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बुलंदशहर दिलाएगा बुलंदी? 2014 में भी, 2024 में भी... यहीं से बीजेपी के चुनावी बिगुल फूंकने के पीछे का गणित

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुलंदशहर से 2024 चुनाव के लिए बीजेपी के अभियान का आगाज कर रहे हैं. 2014 के चुनाव में भी तब पीएम पद के उम्मीदवार रहे नरेंद्र मोदी ने यूपी में बुलंदशहर से ही चुनाव अभियान का आगाज किया था. अब 2024 में भी पीएम मोदी के यहीं से चुनावी बिगुल फूंकने के पीछे का गणित क्या है?

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटोः पीटीआई)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटोः पीटीआई)

राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब यूपी से ही चुनाव अभियान शुरू करने जा रहे हैं. पीएम मोदी बुलंदशहर में जनसभा को संबोधित कर 2024 चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के प्रचार अभियान का आगाज करेंगे. जनसभा को संबोधित करने से पहले पीएम मोदी कल्याण सिंह राजकीय मेडिकल कॉलेज, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के सेक्शन और अलीगढ़-कन्नौज हाईवे का लोकार्पण करने के साथ ही मेजर ध्यानचंद विश्वविद्यालय मेरठ का शिलान्यास भी करेंगे. पीएम पश्चिमी यूपी को करीब 20 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाओं की सौगात देंगे.

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पीएम मोदी बुलंदशहर से चुनाव अभियान का आगाज करने जा रहे हैं जो पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पड़ता है, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से करीब है. यूपी में लोकसभा की 80 सीटें हैं और बीजेपी ने इस बार यूपी की सभी 80 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है. ऐसे में पीएम मोदी का प्रचार अभियान का आगाज करने के लिए उत्तर प्रदेश का चयन समझ आता है लेकिन सवाल यह भी उठ रहे हैं कि बुलंदशहर ही क्यों? बुलंदशहर में ऐसा क्या है कि पीएम मोदी और बीजेपी को यहीं से बुलंदी की उम्मीद नजर आ रही है?

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मोदी ने 2014 में भी बुलंदशहर से फूंका था चुनावी बिगुल

बुलंदशहर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के करीब है और यहां से निकला संदेश पश्चिमी यूपी के साथ ही केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली और हरियाणा तक जाता है. पश्चिमी यूपी में लोकसभा की 14 सीटें हैं. दिल्ली में सात और हरियाणा में 10. यानी पीएम मोदी की इस रैली के जरिए बीजेपी की रणनीति 31 लोकसभा सीटें साधने की है और इसके लिए बुलंदशहर मुफीद है. दूसरी वजह ये भी है कि बीजेपी अपने लिए बुलंदशहर को लकी मानती है. बीजेपी ने 2014 के लोकसभा चुनाव के लिए गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया था.

पीएम मोदी ने 2014 में बुलंदशहर से ही किया था चुनाव अभियान का आगाज (फाइल फोटोः PTI)
पीएम मोदी ने 2014 में बुलंदशहर से ही किया था चुनाव अभियान का आगाज (फाइल फोटोः PTI)

जब चुनाव प्रचार के आगाज की बारी आई, नरेंद्र मोदी ने जम्मू कश्मीर में माता वैष्णो देवी के दर्शन के बाद बुलंदशहर में रैली कर अभियान का आगाज किया था. बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन ने न सिर्फ पूर्ण जनादेश के साथ सरकार बनाया, बल्कि बीजेपी ने अकेले दम पूर्ण बहुमत के लिए जरूरी जादुई आंकड़ा पार किया. 2019 के चुनाव में बीजेपी की सीटें भी बढ़ीं, सरकार भी बनीं लेकिन उसे यूपी में सीटों का नुकसान उठाना पड़ा.

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चुनाव प्रचार के आगाज के लिए बुलंदशहर ही क्यों

साल 2014 के लोकसभा चुनाव में यूपी की 80 में से 73 सीटों पर एनडीए को जीत मिली थी जिनमें 71 अकेले बीजेपी के पास थीं. 2019 में बीजेपी और एनडीए को यूपी में नौ सीट का नुकसान हुआ था. इसमें बड़ा हिस्सा पश्चिमी यूपी का था. बीजेपी ने 2014 में पश्चिमी यूपी की सभी 14 लोकसभा सीटें जीत ली थीं लेकिन 2019 में पार्टी सात सीटें ही जीत सकी थी. यानी यूपी में बीजेपी को नौ सीटों का नुकसान हुआ और इनमें से सात सीटें पश्चिमी यूपी की थीं.

BJP ने यूपी में सेट किया है सभी 80 सीटें जीतने का लक्ष्य (फाइल फोटोः PTI)
BJP ने यूपी में सेट किया है सभी 80 सीटें जीतने का लक्ष्य (फाइल फोटोः PTI)

पीएम नरेंद्र मोदी खुद वाराणसी लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं जो पूर्वांचल में आता है. सीएम योगी आदित्यनाथ की कर्मभूमि गोरखपुर भी पूर्वी उत्तर प्रदेश में ही है. पूर्वांचल का किला बीजेपी को इसलिए सेफ लग रहा है. अवध में अयोध्या के राम मंदिर से पार्टी को क्लीन स्वीप की उम्मीद है. बीजेपी को नुकसान की आशंका कहीं है तो वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश ही है.

समाजवादी पार्टी (सपा), राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) और कांग्रेस के गठबंधन की वजह से भी पश्चिमी यूपी की चुनौती कड़ी मानी जा रही है. बीजेपी मुश्किल सवाल पहले हल करने की रणनीति के साथ चल रही है और शायद यही वजह है कि पश्चिमी यूपी का मुश्किल सवाल पार्टी ने पहले लिया ही, इसके लिए अपने लिए लकी रहे बुलंदशहर को चुना.

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क्या है पश्चिमी यूपी का समीकरण

पश्चिमी यूपी के मथुरा, बागपत जैसे जिलों में जाट मतदाताओं की बहुलता है. मुरादाबाद, अमरोहा, सहारनपुर जैसे कई लोकसभा क्षेत्र ऐसे भी हैं जहां जाट के साथ मुस्लिम और यादव मतदाता भी आ जाएं तो परिणाम बदल सकते हैं. जाट मतदाता नए कृषि कानूनों को लेकर बीजेपी से खफा थे लेकिन बाद में सरकार ने ये कानून वापस ले लिए थे. यूपी चुनाव 2022 में बीजेपी का प्रदर्शन जाटलैंड में भी अच्छा रहा था. बीजेपी अब लोकसभा चुनाव में भी जाटलैंड को लेकर कोई कोताही नहीं बरतना चाहती और शायद यही वजह है कि पार्टी ने पहले जाट नेता भूपेंद्र सिंह चौधरी को यूपी बीजेपी का अध्यक्ष बनाया और अब अपने सबसे बड़े चेहरे पीएम मोदी को भी पश्चिमी यूपी के मैदान में उतार दिया है.

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