लोकसभा चुनाव का प्रचार चल रहा है और बीजेपी से लेकर विपक्ष के तमाम दल परिवारवाद को लेकर एक-दूसरे पर हमला बोल रहे हैं. लेकिन, कुछ ऐसे भी परिवार हैं, जो अलग-अलग राजनीतिक दलों से जुड़े हैं और राजनीति में सक्रिय हैं. एक नाम पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा के परिवार का है. खुद यशवंत सिन्हा का टीएमसी से जुड़ाव रहा है. जबकि उनके बेटे जयंत सिन्हा बीजेपी के बड़े नेता माने जाते हैं. अब खबर है कि जयंत के बेटे आशिर सिन्हा को झारखंड में कांग्रेस (इंडिया ब्लॉक) के मंच पर देखा गया है. हालांकि, सियासत गरमाई तो कांग्रेस की तरफ से सफाई भी आ गई है.
दरअसल, दो दिन पहले ही झारखंड के हजारीबाग के बरही में इंडिया ब्लॉक की रैली आयोजित की गई थी. इस रैली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से लेकर जेल में बंद झामुमो नेता हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन ने हिस्सा लिया था. इस रैली के मंच पर बीजेपी के दिग्गज नेता और हजारीबाग से मौजूदा सांसद जयंत सिन्हा के बेटे आशिर सिन्हा को भी देखा गया है. आशिर को कांग्रेस खेमे देखे जाने के बाद झारखंड की सियासत भी गरमा गई और लोगों में सिन्हा परिवार को लेकर चर्चाएं भी तेज हो गईं. एक विरोधी पार्टी के कार्यक्रम में आशिर की मौजूदगी ने परिवार में संभावित वैचारिक बदलाव की चर्चा शुरू कर दी है. कयासबाजी इसलिए भी तेज है, क्योंकि हजारीबाग सीट को बीजेपी का गढ़ माना जाता है और इस बार पार्टी ने इस सीट से मनीष जायसवाल को मैदान में उतारा है. जायसवाल हजारीबाग सदर सीट से दूसरी बार के विधायक हैं.
टिकट मिलने पर जयंत से मिलने पहुंचे थे मनीष जायसवाल
इधर, हजारीबाग से मौजूदा सांसद और बीजेपी नेता जयंत सिन्हा ने चुनाव प्रचार से दूरी बना ली है. हालांकि, मार्च में जब जायसवाल को उम्मीदवार घोषित किया गया था, तब वो जयंत से मिलने पहुंचे थे. जयंत ने एक्स पर पोस्ट में कहा था, हजारीबाग लोकसभा से बीजेपी प्रत्याशी मनीष जायसवाल जी ने आज भेंट की. उन्हें चुनाव के लिए हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं. हम कमल को रिकॉर्ड मार्जिन से जिताएंगे. इतना ही नहीं, उन्होंने टिकट की घोषणा से ऐन पहले चुनावी राजनीति को अलविदा कहने का खुद ऐलान किया था.
यह भी पढ़ें: Lok Sabha elections 2024: गौतम गंभीर के बाद जयंत सिन्हा ने राजनीति छोड़ने का किया ऐलान, सोशल मीडिया पर किया पोस्ट
विपक्ष की तरफ से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रहे हैं यशवंत सिन्हा
जयंत के पिता यशवंत सिन्हा भी लंबे समय तक बीजेपी का हिस्सा रहे हैं. बाद में वो टीएमसी में शामिल हो गए थे. दो साल पहले उन्होंने टीएमसी छोड़ने का ऐलान किया था. यशवंत सिन्हा विपक्ष की तरफ से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार भी रहे हैं. इतना ही नहीं, यशवंत सिन्हा हजारीबाग सीट का प्रतिनिधित्व भी कर चुके हैं. दो बार बेटे जयंत सिन्हा की जीत में भी उनकी बड़ी भूमिका मानी जाती है.
