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कौन असली, कौन नकली- महाराष्ट्र की जनता ने दिया फैसला, अजित पवार की NCP एक पर सिकुड़ी, शरद की 'नकली' पार्टी को मिल रहे बंपर वोट

महाराष्ट्र में अजित पवार की एनसीपी को भारी झटका लगता दिख रहा है. सुबह से चल रहे वोट काउंटिंग के बीच अजित की एनसीपी केवल एक ही सीट पर बढ़त बनाए हुए है, वहीं शरद पवार की एनसीपी 7 सीटों पर आगे है. ये फर्क काफी मायने रखता है, खासकर तब जबकि शरद से लड़-झगड़कर अजित ने पार्टी छीनी थी.

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अजित पवार की पार्टी शरद से काफी पीछे चल रही है.
अजित पवार की पार्टी शरद से काफी पीछे चल रही है.

महाराष्ट्र में 48 सीटों के लिए वोटों की गिनती जारी है. आधे दिन के बाद भी रुझानों में INDIA ब्लॉक आगे चल रहा है, जो शरद पवार की एनसीपी को मिलाकर 28 सीटों पर लीड ले चुका है. इसमें सबसे चौंकाने वाली शिकस्त अजित पवार की एनसीपी को मिलती दिख रही है, जो केवल एक ही सीट पर आगे है. फिलहाल इन ट्विस्ट एंड टर्न्स का आखिरी नतीजा जो है, लेकिन ये साफ दिख रहा है कि महाराष्ट्र की जनता ने शरद की पार्टी को असल एनसीपी मान लिया है. 

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आधा दिन पार कर चुके रुझानों में INDIA ब्लॉक 28 सीटों पर आगे है, जबकि महायुति अलायंस के पास केवल 18 सीटें दिख रही हैं. इसमें बड़ा उलटफेर शरद की एनसीपी के चलते हुआ. वहीं अजित पर बीजेपी का दांव हल्का पड़ा दिख रहा है. पिछली लोकसभा में कांग्रेस और अविभाजित एनसीपी को कुल मिलाकर 5 वोट मिले थे. वहीं बीजेपी और शिवसेना ने मिलकर 48 में से 41 सीटें जीत ली थीं. 

महाराष्ट में नाटकीय बदलावों की वजह शरद बनाम अजित की एनसीपी है. चाचा-भतीजा के बीच टकराव की कहानी लगभग सालभर पहले शुरू हुई. जुलाई 2023 में चाचा शरद के खिलाफ जाते हुए अजित ने बगावत कर दी. विद्रोह की राह पर वे अकेले नहीं थे, बल्कि उनके साथ विधायक भी टूटे जो मिलकर एनडीए की शिंदे सरकार में शामिल हो गए. 

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ncp maharashtra sharad pawar vs ajit pawar lok sabha election result 2024 Photo India Today

समझाइश से होते हुए मामला काफी आगे निकल गया. अजित ने सीधे दावा किया कि एनसीपी उनकी पार्टी है, और चाचा को अपनी पार्टी का नाम बदलना होगा. ये एक तरह से बंधे-बंधाए वोट बैंक को अपनी तरफ लेने की पुरानी रणनीति थी, जो राजनीति में आम है. चाचा-भतीजे के बीच का विवाद होते-होते इलेक्शन कमीशन तक पहुंच गया. वहां छह महीने और दस सुनवाई के बाद ईसी ने अजित के पक्ष में फैसला देते हुए कहा कि असली एनसीपी उन्हीं की है. इसके मायने ये हैं कि शरद को न केवल अपनी पार्टी का नाम, बल्कि चुनाव चिन्ह भी बदलना पड़ा. 

लेकिन इससे क्या फर्क पड़ता है
अजित के लिए वही पार्टी, वही चुनाव चिन्ह- हींग लगे न फिटकरी, रंग भी चोखा जैसा हिसाब था. एनसीपी जिन वोटरों की पसंदीदा पार्टी थी, वे चिन्ह और नाम देखकर उसकी तरफ आ जाएंगे, ऐसा अनुमान लगाया जा रहा था. वहीं शरद पवार को सारी लड़ाई नए सिरे से लड़नी थी. यहां तक कि उन्हें वोटरों के दिल में ये यकीन फूंकना था कि उनकी पार्टी ही वो दल है, जिसपर वे विश्वास जताते आए थे. 

ncp maharashtra sharad pawar vs ajit pawar lok sabha election result 2024 photo PTI

शरद ने अपनी पार्टी को मिलता-जुलता नाम दिया- एनसीपी शरद पवार. पार्टी चिन्ह बना- तुरहा बजाता शख्स. ये भी बहुत सोच-समझकर चुना गया. असल में महाराष्ट्र में शादी-ब्याह या शुभ मौकों में तुरहा बजाया जाता है. चिन्ह को आम लोगों की खुशी से जोड़ा गया. इन सबको मिलाकर असली एनसीपी बना देने में शरद ने दिन-रात एक कर दिए. आक्रामक कैंपेन हुए. 

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इन सबके बीच एक चीज और हुई, जो शरद के पक्ष में गई. अजित पवार पर पहले ही खुद बीजेपी भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगा चुकी थी, वहीं चीनी मिलों में करप्शन से जुड़े मामले की जांच में ईडी का शिकंजा उन पर कसने लगा था. आयकर विभाग ने अजित के बेटे की कंपनी पर भी छापामारी की थी. आगे चलकर बीजेपी ने अजित को अपना लिया. इसी बात को लेते हुए चुनावी सभाओं के दौरान शरद की पार्टी हमलावर रही. उसने बीजेपी की तुलना वॉशिंग मशीन से करते हुए कहा कि उसका हिस्सा होकर अजित का करप्शन धुल गया. 

संभवतः यही कारण है कि बीजेपी की अगुवाई वाली महायुति ने अजित की तरफ से 4 ही उम्मीदवार उतारे. दूसरी तरफ शरद की पार्टी के 10 दावेदार चुनावी मैदान में आए. चुनौतियों के बाद भी ये चीजें एक-एक करके जुड़ती चली गईं, जिनका फायदा सीधे शरद की एनसीपी को मिला. पुराने वोटरों के साथ-साथ जो मतदाता शरद से सहानुभूति रखते हैं, उनका वोट भी उस एनसीपी को चला गया, जिसे ईसी ने असल पार्टी मानने से मना कर दिया था. 

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