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'छोटे सरकार' के भरोसे लोकसभा पहुंचेंगे ललन सिंह? वोटिंग से पहले पैरोल पर बाहर आ सकते हैं अनंत सिंह

चर्चा है कि अनंत सिंह को बेहतर इलाज के लिए पैरोल दी जा रही है. हालांकि आधिकारिक पुष्टि किसी ने नहीं की है, लेकिन लोकसभा चुनाव के बीच अनंत सिंह का पैरोल पर बाहर आना राजनीतिक चर्चाओं को हवा दे रहा है. अनंत सिंह के जेल से बाहर आने की खबरों के साथ मुंगेर लोकसभा की मोकामा विधानसभा एक बार फिर से सुर्खियों में आ गई है.

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अनंत सिंह और ललन सिंह
अनंत सिंह और ललन सिंह

बिहार के बाहुबली नेता अनंत सिंह उर्फ छोटे सरकार इन दिनों फिर से सुर्खियों में हैं. कारण, चर्चा यह है कि जेल में बंद पूर्व विधायक अनंत सिंह पैरोल पर बाहर आ रहे हैं. जानकारी के मुताबिक अनंत सिंह को दो दिन पहले ही पैरोल पर बाहर आ जाना था, लेकिन जरूरी दस्तावेज तैयार नहीं होने के कारण इसमें देरी हो रही है. जानकार बताते हैं कि अगले दो से तीन दिनों में अनंत सिंह पैरोल पर बाहर आ जाएंगे. 

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चर्चा है कि अनंत सिंह को बेहतर इलाज के लिए पैरोल दी जा रही है. हालांकि आधिकारिक पुष्टि किसी ने नहीं की है, लेकिन लोकसभा चुनाव के बीच अनंत सिंह का पैरोल पर बाहर आना राजनीतिक चर्चाओं को हवा दे रहा है. अनंत सिंह के जेल से बाहर आने की खबरों के साथ मुंगेर लोकसभा की मोकामा विधानसभा एक बार फिर से सुर्खियों में आ गई है.

दरअसल, मोकामा के पूर्व विधायक और बाहुबली अनंत सिंह फिलहाल एक-47 रखने के मामले में साज्यफ्ता हैं. कोर्ट ने उन्हें 10 साल की सजा सुनाई थी. अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी फिलहाल मोकामा से विधायक हैं. आरजेडी की विधायक होने के बावजूद नीलम देवी ने चंद महीने पहले बिहार में एनडीए सरकार बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. फिलहाल नीलम देवी एनडीए के साथ हैं और ऐसे में लोकसभा चुनाव के दौरान अनंत सिंह का जेल से बाहर आना बेहद दिलचस्प है. 

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बता दें कि मुंगेर लोकसभा क्षेत्र में 13 मई को वोटिंग है और उससे पहले अनंत सिंह का पैरोल पर बाहर आने की राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है. वैसे तो अनंत सिंह को जो पैरोल मिलने वाली है, उसके पीछे पूर्व विधायक की बीमारी के इलाज कारण बताया जा रहा लेकिन अनंत सिंह चुनाव को जेल से बाहर रखकर किस तरह प्रभावित कर सकते हैं ये बताने की जरूरत नहीं. बाहुबली अनंत सिंह जेडीयू से लेकर आरजेडी और निर्दलीय के तौर पर जीत हासिल कर चुके हैं. 

अनंत सिंह को उनके इलाके में लोग छोटे सरकार के नाम से जानते हैं. कभी नीतीश कुमार के बेहद खास रहे अनंत सिंह बाद में राजनीतिक कारणों से सीएम से दूर होते चले गए और लालू यादव के करीबी हुए. लेकिन अब एक बार फिर अनंत सिंह एनडीए के पाले में हैं. जानकारों का दावा है कि अनंत सिंह भले ही खुले तौर पर चुनाव प्रचार ना भी करें, तब भी वह अपने स्तर से जेडीयू के लोकसभा उम्मीदवार और पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह को फायदा पहुंचा सकते हैं. 

गौरतलब है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में ललन सिंह और अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी के बीच सीधी टक्कर मुंगेर लोकसभा सीट पर हुई थी. तब ललन सिंह जेडीयू उम्मीदवार थे और अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी कांग्रेस की उम्मीदवार थीं. वहीं जब अनंत सिंह सजायाफ्ता हुए तो उनकी विधायकी चली गई, तब मोकामा सीट पर हुए विधानसभा उपचुनाव में नीलम देवी आरजेडी उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरीं. नीलम देवी जब विधानसभा उपचुनाव लड़ रही थीं, तब नीतीश और लालू एक साथ थे. नतीजा यह हुआ कि ललन सिंह ने मोकामा विधानसभा उपचुनाव के दौरान अनंत सिंह की पत्नी के लिए वोट मांगे थे. 

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उधर, ललन सिंह के सामने मोकामा सीट इस वक्त चुनौती बनी हुई है. कारण, लालू यादव ने यहां कुख्यात गैंगस्टर रहे अशोक महतो की पत्नी को चुनाव मैदान में उतारा है. अशोक महतो पिछले दिनों ही जेल से बाहर आया था और अब ललन सिंह पैरोल पर जेल से बाहर आ रहे हैं. ऐसे में जानकार मानते हैं कि ललन सिंह को अनंत सिंह से बड़ी उम्मीदें भी होंगी. अनंत सिंह न केवल मोकामा बल्कि पूरे मुंगेर लोकसभा सीट पर अपना प्रभाव दिखा सकते हैं और इसका फायदा सीधे-सीधे ललन सिंह को मिल सकता है. 

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