लोकसभा चुनाव से पहले ही यूपी में समाजवादी पार्टी में अंदरखाने विरोध और बगावत देखने को मिल रही है. रामपुर और मुरादाबाद सीट पर दो-दो नामांकन पत्र दाखिल होने से पार्टी की टेंशन बढ़ गई है और डैमेज कंट्रोल की कोशिशें भी उतनी ही तेज हो गई हैं. बुधवार को इन दोनों सीटों पर आधिकारिक उम्मीदवार की स्थिति साफ नहीं होने से स्थानीय पार्टी नेता तक कन्फ्यूजन में बने रहे. बाद में पार्टी ने साफ किया कि रामपुर से मौलाना मुहिबुल्लाह नदवी और मुरादाबाद लोकसभा सीट से रुचि वीरा अधिकृत उम्मीदवार हैं.
एक दिन पहले मंगलवार को मुरादाबाद से सपा ने मौजूदा सांसद एसटी हसन को सिंबल दिया और उन्होंने नामांकन भी कर दिया था. इधर, रामपुर में आजम खान के करीबी आसिम रजा ने भी नामांकन पत्र दाखिल कर दिया है. आजम खान और उनके समर्थक लगातार मांग उठाते आ रहे थे कि रामपुर से खुद अखिलेश यादव चुनाव लड़ें. लेकिन जब पार्टी ने नदवी को उम्मीदवार फाइनल किया तो आजम खान के करीबी आसिम रजा ने बगावत कर दी और अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया.
'आजम खान की करीबी हैं रुचि वीरा'
हालांकि, सपा डैमेज कंट्रोल में जुट गई है. मुरादाबाद में एसटी हसन ने साफ कर दिया कि वो अपनी उम्मीदवारी वापस लेंगे. पत्रकारों से बातचीत में वीरा ने दावा किया कि उन्होंने सपा प्रत्याशी के तौर पर अपना नामांकन पत्र दाखिल किया है. वीरा ने कहा, पार्टी नेतृत्व ने उन्हें टिकट दिया है और इसलिए वो नामांकन दाखिल करने आई हैं. यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें पार्टी का चुनाव चिह्न मिल गया है, वीरा ने कहा, हमें चिह्न मिलेगा. हसन को लेकर वीरा ने कहा, यह बात पार्टी नेतृत्व से पूछिए. वे मेरे प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि मेरे बड़े भाई हैं. वीरा को वरिष्ठ सपा नेता आजम खान का भी करीबी माना जाता है.
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'रामपुर में बढ़ सकती हैं सपा की मुश्किलें?'
वहीं, अब रामपुर से आसिम रजा के नामांकन वापसी की कवायद भी तेज हो गई है. इसके लिए खुद पार्टी महासचिव शिवपाल सिंह यादव ने मोर्चा संभाला है. वे आजम खान से मिलने और उन्हें मनाने के लिए सीतापुर जेल जाएंगे. कहा जा रहा है कि अगर आजम खान नहीं मानते हैं तो रामपुर की लड़ाई पार्टी की मुश्किलें बढ़ाने वाली होगी.
'सपा ने दिल्ली के इमाम को बनाया रामपुर से कैंडिडेट'
असीम राजा ने रामपुर से 2022 का लोकसभा उपचुनाव भी सपा उम्मीदवार के रूप में लड़ा था. हालांकि, वे हार गए थे. इस बार उन्होंने खुद को पार्टी उम्मीदवार बताते हुए नामांकन पत्र दाखिल किया है. बाद में नदवी भी कलेक्ट्रेट पहुंचे और सपा उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन पत्र दाखिल किया. मोहिबुल्ला नदवी दिल्ली में पार्लियामेंट स्ट्रीट स्थित जामा मस्जिद के इमाम हैं.
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'इमाम ने आजम को बताया अपना हमदर्द'
नदवी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, वे पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार हैं और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव जी ने मुझे भेजा है. आजम खान भी मेरे हमदर्द हैं. मैं उनके लिए दुआ करता हूं. मैंने समाजवादी पार्टी से अपना नामांकन दाखिल कर दिया है और मुझे साइकिल चुनाव चिन्ह भी मिल गया है. फिलहाल, दोनों उम्मीदवारों ने खुद को असली पार्टी प्रत्याशी होने का दावा किया है.
