चुनावी नतीजे से पहले एक बार फिर पक्ष और विपक्ष में तकरार छिड़ गई है. अब तक ईवीएम पर संदेह जताते आ रहे विपक्षी दलों के नेताओं ने अब पोस्टल बैलेट (डाक मतपत्र) को मुद्दा बनाया है और रविवार को चुनाव आयोग के दफ्तर में दस्तक दी है. इंडिया ब्लॉक के प्रतिनिधिमंडल ने ECI के सामने पांच मांगें रखी हैं. विपक्ष का कहना था कि वोटों की गिनती के दौरान सभी दिशा-निर्देशों का पालन किया जाए. EVM के नतीजे घोषित होने से पहले पोस्टल बैलट के नतीजे घोषित किए जाएं. विपक्ष के बाद बीजेपी नेताओं का प्रतिनिधिमंडल भी चुनाव आयोग पहुंचा और काउंटिंग के दौरान सभी प्रोटोकॉल का पूरी तरह से पालन करने पर जोर दिया.
विपक्ष की मांग पर चुनाव आयोग ने पोस्टल बैलेट की गिनती पहले करने की मांग को स्वीकार कर लिया है. आयोग ने कहा कि पोस्टल बैलेट की गिनती पहले शुरू होगी. आधे घंटे बाद ईवीएम की गिनती शुरू होगी. अरुणाचल और सिक्किम में भी ऐसा हुआ.
विपक्ष का कहना है कि मतगणना के वक्त सबसे पहले पोस्टल बैलट गिनने का नियम है, जिसे चुनाव आयोग इस एक गाइडलाइन के जरिए बदल दिया है. आयोग में अपनी आपत्ति दर्ज कराने का बाद अभिषेक मनु सिघवी ने कहा कि सिर्फ एक गाइडलााइन के जिए पुराने नियम को नहीं बदला जा सकता है. इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने मांग की कि पहले पोस्टल बैलट गिना जाय फिर ईवीएम के वोटों की गिनती हो.
विपक्ष ने क्या 5 मांगें रखी हैं...
पहले पोस्टल बैलेट को गिना जाना चाहिए...
कांग्रेस प्रवक्ता और वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, यह तीसरा मौका है, जब विपक्षी दलों का प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग से मिला है. हमने चुनाव आयोग के साथ कुछ प्रमुख मुद्दों पर बात की. सबसे जरूरी था- पोस्टल बैलट की गिनती और पहले उसका रिजल्ट घोषित करना. यह वैधानिक नियम है, जिसमें पोस्टल बैलट को पहले गिनना चाहिए. हमारी शिकायत है कि इस दिशा-निर्देश को दरकिनार कर दिया गया है. उन्होंने इस प्रथा को निरस्त कर दिया है. इंडिया ब्लॉक ने चुनाव आयोग से मई 2019 के पत्र को वापस लेने और चुनाव संचालन नियम 1961 के नियम 54A के अनुरूप निर्देश जारी करने के लिए कहा है. इसके तहत रिटर्निंग अधिकारी पहले पोस्टल बैलेट्स की गिनती करते हैं.
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ईवीएम में डेट एंड टाइम वेरिफाई किया जाए
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा, हमने चुनाव आयोग से आग्रह किया है कि दिशा-निर्देशों का पालन किया जाए. EVM की कंट्रोल यूनिट को सीसीटीवी के निगरानी वाले गैलरी से ले जाया जाए और कंट्रोल यूनिट के मौजूदा डेट एंड टाइम को वेरिफाई किया जाए. यह वेरिफिकेशन जरूरी है, क्योंकि जब तक यह नहीं किया जाता, तब तक इस बात की कोई प्रामाणिकता नहीं है कि यह वही कंट्रोल यूनिट है जो मतदान केंद्र से आई थी और इसे बदला नहीं गया है.
येचुरी ने रखीं ये चार मांगें
कांग्रेस कोषाध्यक्ष अजय माकन ने एक्स पर पोस्ट किया और कहा, एआरओ टेबल पर उम्मीदवार के एजेंटों को पहली बार अनुमति नहीं दी जा रही है. मैं पहले भी 9 लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ चुका हूं और ऐसा पहली बार हो रहा है. अगर यह सच है तो यह कथित ईवीएम धांधली से भी बड़ा मामला है. मैं इस मुद्दे को सभी उम्मीदवारों के लिए चिह्नित कर रहा हूं. मुझे उम्मीद है कि चुनाव आयोग इसे जल्द ही सुधारेगा. इसके बाद दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्टीकरण जारी किया और कहा, उम्मीदवारों के मतगणना एजेंटों को आरओ/एआरओ की टेबल पर जाने की अनुमति है.
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YSRCP ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया
विपक्षी दलों ने अपने एजेंटों से मंगलवार को काउंटिंग प्रोसेस पर बारीकी से नजर रखने को कहा है. वहीं, डाक मतपत्रों की वैधता के मुद्दे पर वाईएसआर कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. वाईएसआर कांग्रेस ने इस मुद्दे पर आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश को SC में चुनौती देने के लिए एसएलपी दाखिल की है और मतगणना से पहले चुनाव आयोग को स्पष्ट निर्देश देने की गुहार लगाई गई है. राज्य में एक साथ हुए लोकसभा और विधानसभा चुनावों के दौरान लगभग पांच लाख पोस्टल बैलेट से वोट डाले गए हैं.