सिन्हा परिवार को लेकर हजारीबाग में कयासबाजी तेज
कहा जा रहा है कि जयंत सिन्हा के चुनावी राजनीति से दूरी बनाने से पिता यशवंत सिन्हा की बीजेपी से नाराजगी और बढ़ गई है. हाल ही में उन्होंने बीजेपी को हराने के लिए ना सिर्फ 'इंडिया' ब्लॉक के उम्मीदवार जेपी पटेल का समर्थन करने का ऐलान किया है, बल्कि बीजेपी के खिलाफ खोले भी देखे जाते हैं. जानकार कहते हैं कि हजारीबाग सीट पर यशवंत सिन्हा का समर्थन या विरोध किसी भी उम्मीदवार के लिए काफी मायने रखता है. इस बीच, जयंत के बेटे आशिर सिन्हा की इंडिया ब्लॉक के मंच पर मौजूदगी ने उन नाराजगी की चर्चाओं को बल दे दिया.
कांग्रेस बोली- यशवंत सिन्हा के प्रतिनिधि बतौर मंच पर पहुंचे थे आशिर
हालांकि, झारखंड में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर कहते हैं कि रैली में यशवंत सिन्हा को आमंत्रित किया गया था, लेकिन खराब स्वास्थ्य के कारण उन्होंने अपने पोते को प्रतिनिधि के तौर पर भेजा था. ठाकुर ने स्पष्ट किया कि आशिर की उपस्थिति का मतलब यह नहीं है कि वो कांग्रेस में शामिल हो गए हैं. हालांकि, सिन्हा ने इंडिया ब्लॉक के उम्मीदवार जेपी पटेल को समर्थन देने का ऐलान किया है. ठाकुर ने कहा, जब आशिर मंच पर आए तो उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया. पार्टी का स्कार्फ पहनाया गया. राजनीतिक हलके में पार्टी, दुपट्टे से अभिवादन के अलग-अलग मायने निकाले जा रहे हैं.
यह भी पढ़ें: झारखंड: BJP विधायक जय प्रकाश पटेल कांग्रेस में शामिल, हजारीबाग सीट से लड़ सकते हैं लोकसभा चुनाव
जयंत ने इस बार खुद चुनाव लड़ने से किया था इनकार
इस सबके बीच, आजतक ने जयंत सिन्हा और उनके बेटे आशिर सिन्हा से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं हो सकी. बीजेपी के दिग्गज नेता रहे यशवंत सिन्हा को कई मौकों पर अलग-अलग मंचों से केंद्र सरकार की नीतियों और पीएम मोदी के विजन की आलोचना करते हुए देखा और सुना गया है. उन्होंने और उनके बेटे जयंत ने 1998 से 26 साल से ज्यादा समय तक हजारीबाग सीट का प्रतिनिधित्व किया है. इस बार 2 मार्च को जयंत सिन्हा ने एक्स पर एक पोस्ट में पीएम से अनुरोध किया था कि उन्हें सक्रिय चुनावी राजनीति से अलग कर दिया जाए. जयंत ने लिखा था, मैंने पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुझे मेरे प्रत्यक्ष चुनावी कर्तव्यों से मुक्त करने का अनुरोध किया है, ताकि मैं भारत और दुनियाभर में वैश्विक जलवायु परिवर्तन से निपटने के अपने प्रयासों पर ध्यान केंद्रित कर सकूं. मैं आर्थिक और शासन संबंधी मुद्दों पर पार्टी के साथ काम करना जारी रखूंगा. मुझे पिछले दस वर्षों में भारत और हजारीबाग के लोगों की सेवा करने का सौभाग्य मिला है. इसके अलावा, मुझे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा नेतृत्व द्वारा प्रदान किए गए कई अवसरों का आशीर्वाद मिला है. उन सभी के प्रति मेरी हार्दिक कृतज्ञता. जय हिन्द.
सिन्हा परिवार के समर्थकों में नाराजगी!
जयंत के समर्थकों ने नाम ना छापने की शर्त पर कहा, यह सिन्हा परिवार के साथ ठीक नहीं है. जयंत सिन्हा के महत्वपूर्ण प्रयास के कारण ही हजारीबाग के लोगों को रेल नेटवर्क पहुंच सका है. सिन्हा की वजह से हजारीबाग मेडिकल कॉलेजों के उद्घाटन और कई अन्य विकास कार्य मील के पत्थर साबित हुए हैं. यह समझना और मुश्किल है कि आखिर क्यों जयंत को टिकट नहीं दिया गया. उससे पहले 2014 में यशवंत सिन्हा को टिकट नहीं दिया गया था. बाद में जयंत ने अपने पिता की तरह हजारीबाग का प्रतिनिधित्व किया, लेकिन अब पार्टी का अचानक निर्णय आया है.