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MP Chunav 2023: भाई की साली चुनाव मैदान में उतरी, तो टीआई साहब को होना पड़ा लाइन अटैच

MP Assembly Election 2023: खंडवा जिले की पंधाना विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी रूपाली बारे की बहन टीआई आलोक सिंथिया से ब्याही गई हैं. यानी टीआई साहब कांग्रेस प्रत्याशी की जीजाजी के भाई हैं. इसी रिश्ते के चलते उनकी निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे थे.

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TI अनोख सिंह सिंथिया और पंधाना से कांग्रेस प्रत्याशी रूपाली बारे.
TI अनोख सिंह सिंथिया और पंधाना से कांग्रेस प्रत्याशी रूपाली बारे.

किसी दूर के रिश्तेदार का चुनाव लड़ना भी शासकीय अधिकारियों की परेशानी का सबब बन रहा है. खंडवा जिले के पिपलोद थाने में पदस्थ टीआई अनोखी सिंह सिंथिया को महज़ इसलिए स्थानांतरित होना पड़ा कि उनके भाई की साली उसी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रही है. 

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पंधाना विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी रूपाली बारे की बहन टीआई आलोक सिंथिया से ब्याही गई हैं. यानी टीआई साहब कांग्रेस प्रत्याशी की जीजाजी के भाई हैं. इसी रिश्ते के चलते उनकी निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे थे.

वहीं, आदर्श आचार संहिता में यह स्पष्ट रूप से निर्देश दिए गए है कि किसी क्षेत्र में किसी शासकीय व्यक्ति का रिश्तेदार चुनाव लड़ रहा हो तो वह उस क्षेत्र में ड्यूटी नहीं कर सकता. 

एडिशनल एसपी महेंद्र तारणेकर ने बताया कि हालांकि इस मामले में निर्वाचन कार्यालय में कोई शिकायत नहीं आई थी, लेकिन पुलिस को अपने स्तर पर जानकारी मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई है. सिंथिया को पुलिस लाइन अटैच किया गया है जबकि उनके स्थान पर अभी कोई पदस्थापना नहीं की गई है. 

बता दें कि 33 साल की रूपाली नंदू बारे ने पिछली बार कांग्रेस से बागी होकर निर्दलीय चुनाव लड़ा और 25456 (12.80 %) वोट हासिल कर अपनी व्यक्तिगत पकड़ साबित कर दी थी. अगर 2018 के चुनाव में कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध नहीं लगातीं तो भाजपा के राम दांगोरे की जीत संदिग्ध हो सकती थी. रूपाली के पिता नंदू बारे को कांग्रेस ने 2013 में अपना प्रत्याशी बनाया था, तब उन्होंने 42.21% वोट हासिल किए थे. उनके आकस्मिक निधन के बाद से बेटी क्षेत्र में लगातार सक्रिय है, इसलिए कांग्रेस ने उन पर अपना भरोसा जताया है.

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पंधाना विधानसभा क्षेत्र 

पंधाना विधानसभा क्षेत्र को भाजपा के गढ़ के रूप में देखा जाता है. यहां 1962 में विधानससभा के आस्तित्व में आने के बाद अब तक हुए कुल 13 चुनाव में भाजपा (पूर्व में जनसंघ) ने 10 चुनाव जीते हैं जबकि कांग्रेस सिर्फ 3 बार ही जीत सकी है. यह सीट 1962 से लेकर 2008 तक अनुसूचित जाति SC के लिए आरक्षित रही जबकि 2008 के बाद से यह अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है.  पहले यह मिथक रहा है कि इस सीट से जीतने वाला मंत्री बनता है. यहां से तीन बार भाजपा से विधायक रहे सखाराम पटेल (1972 - 1977 - 1980) प्रदेश शासन में केबिनेट मंत्री रहे. बाद में वे कांग्रेस में शामिल हो गए थे. 

इसके बाद यहां कांग्रेस से हीरालाल सिलावट दो बार विधायक रहे (1985-1998 ) वे भी संसदीय सचिव रहे.  भाजपा से किशोरीलाल वर्मा 3 बार विधायक रहे (1990 - 1993 -2003 ) भाजपा सरकार में स्कूल शिक्षा राज्यमंत्री रहे हैं. भाजपा के राम दांगोरे पंधाना के वर्तमान विधायक हैं. 33 वर्षीय राम दांगोरे ने BE किया है. वे 28 वर्ष की उम्र में विधायक बने हैं. प्रदेश के युवा विधायकों में उनकी गिनती होती है. हालांकि, भाजपा ने इस बार दांगोर का टिकट काटकर छाया मोरे को अपना प्रत्याशी बनाया है. राम दांगोरे ने ही पिछले चुनाव में 23 हजार 750 मतों के भारी अंतर से छाया मोरे को पराजित किया था. तब छाया मोरे कांग्रेस के टिकट से मैदान में थीं और हाल ही में वो भाजपा में शामिल हुईं. तभी से यह कयास लगाए जा रहे थे कि उन्हें पार्टी ने कोई बड़ा कमिटमेंट किया होगा.

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