इंडिया गठबंधन के नेताओं की मुलाकात के बाद बीजेपी का एक प्रतिनिधिमंडल भी चुनाव आयोग से मिलने पहुंचा. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल इस दल में शामिल थे. बीजेपी ने चुनाव आयोग से चार अहम मांगें की हैं.
मतगणना में राज्य सरकारों का दखल ना रहे
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, आज केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के नेतृत्व में बीजेपी के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों से मुलाकात की और उनसे 4 महत्वपूर्ण कदम उठाने की मांग और आग्रह किया. पहला यह कि हमने चुनाव आयोग से अनुरोध किया है कि मतगणना प्रक्रिया में लगे हर अधिकारी को निर्धारित प्रक्रिया के सूक्ष्मतम विवरण से पूरी तरह परिचित होना चाहिए और सभी चुनाव आयोग प्रोटोकॉल का पूरी लगन से पालन करना चाहिए. दूसरा, मतगणना और परिणामों की घोषणा के दौरान चुनावी प्रक्रिया की सुरक्षा सुनिश्चित करना. तीसरा, चुनावी प्रक्रिया को कमजोर करने के व्यवस्थित प्रयासों का संज्ञान लेना और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करना शामिल हैं. उन्होंने कहा, चुनाव आयोग से हमने मांग की है कि वोटों की गिनती सही हो. इसमें किसी तरह की हिंसा ना हो और राज्य सरकारों का दखल भी ना रहे. चुनाव प्रक्रिया पर गलतफहमी फैलाने के लिए कुछ सिविल सोसायटी टूल किट चला रहे हैं, उन पर बराबर नजर रखी जाए.
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फिलहाल, वोटों की गिनती शुरू होने में 18 घंटे से भी कम का वक्त रह गया है. आज कल दोपहर तक तस्वीर साफ हो जाएगी, लेकिन इससे पर जो घमासान मचा है उससे साफ है कि इसकी अगली कड़ी मंगलवार को भी दिख सकती है.
पोस्टल बैलेट क्या होता है?
पोस्टल बैलेट से सरकारी कर्मचारी, दिव्यांग और बुजुर्ग मतदान करते हैं. चुनावों में इसका इस्तेमाल उन लोगों द्वारा किया जाता है जो नौकरी के कारण अपने चुनाव क्षेत्र में मतदान नहीं कर पाते हैं. जब ये लोग पोस्टल बैलेट की मदद से वोट डालते हैं तो इन्हें सर्विस वोटर्स कहते हैं. इनकी गिनती के लिए अलग टेबल लगाई जाती हैं और राजपत्रित अधिकारियों की ड्यूटी लगाई जाती है. शुरुआती एक घंटे में पोस्टल बैलेट की गिनती की जाती है. मतगणना स्थल पर सुबह कर्मचारी सबसे पहले पोस्टल बैलेट पेपर्स की गड्डियां बनाते हैं और उसके बाद सोच समझकर और पारदर्शिता के साथ वैध और अवैध पर निर्णय लेते हैं. उम्मीदवार के एजेंट्स को दिखाने के बाद वैध-अवैध वोट घोषित किए जाते हैं. पोस्टल बैलेट की गिनती के बाद ईवीएम के वोटों की गिनती की जाती है. सुबह 9 बजे से ईवीएम के वोट काउंट होना शुरू हो जाते हैं और पहला रुझान आने लगता है. .
विवाद क्यों हो रहा है?
दरअसल, 2019 तक सबसे पहले पोस्टल बैलेट की गिनती होती थी. उसके बाद ईवीएम वोटों की गिनती शुरू की जाती थी. डाक मतपत्रों की संख्या में वृद्धि के साथ चुनाव पैनल ने 2019 के चुनावों के बाद अपने दिशानिर्देशों में बदलाव किया है और अब पोस्टल बैलेट की गिनती के साथ ईवीएम की गिनती भी शुरू की जा सकती है.
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18 मई, 2019 को सभी मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को दिए गए निर्देशों में चुनाव आयोग ने अपने पहले के दिशानिर्देश को वापस ले लिया और यह कहा कि ईवीएम की गिनती डाक मतपत्रों की गिनती के दौरान भी जारी रह सकती है. एक बार ईवीएम की गिनती पूरी हो जाने के बाद वीवीपैट पर्चियों की गिनती की जा सकती है. नए निर्देशों ने डाक मतपत्रों की अनिवार्य रूप से दोबारा गिनती के नियम को भी संशोधित किया है. इससे पहले यदि जीत का अंतर डाक मतपत्रों की कुल संख्या से कम होता था तो डाक मतपत्रों की दोबारा गिनती की जाती थी. अब गिनती के दौरान अमान्य करार दिए गए डाक मतपत्रों का फिर से सत्यापन किया जाएगा, यदि ऐसे मतपत्रों की संख्या से अंतर कम हो.
2019 में डाले गए कुल वैध वोटों (60.76 करोड़) में पोस्टल बैलेट के 0.37% (22.71 लाख) मत थे. इस बार डाक मतपत्रों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है. चुनाव आयोग ने इस सुविधा को सर्विस वोटर्स से लेकर ज्यादा आयु वाले मतदाताओं तक बढ़ा दिया है.