसभा सीट से बीजेपी प्रत्याशी अरुण गोविल ने भी अब संविधान में बदलाव की बात की है. पत्रकारों से बात करते हुए अरुण गोविल ने कहा है कि बदलाव करना प्रगति की निशानी होती है. बीजेपी उम्मीदवार के बयान पर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने सवाल उठाए हैं.
मीडिया से बात करते हुए रामायण सीरियल के भगवान राम ने कहा, "संविधान जब हमारे देश का बना था उसमें धीरे-धीरे परिस्थितियों के हिसाब से बदलाव हुए हैं. बदलाव करना प्रगति की निशानी होती है, उसमें कोई खराब बात नहीं है. तब परिस्थितियां कुछ और थीं, आज की परिस्थितियां कुछ और हैं. संविधान किसी एक व्यक्ति की मर्जी से नहीं बदलता है, सर्वसम्मति होती है तो बदलता है, अगर ऐसा कुछ होगा तो किया जाएगा. "
मोदी जी ऐसे ही कोई बात नहीं कहते: गोविल
वहीं जब उनसे पूछा गया कि क्या 400 पार का नारा इसलिए दिया गया है क्योंकि सरकार का ऐसा कुछ बड़ा करने की इच्छा है? इसका जवाब देते हुए गोविल ने कहा, "मुझे ये महसूस होता है क्योंकि मोदी जी ऐसे ही कोई बात नहीं कहते हैं, उसके पीछे कोई ना कोई अर्थ जरूर होता है."
अखिलेश यादव ने उठाए सवाल
वहीं अखिलेश यादव ने अरुण गोविल के इस बयान पर कहा कि जो लोग संविधान में प्रगतिशील संशोधन करने और मूलभूत बदलाव करने के बीच का अंतर नहीं समझते उन्हें टिकट देकर भाजपा ने भारी भूल की है, लेकिन फिर भी इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि जनता ने हर भाजपा प्रत्याशी को हराने का फ़ैसला पहले ही कर लिया है.
सपा मुखिया ने कहा, "भाजपा संविधान को पलटकर गरीबों, वचितों, शोषितों, किसानों, युवाओं और महिलाओं के हक-अधिकार व आरक्षण मारकर और पूंजीपतियों के हक में नीति-योजना बनाकर, सारा फायदा-मुनाफा अपने खेमे के कुछ गिने-चुने खरबपतियों को दे देना चाहती है. जो चुनावी-चंदे के नाम पर अपने बेशुमार फायदे का हिस्सा भाजपाइयों को दे देते हैं. सही मायनों में ये जनता से वसूली का तरीका है क्योंकि कोई भी पूंजीपति अपनी जेब से नहीं देता है, वो तो जनता से ही वसूलकर भाजपाइयों के दल और उनका व्यक्तिगत खजाना भरता है."
पूर्व मुख्यमंत्री ने आगे कहा, इसीलिए अपने वर्तमान और भविष्य को बचाने के लिए उत्तर प्रदेश और देश की जनता, इस बार बहकावे में नहीं आने वाली और भाजपा को हराकर और हटाकर ही दम लेगी.