Jyotirmay Singh Mahato
BJP
Shantiram Mahato
AITC
Nepal Chandra Mahato
INC
Ajit Prasad Mahata
IND
Nota
NOTA
Dhirendranath Mahato
AIFB
Sontosh Rajoward
BSP
Susmita Mahato
SUCI
Gorish Roy
IND
Bhagwat Dass Shastri
IND
Asit Baran Mahato
PDS
Pijush Kanti Rajak
IND
Ajit Mahato
IND
Purulia Election Result Announced: BJP उम्मीदवार Jyotirmay Singh Mahato बने विजेता, जानिए कितने वोट मिले
Purulia सीट पर कांटे का मुकाबला, प्रत्याशियों के बीच महज 17079 वोटोंं का अंतर!
Purulia लोकसभा सीट पर दिलचस्प हुआ मुकाबला, BJP और AITC में महज 17079 वोटोंं का अंतर!
Purulia लोकसभा क्षेत्र में गजब की टक्कर! जानिए ताजा अपडेट
Purulia सीट पर कांटे का मुकाबला, प्रत्याशियों के बीच महज 6397 वोटोंं का अंतर!
Purulia लोकसभा सीट पर दिलचस्प हुआ मुकाबला, BJP और AITC में महज 7889 वोटोंं का अंतर!
पुरुलिया लोकसभा क्षेत्र पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में है. 1995 में यहां आसमान से हथियारों की बारिश हुई थी. पुरुलिया शहर कासल नदी के उत्तरी छोर पर बसा हुआ है. यह अपने लैंडस्केप के लिए जाना जाता है. पुरुलिया जिले का मुख्यालय पुरुलिया ही है. यहां की साक्षरता दर 65% है.
इस सीट का मिजाज अलग रहा है. यहां से कांग्रेस को तो एकबार जीत मिली लेकिन सीपीएम को  जीत कभी नहीं मिली. यहां से फॉरवर्ड ब्लॉक और ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक विजयी होते रहे हैं. 1957 में पुरुलिया से आईएनडी के विभूति भूषण दास गुप्ता सांसद चुने गए थे. उन्होंने कांग्रेस के महतो नागेंद्र नाथ सिंह देव को हराया था. 1962 में लोकसेवक संघ (LSS) के भजाहारी महतो सांसद चुने गए थे. 1967 में आएनडी के बी महतो सांसद चुने गए. 1971 में पहली बार यहां से कांग्रेस को यहां सफलता मिली और देबेंद्र नाथ महतो यहां से सांसद चुने गए थे.
1977 में एफबीएल के चितरंजन महता को सफलता मिली थी. चितरंजन 1980, 1984 और 1989 तक पुरूलिया से लगातार सांसद चुने जाते रहे. 1991 में यहां पर उप चुनाव हुआ जिसमें फॉरवर्ड ब्लॉक (एफबीएल ) के बी महतो सांसद चुने गए. लेकिन 1991 में ही फॉरवर्ड ब्लॉक के चितरंजन मेहता को फिर से जीत मिल गई. 1996, 1998, 1999 में फॉरवर्ड ब्लॉक के बीर सिंह महतो यहां से सांसद चुने जाते रहे. इसके बाद फॉरवर्ड ब्लॉक में विभाजन हो गया और 2004 में बीर सिंह महतो ने ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक (AIFB) से ताल ठोंकी और सांसद बने. 2006 के उपचुनाव में ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक के नरहरि महतो विजयी हुए थे. 2009 में AIFB के नरहिर महतो ही सांसद चुने गए. 2014 में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस ने यह सीट कम्युनिस्टों से छीन ली और AITC के डॉक्टर मृगांका महतो यहां से जीते थे.
2019 का जनादेश
बीजेपी के ज्योतिर्मय सिंह महतो 6,68,107 वोट से जीते
तृणमूल कांग्रेस की मृगांका महतो को 4,63,375 वोट मिले
कांग्रेस के नेपाल महतो को 84,477 वोट मिले
2014 का जनादेश
2014 के चुनाव में यहां से ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के डॉक्टर मृगांका महतो को विजय मिली. मृगांका ने ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक के नरहरि महतो को हराया. मृगांका महतो को 4,68,277 वोट मिले. वहीं नरहरि महतो को 3,14,400 वोट मिले थे. 2014 के चुनाव में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस को 38.87 फीसदी, सीपीएम को 21.41 फीसदी और बीजेपी को 7.16 फीसदी वोट मिले थे. 2014 के लोकसभा चुनाव में यहां 81.98 फीसदी वोटिंग हुई थी. 
Dr. Mriganka Mahato
AITC
Nepal Mahata
INC
Bir Singh Mahato
AIFB
Nota
NOTA
Anandi Tudu
BSP
Mrityunjoy Mahato
IND
Sekh Fatik
BNARP
Barjuram Singh Sardar
IND
Uttam Tantubay
BHMP
Rangalal Kumar
SUCI(C)
Uma Charan Mahato
IND
Laxmikanta Mahata
AMB
Jawaharlal Mahato
MPOI
Dipendu Mahato
JMM
Rajib Mahato
SHS
West Bengal Election Results 2024 Live Updates: TMC सूबे की सबसे बड़ी पार्टी है, जो पिछले 13 सालों से सूबे की सत्ता में है और इस चुनाव में सभी 42 लोकसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ी. इसके बाद बीजेपी बंगाल में विपक्षी पार्टी के रूप में दूसरे नंबर पर है और सभी सीटों पर अकेले चुनाव लड़ी. कांग्रेस और लेफ्ट INDIA ब्लॉक के तहत मिलकर चुनावी मैदान में रही.
चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, वायकर को मुंबई उत्तर पश्चिम लोकसभा सीट से 4,52,644 लाख वोट मिले हैं जबकि इस सीट पर उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी शिवसेना (यूबीटी) के उम्मीदवार अमोल कीर्तिकर को 4,52,596 वोट मिले हैं.
लोकसभा चुनाव के नतीजों में NDA को बहुमत मिला है तो वहीं INDIA गठबंधन भी बेहतर स्थिति में आया है. ऐसे में पश्चिम बंगाल में भी बड़ा खेला देखने को मिला. जहां एक ओर भाजपा को उम्मीद थी कि वो ममता बनर्जी के गढ़ में सेंधमारी कर लेगी. भाजपा की कोशिशें विफल रहीं और पार्टी को इस राज्य में करारा नुकसान झेलने को मिला है.
क्या ममता बनर्जी का सख्त व्यक्तित्व अचानक नरम पड़ने लगा है. इंडिया गठबंधन को लेकर जिस तरह उन्होंने 24 घंटे के अंदर 2 तरह की बातें कीं, ठीक उसी तरह उन्होंने रामकृष्ण मिशन के मुद्दे पर अपने बयान से पलट गईं हैं. आखिर बंगाल में क्या हो रहा है?