पंजाब में राजनीतिक परिदृश्य में एक बार फिर हलचल देखने को मिल रहा है. लोकसभा चुनावों के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के बीच गठबंधन को लेकर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है. बता दें कि निर्वाचन आयोग ने लोकसभा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर दी है. देश भर में मतदान की प्रक्रिया सात चरणों में संपन्न होगी. पहले चरण के लिए 19 अप्रैल, दूसरे चरण के लिए 26 अप्रैल, तीसरे चरण के लिए 7 मई, चौथे चरण के लिए 13 मई, पांचवें चरण के लिए 20 मई, छठें चरण के लिए 25 मई और सातवें चरण के लिए 1 जून को वोट डाले जाएंगे. नतीजे 4 जून को आएंगे.
पंजाब की 13 लोकसभा सीटों के लिए 7वें फेज में 1 जून को मतदान होगा. घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए, वरिष्ठ भाजपा नेता और पार्टी प्रवक्ता एसएस चन्नी ने आजतक को बताया कि पंजाब में शिअद के साथ गठबंधन को लेकर चर्चा चल रही है. इसमें कुछ समय लगेगा. शिरोमणि अकाली दल 22 मार्च को कोर कमेटी की बैठक करेगा. इसके बाद बीजेपी और शिअद के बीच एक औपचारिक बैठक होगी. चन्नी ने कहा, 'गठबंधन पर अंतिम फैसला भाजपा आलाकमान द्वारा लिया जाएगा'. शिरोमणि अकाली दल (SAD) की कोर कमेटी की बैठक चंडीगढ़ में होगी.
समान विचारधारा वाले दल के साथ गठबंधन संभव: शिअद नेता
अकाली दल के वरिष्ठ नेता और पार्टी महासचिव दलजीत सिंह चीमा ने भी पुष्टि की कि कोर कमेटी की बैठक के दौरान चुनावी गठबंधन सहित विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जाएगा. समान विचारधारा वाले राजनीतिक दल के साथ गठबंधन की संभावना की ओर इशारा करते हुए चीमा ने कहा, 'जब भी कोर कमेटी की बैठक होती है, तो सभी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाती है. लोकसभा चुनावों को लेकर रणनीति के साथ-साथ देश और पंजाब की स्थिति पर भी चर्चा होगी'.
शिअद के करीबी सूत्रों ने यह भी खुलासा किया कि शुरुआत में पार्टी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के लिए कानूनी ढांचे और सिख कैदियों की रिहाई जैसे अनसुलझे मुद्दों के कारण भाजपा के साथ फिर से गठबंधन करने में झिझक रही थी. इस बीच, संभावित शिअद-भाजपा गठबंधन पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पंजाब के विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसा कदम शिअद के हितों, विशेषकर किसानों के मुद्दों और धर्म पर उसके रुख के लिए हानिकारक हो सकता है.
गठबंधन से भाजपा मजबूत होगी, शिअद का पतन होगा: बाजवा
बाजवा ने चेतावनी दी, 'अगर गठबंधन होता है तो भाजपा पंजाब में अपनी पकड़ मजबूत करने में सक्षम होगी. हालांकि, यह शिरोमणि अकाली दल के लिए विनाश का कारण बन सकता है, जो किसानों और धार्मिक मुद्दों का समर्थन करने का दावा करता है, लेकिन इसे पूरा करने में विफल रहा है'. बता दें कि 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने 40 परसेंट वोट शेयर के साथ पंजाब की 13 लोकसभा सीटों में से 8 पर जीत हासिल की थी. भाजपा और शिअद ने 2-2 सीटें हासिल कीं, उसके बाद आम आदमी पार्टी (AAP) को एक सीट मिली थी.
तीन कृषि कानूनों के विरोध में SAD ने BJP से तोड़ा था अलायंस
शिरोमणि अकाली दल ने सितंबर 2020 में, केंद्र सरकार द्वारा लाए गए विवादास्पद कृषि कानूनों के विरोध में भाजपा से नाता तोड़ लिया था और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA)) से अलग हो गया था. शिअद प्रमुख सुखबीर सिंह बादल की पत्नी हरसिमरत कौर बादल ने किसानों के समर्थन में मोदी कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया था. किसानों के व्यापक विरोध के बाद, सरकार ने अंततः इन कानूनों को रद्द कर दिया था. शिअद ने भी कई मौकों पर एनडीए को समर्थन देना जारी रखा, जिसमें 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' और नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) से संबंधित मामले भी शामिल हैं.