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अन्नामलाई को कोयंबटूर से क्यों मैदान में उतार रही है बीजेपी? इस शहर से पार्टी का है पुराना नाता

भाजपा तमिलनाडु में अब तक ज्यादा चुनावी लाभ हासिल नहीं कर पाई है. यहां की राजनीति द्रविड़ और तमिल राष्ट्रवाद से अधिक संबंधित है. अन्नामलाई के लिए भाजपा द्वारा कोयंबटूर लोकसभा सीट का चुनाव करना दिलचस्प और महत्वपूर्ण है.

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 बीजेपी ने कोयंबटूर लोकसभा सीट से के अन्नामलाई को मैदान में उतारा है. (Photo: X/@BJP4India)
बीजेपी ने कोयंबटूर लोकसभा सीट से के अन्नामलाई को मैदान में उतारा है. (Photo: X/@BJP4India)

भाजपा ने अपने तमिलनाडु यूनिट के अध्यक्ष के अन्नामलाई को आगामी लोकसभा चुनाव में कोयंबटूर लोकसभा सीट से मैदान में उतारने का फैसला किया है. यह सीट बीजेपी के लिए खास है. कर्नाटक कैडर के आईपीएस अधिकारी रहे अन्नामलाई ने 2019 में भारतीय पुलिस सेवा से इस्तीफा दे दिया था और 2020 में भाजपा में शामिल हो गए. उन्हें एक साल बाद तमिलनाडु भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया. तब उनकी उम्र सिर्फ 37 वर्ष की थी. वह किसी राज्य के सबसे कम उम्र के भाजपा अध्यक्ष थे.

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भाजपा को उम्मीद है कि आत्मविश्वासी और ओजस्वी वक्ता के अन्नामलाई युवाओं को आकर्षित करेंगे और तमिलनाडु में पार्टी की किस्मत को नई ऊंचाई पर ले जाएंगे, जो लोकसभा में 39 सांसद भेजता है. भाजपा तमिलनाडु में अब तक ज्यादा चुनावी लाभ हासिल नहीं कर पाई है. यहां की राजनीति द्रविड़ और तमिल राष्ट्रवाद से अधिक संबंधित है. अन्नामलाई के लिए भाजपा द्वारा कोयंबटूर लोकसभा सीट का चुनाव करना दिलचस्प और महत्वपूर्ण है.

बीजेपी का कोयंबटूर कनेक्शन

कोयंबटूर परंपरागत वामपंथी गढ़ रहा है, जिसका भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ एक विशेष, लेकिन जटिल रिश्ता है. बुधवार को, DMK - जिसने आखिरी बार 1996 में कोयंबटूर सीट जीती थी- ने पूर्व अन्नाद्रमुक नेता और कोयंबटूर के मेयर गणपति राजकुमार को इस सीट के लिए अपना उम्मीदवार घोषित किया. कोयंबटूर भाजपा के किसी सदस्य को लोकसभा में भेजने वाले तमिलनाडु के शुरुआती निर्वाचन क्षेत्रों में से एक था. यहां वर्ष 1998 में भाजपा के दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी की हत्या का प्रयास भी हुआ था.

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कोयंबटूर से दो बार जीती है बीजेपी

भारत के तत्कालीन उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी को कथित तौर पर 1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद के विध्वंस में उनकी भूमिका के प्रतिशोध में अल उम्माह के इस्लामी आतंकवादियों ने निशाना बनाया था. 14 फरवरी, 1998 को कोयंबटूर में 11 स्थानों पर सिलसिलेवार बम विस्फोटों में 58 से अधिक लोगों की जान चली गई थी और सैकड़ों घायल हो हुए थे. ये बम भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी को निशाना बनाने के लिए प्लांट किए गए थे, जो शहर में अपने चुनाव प्रचार पर थे. सीरियल बम ब्लास्ट के बाद 1998 और 1999 के चुनावों में बीजेपी ने कायंबटूर सीट से जीत दर्ज की थी.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने हालिया कोयंबटूर दौरे के दौरान 26 साल पहले बम धमाकों में मारे गए 58 लोगों को श्रद्धांजलि दी थी. भाजपा ने तमिलनाडु में हिंदू मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए कोयंबटूर विस्फोटों का हवाला दिया है, एक ऐसा राज्य जहां राजनीति में धर्म की कोई खास अपील नहीं है. एक अन्य कारक जो कोयंबटूर में भाजपा के पक्ष में है, वह उत्तर भारतीय प्रवासी श्रमिकों की बड़ी संख्या है. दरअसल, कोयंबटूर में कपड़ा उद्योग है और उत्तर भारतीय यहां काम करते हैं. 

अन्नामलाई ने बीजेपी नेतृत्व का जताया आभार

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लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए, अन्नामलाई ने 'एन मन, एन मक्कल' पदयात्रा पर निकाला था, जिसने तमिलनाडु के सभी 234 विधानसभा क्षेत्रों को कवर किया. पदयात्रा को गृह मंत्री अमित शाह ने हरी झंडी दिखाई थी और फरवरी में इसके समापन समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाग लिया था. अपनी उम्मीदवारी का ऐलान होने के बाद के. अन्नामलाई ने एक्स पर एक पोस्ट में पीएम मोदी को उन पर विश्वास जताने के लिए धन्यवाद दिया. उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के लोग राजनीतिक बदलाव का इंतजार कर रहे हैं, जो राज्य को विकास की ओर ले जाएगा.

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