बिहार में मैराथन मंथन के बाद सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में सीट शेयरिंग की गुत्थी सुलझ गई है. एनडीए में सीट शेयरिंग फॉर्मूला सामने आने के बाद अब गठबंधन के घटक दलों की नाराजगी भी सामने आने लगी है. खाली हाथ रह गए पशुपति पारस की नाराजगी के चर्चे हैं तो वहीं अब राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा भी नाराज बताए जा रहे हैं.
सूत्रों के मुताबिक उपेंद्र कुशवाहा केवल एक लोकसभा सीट मिलने की वजह से नाराज हैं. वह अपनी पार्टी के लिए कम से कम दो सीटें चाहते थे. जानकारी के मुताबिक उपेंद्र कुशवाहा अपनी पार्टी के लिए काराकाट के साथ ही सुपौल या सीतामढ़ी में से कोई एक सीट चाहते थे लेकिन सीट शेयरिंग फॉर्मूला जब सामने आया, ऐसा हुआ नहीं. उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी को एनडीए में केवल एक सीट मिली- काराकाट.
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उपेंद्र कुशवाहा इस वजह से नाराज हैं और अपनी नाराजगी बीजेपी नेतृत्व के सामने सीट शेयरिंग के ऐलान से पहले ही जाहिर भी कर दी थी. उपेंद्र कुशवाहा की नाराजगी बिहार में सीट शेयरिंग को लेकर एनडीए की प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी नजर आई. सीट शेयरिंग के ऐलान को लेकर बीजेपी दफ्तर में एनडीए की जो प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई, उसमें उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी का कोई भी प्रतिनिधि मौजूद नहीं था.
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प्रेस कॉन्फ्रेंस में बिहार बीजेपी के प्रभारी विनोद तावड़े, बिहार बीजेपी के अध्यक्ष और नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार में डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और संजय मयूख थे. चिराग पासवान की पार्टी से राजू तिवारी, जीतनराम मांझी की पार्टी से रजनीश कुमार भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में थे लेकिन पशुपति पारस की पार्टी के साथ ही कुशवाहा की पार्टी का कोई सदस्य इसमें मौजूद नहीं था.
बिहार में सीट शेयरिंग फॉर्मूला क्या?
बिहार में लोकसभा की 40 सीटें हैं और इसके लिए सीट बंटवारे के फॉर्मूले का ऐलान भी हो चुका है. एनडीए में सीट शेयरिंग फॉर्मूले के मुताबिक बीजेपी सबसे अधिक 17 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) 16, चिराग पासवान के नेतृत्व वाली लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) पांच सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी. जीतनराम मांझी के नेतृत्व वाली हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी आरएलएम को एक-एक सीटें दी गई हैं.