उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के प्रयागराज में संगम घाट पर श्रद्धालुओं की भीड़, पूजा पाठ, स्नान और गंगा की धारा में चल रही नाव में सवार देश भर से आए श्रृद्धालु और एक मल्लाह, जो अपने चप्पू से पानी को चीरता हुआ मुख्य धारा तक लोगों को ले जा रहा है. इस सफर में भगवान का भजन तो हो ही रहा है लेकिन चुनाव के माहौल में चर्चा भी खूब जोरों से होती है. इसी माहौल से यह तय होता है कि देश की राजनीति में अगला सिरमौर कौन होगा.
संगम नगरी प्रयागराज केवल धर्म और आस्था का ही केंद्र नहीं है बल्कि देश और दुनिया से आने वाले सैलानी और श्रृद्धालु अपनी सोच के साथ यहां पर आते हैं और इन्हीं सोच के साथ चुनाव की राय भी बनती है. माना जाता है कि पिछले तीन दशकों से यहां के नाविकों ने चुनाव की नब्ज को पकड़ा है और यहां की राय ही देश की राय के तौर पर देखी जाती है.
प्रदीप निषाद (39) पिछले 13 सालों से नाव चला रहे हैं. 2014 से लेकर 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के पहले के माहौल को भांप लेते हैं. प्रदीप ने कहा कि इस बार मोदी का ही असर देखा जा रहा है, जो लोग दूर इलाकों से आते हैं, वह देश में आए बदलाव की बात कर रहे हैं और मानते हैं कि फिलहाल कोई बड़ी चुनौती सामने नजर नहीं आ रही है. कहते हैं कि उनके पिता भी नाव चलाते थे और चुनाव के माहौल को समझ लेते थे.
'मंहगाई, बेरोजगारी से लोग परेशान लेकिन माहौल BJP का...'
ऐसा ही मानना गणेश निषाद का भी है, जो कहते हैं कि इस चुनाव में महंगाई और बेरोजगारी भी बड़ा मुद्दा है. ज्यादातर लोग उसी से परेशान नजर आते हैं और अपनी राय रखते हैं लेकिन फिलहाल माहौल अभी तक बीजेपी के ही पक्ष में नजर आ रहा है क्योंकि ऐसा लगता है कि सरकार की योजना जनता को लाभ दे रही है. उनकी नाव में गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, आंध्र, कर्नाटक, बिहार और बंगाल तक से पर्यटक आते रहे हैं और सब अपने चुनावी मुद्दों पर चर्चा करते हैं, जिससे पता चलता है कि माहौल कैसा बन रहा है.
दूसरी तरफ संगम, जहां चुनावी राय तो बनती है तो वहीं नाविकों के अपने भी स्थानीय मुद्दे हैं. सरकार जल्द वहां पर टोकन सिस्टम लागू करने जा रही है, जिससे यह नाविक खुश नहीं दिखाई देते. नाविक गणेश निषाद कहते हैं कि इससे नविकों के रोजगार पर असर पड़ेगा और वह चाह कर भी ज्यादा कमाई नहीं कर पाएंगे. एक नाविक कहते हैं कि उन्हें राशन के अलावा अभी तक कोई और लाभ नहीं मिला है, आयुष्मान कार्ड बनवाने की कोशिश की लेकिन कागज पूरे नहीं कर पाए. इसके साथ ही बाकी मामलों में सुरक्षा, शासन और गुंडागर्दी खत्म हुई है, जिसको लेकर लोगों में सकारात्मकता है.
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'चुनाव नतीजों पर दिखेगा मंहगाई का असर...'
नाविक संघ के महामंत्री मगन निषाद कहते हैं कि संगम के नाविक पिछले कई दशकों से चुनाव का माहौल बताते रहे हैं लेकिन इस बार महंगाई का असर देखने को मिल रहा है और इसका असर चुनाव के नतीजे पर भी पड़ेगा. हालांकि यह कहना कि सरकार के पक्ष में माहौल नहीं है, ठीक नहीं होगा क्योंकि लोगों की राय और माहौल अभी भी एक तरफ ही नजर आ रहा है. वहीं इस बार विपक्षी गठबंधन भी कुछ बड़े मुद्दों पर चुनाव में नजर आ रहा है, जिसका असर भी नतीजों में दिखाई देगा.
चुनाव को लेकर संगम आए श्रृद्धालुओं की क्या राय?
जहां नविको की अपनी राय है तो वहीं दूसरी तरफ देशभर से आए श्रृद्धालु भी गंगा की लहरों पर नाव में सवारी करते हुए चुनाव की चर्चा करते नजर आते हैं. गुजरात के सूरत से आए छगनलाल कहते हैं कि पूरा माहौल बीजेपी के पक्ष में है और उनके क्षेत्र में तो सांसद की निष्पक्ष जीत हुई है. नरेंद्र मोदी के काम को लेकर जनता में संतुष्टि है और अभी भी इसका असर चुनाव में देखने को मिलेगा.
ललिता बेन कहती हैं कि मोदी सरकार ने महिलाओं को लाभ देने वाली कई योजनाएं शुरू की हैं, इसका सीधा लाभ उनके खातों में मिल रहा है. उज्ज्वला, पीएम आवास और शौचालय जैसी योजनाएं कई गरीबों को मिलीं, इसीलिए बहुत ज्यादा नाराजगी फिलहाल नहीं दिखाई देती है.
श्री गंगानगर से आए सुरेंद्र शर्मा कहते हैं कि पूरे तौर पर अभी चुनाव में समय है लेकिन अभी तक की लहर से लगता है कि बदलाव की स्थिति ज्यादा नहीं होगी. यह जरूर है कि महंगाई जनता को परेशान कर रही है लेकिन उन्हें उम्मीद है कि नई सरकार इस मुद्दे पर काम जरूर करेगी. उनकी पत्नी सुनीता का कहना है कि महिला सुरक्षा और स्वास्थ्य की सेवा सबसे ज्यादा बेहतर हुई है और इसी पर उनका वोट होगा.
'मंहगाई और रोजगार सबसे बड़ा मुद्दा...'
संगम पर श्रृद्धालुओं का पूजन कर रहे पंडित में शंभू नाथ कहते हैं कि राम मंदिर को लेकर भले ही माहौल बन रहा है लेकिन महंगाई और बेरोजगारी सबसे बड़े मुद्दे हैं और इसी के आधार पर इस बार के चुनाव में बदलाव की भी उम्मीद की जा रही है. हालांकि प्रयागराज की स्थिति तो बेहतर हुई है लेकिन अभी भी बहुत से धार्मिक स्थलों की स्थिति में बदलाव नहीं आया है और स्थानीय लोगों को रोजगार भी नहीं मिल सका है.