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हैदराबाद में ओवैसी का दबदबा कायम, 5वीं बार दर्ज की जीत, बीजेपी की माधवी लता को 3 लाख वोटों से हराया

हैदराबाद AIMIM का गढ़ रहा है. यहां से ओवैसी 2004 से लगातार लोकसभा चुनाव जीतते आ रहे हैं. इससे पहले, ओवैसी के पिता सुल्तान सलाहुद्दीन ओवैसी ने 1984 से 1999 तक लगातार छह बार इस पद पर कब्जा किया.

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हैदराबाद से ओवैसी की जीत, माधवी लता हारीं
हैदराबाद से ओवैसी की जीत, माधवी लता हारीं

चार बार के सांसद और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने हैदराबाद लोकसभा सीट से पांचवीं बार बड़ी जीत दर्ज की है. उन्हें इस बार कुल 6,61,981 वोट मिले और उन्होंने बीजेपी की माधवी लता को 3,38087 वोटों से हरा दिया. दरअसल, हैदराबाद AIMIM का गढ़ रहा है. यहां से ओवैसी 2004 से लगातार लोकसभा चुनाव जीतते आ रहे हैं. इससे पहले, ओवैसी के पिता सुल्तान सलाहुद्दीन ओवैसी ने 1984 से 1999 तक लगातार छह बार इस पद पर कब्जा किया. 

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अपनी जीत के बाद प्रेस कांफ्रेंस करते हुए ओवैसी ने कहा, "मैं लोगों को धन्यवाद देना चाहता हूं क्योंकि उन्होंने मजलिस को पांचवीं बार सफलता दिलाई है। मैं हैदराबाद के लोगों, खासकर युवाओं, महिलाओं और पहली बार मतदान करने वालों को धन्यवाद देना चाहता हूं, जिन्होंने AIMIM पार्टी को ऐतिहासिक सफलता दिलाई है."

2019 के चुनावों में, ओवैसी कुल 58.95% वोट शेयर के साथ जीते थे. बीजेपी के टिकट पर लड़ने वाले उनके प्रतिद्वंद्वी भगवंत राव को 26.8% वोट मिले थे. हैदराबाद में चारमीनार, कारवान, गोशामहल, मलकपेट, चंद्रायनगुट्टा, याकूतपुरा और बहादुरपुरा सहित सात विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं.  13 मई को चौथे चरण में इस लोकसभा क्षेत्र में मतदान हुआ और 48.48% मतदान हुआ. 

पेशे से बैरिस्टर, ओवैसी ने लंदन के लिंकन इन में पढ़ाई की. उन्होंने 1994 में अपनी राजनीतिक शुरुआत की और अविभाजित आंध्र प्रदेश में चारमीनार विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक के रूप में जीते. हाल के वर्षों में, ओवैसी एक ऐसे व्यक्ति के रूप में उभरे हैं जिन्हें अक्सर मुस्लिम नेतृत्व से जोड़ा जाता है, भले ही वे इस तरह के लेबल से इनकार करते हों.  वे भाजपा और कांग्रेस को एक ही सिक्के के दो पहलू कहते हैं. 

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ओवैसी की एआईएमआईएम ने अपना दल (कमेरावादी), प्रगतिशील मानव समाज पार्टी (पीएमएसपी) और राष्ट्रीय उदय पार्टी (आरयूपी) के साथ मिलकर उत्तर प्रदेश में पीडीएम न्याय मोर्चा का गठन किया है. नए गठबंधन ने राज्य में आदिवासियों, दलितों और मुसलमानों जैसे हाशिए पर पड़े समुदायों का प्रतिनिधित्व करने का दावा किया है.

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