'आजम के करीबी आसिम रजा ने भी किया नामांकन'
वहीं, आजम खान के करीबी विश्वासपात्र आसिम राजा ने कहा, हमने समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन दाखिल कर दिया है. चुनाव कौन लड़ेगा, इसका फैसला 30 मार्च (नाम वापसी की तारीख) को हो जाएगा. नदवी के नामांकन पर आसिम राजा ने कहा, मैं कह रहा हूं कि 20 लोगों को नामांकन दाखिल करना चाहिए. उससे क्या होगा? 30 तारीख को सब कुछ फाइनल हो जाएगा.
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'आजम का गढ़ माना जाता है रामपुर'
रामपुर पिछले चार दशकों से आजम खान (75 साल) का गढ़ रहा है. वे यहां से 10 बार विधायक चुने गए और एक बार यहां से लोकसभा का चुनाव भी जीता. पिछले हफ्ते सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आजम खान से सीतापुर जेल में मुलाकात की थी. दोनों नेताओं के बीच लंबी बातचीत हुई. उसके बाद में उम्मीदवारों का ऐलान किया गया और मुरादाबाद से लेकर रामपुर तक नाराजगी देखने को मिली. एक दिन पहले रामपुर में सपा के नगर अध्यक्ष आसिम रजा ने एक बयान में कहा था कि वे चाहते हैं कि अखिलेश यादव इस सीट से चुनाव लड़ें. फिलहाल, मुरादाबाद से रामपुर सीट तक मची तनातनी के बीच शिवपाल सिंह यादव अब आजम खान को सीतापुर जेल में मनाने जाएंगे.
'उपचुनाव में बीजेपी ने जीती थी रामपुर सीट'
2019 में मुरादाबाद और रामपुर सीट पर सपा ने जीत हासिल की थी. मुरादाबाद में एसटी हसन और रामपुर में आजम खान चुनाव जीते थे. हालांकि, बाद में 2022 के विधानसभा चुनाव हुए और आजम खान इसी सीट से उतरे और चुनाव जीत लिया. जिसके बाद उन्होंने संसद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था और रामपुर में लोकसभा के उपचुनाव हुए थे. उस समय आजम दो साल से ज्यादा वक्त तक जेल में रहकर बाहर आए थे. आजम खान ने अपने समर्थक आसिम रजा को इस सीट से उतारा था. खुद आसिम के नाम की घोषणा की थी और प्रचार अभियान की कमान भी संभाली थी. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव वहां एक बार भी प्रचार के लिए नहीं पहुंचे थे, जबकि बीजेपी ने पूरी ताकत लगा दी थी. बीजेपी के घनश्याम सिंह लोधी ने जीत हासिल की और आसिम रजा को हार का सामना करना पड़ा था. बाद में कोर्ट ने एक मामले में आजम खान को दो साल से ज्यादा की सजा सुनाई तो उनकी विधानसभा की सदस्यता चली गई थी. विधानसभा उपचुनाव में भी आजम की पैरवी पर आसिम रजा को उतारा गया और बीजेपी के आकाश सक्सेना के हाथों हार का सामना करना पड़ा था.
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'शंकाएं थीं, अब दूर कर लीं'
सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने बताया कि मुरादाबाद से मौजूदा सांसद हसन का टिकट रद्द कर दिया गया है. उनके स्थान पर बिजनौर के पूर्व विधायक वीरा को पार्टी प्रत्याशी बनाया गया है. इसके अलावा नदवी रामपुर से पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार हैं. उन्होंने स्वीकार किया कि पहले दोनों सीटों पर उम्मीदवारों को लेकर कुछ शंकाएं थीं लेकिन बाद में उन्हें दूर कर लिया गया. सपा प्रवक्ता फरहरुल हसन चांद ने कहा कि सपा एक लोकतांत्रिक पार्टी है और इसमें कोई भ्रम की स्थिति नहीं है. उन्होंने कहा, पार्टी नेतृत्व जिसे चाहेगा, वो चुनाव लड़ेगा.
'रामपुर में 19 अप्रैल को वोटिंग'
रामपुर और मुरादाबाद लोकसभा सीटों के चुनाव के लिए नामांकन का आज आखिरी दिन था. नामांकन पत्रों की जांच गुरुवार को की जाएगी. जबकि नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख 30 मार्च है. इन सीटों पर पहले चरण में 19 अप्रैल को वोटिंग होगी. 4 जून को नतीजे आएंगे.