इंडिया टुडे-एक्सिस माई इंडिया एग्जिट पोल के सर्वे में मिजोरम को लेकर दिलचस्प अनुमान सामने आए हैं. यहां जोरम पीपल्स मूवमेंट बड़ी पार्टी बनकर उभर सकती है और अगर Exit Poll ही 3 दिसंबर को चुनाव परिणाम में तब्दील हुआ तो ZPM मिजोरम में भारी जीत हासिल कर सकती है. पूर्वोत्तर के राज्य मिजोरम में 40 विधानसभा सीटें है, जिनमें से उम्मीद है कि ZPM 28-35 सीटों के साथ बहुमत दर्ज कर सकती है.
सीएम जोरमथंगा की पार्टी का सूपड़ा साफ होने का अनुमान
सर्वेक्षण में अनुमान लगाया गया कि मुख्यमंत्री ज़ोरमथांगा का मिज़ो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) लगभग का सूपड़ा साफ है और उसे केवल 3 से 7 सीटें ही मिलने की संभावना है. इंडिया टुडे-एक्सिस माई इंडिया का अनुमान है कि एमएनएफ को 27 फीसदी वोट मिलेंगे, जेडपीएम को 49 फीसदी वोट मिलेंगे और कांग्रेस को 20 फीसदी वोट मिलेंगे. इस बीच, इंडिया टुडे-एक्सिस माई इंडिया, सी वोटर और जन की बात के संयुक्त एग्जिट पोल में एमएनएफ को 12, जेडपीएम को 22 और कांग्रेस को 5 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है.
मिजोरम में 7 नवंबर को मतदान हुआ था और 80 प्रतिशत से अधिक मतदान दर्ज किया गया था। चुनाव नतीजे 3 दिसंबर को घोषित किए जाएंगे. नवंबर 2018 में हुए पिछले विधानसभा चुनाव में एमएनएफ को 26 सीटें, जेडपीएम को 8 सीटें, कांग्रेस को 5 और बीजेपी को 1 सीट मिली थी.
जानिए ZPM का क्या रहा है इतिहास?
मिजोरम के वर्तमान सीएम जोरमथंगा और उनकी पार्टी MNF के खिलाफ बहुत तगड़ी सत्ता विरोधी लहर देखी जा रही है. वहीं, 74 वर्षीय पूर्व आईपीएस अधिकारी लालदुहोमा के नेतृत्व में ZPM (ज़ोरम पीपल्स मूवमेंट) के पक्ष में ज़बरदस्त लहर है. उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर मिजोरम से 1984 का लोकसभा चुनाव जीता था. 2018 के विधानसभा चुनाव में, वह और उनकी पार्टी ज़ोरम पीपुल्स मूवमेंट एक गठबंधन पार्टी में शामिल हो गए थे.
पार्टी ने उन्हें आधिकारिक तौर पर मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार घोषित कर दिया था, हालांकि इस गठबंधन दल को उस समय आधिकारिक पार्टी के रूप में भारत के चुनाव आयोग से मान्यता नहीं मिल सकी थी. लालदुहोमा ने दो निर्वाचन क्षेत्रों से स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और जीत गए थे. ZPM ने प्रमुख विपक्ष दल बनने के लिए 8 विधानसभा सीटें जीतीं थीं.
ZPM के अधिकतर उम्मीदवार हैं युवा
ZPM पार्टी का जन्म दिल्ली में AAP की ही तरह एक आंदोलन से हुआ था. इस पार्टी के अधिकांश उम्मीदवार युवा हैं और 50 वर्ष से कम उम्र के हैं. वे शहरी क्षेत्रों में लोकप्रिय हैं. सर्वे के मुताबिक ZPM के मिजोरम पर जीत हासिल करने की संभावना है. उसे कुल 40 में से 30 सीटें मिल सकती हैं.
कौन हैं लालदुहोमा?
अभी इसी साल जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी की संसद सदस्यता गई थी, तब इतिहास के झरोखे से लालदुहोमा एक बार फिर चर्चा में आ गए थे. वजह यह रही कि लालदुहोमा भारतीय राजनीति में पहली ऐसी शख्सियत हैं, जिन पर दल-बदल कानून के तहत एक्शन हुआ था और वह लोकसभा में संसद सदस्यता गंवाने वाले पहले शख्स बन गए थे. कभी इंदिरा गांधी की सुरक्षा के प्रमुख रहे पूर्व IPS अधिकारी लालदुहोमा ने जब राजनीति में कदम रखा तो उन्हें भी इस बात का अंदाजा नहीं रहा होगा कि उनका नाम इतिहास में ऐसे याद रखा जाएगा.
पूर्व पीएम इंदिरा गांधी के सुरक्षा के चीफ रहे थे लालदुहोमा
एक समय लालदुहोमा तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी की सुरक्षा के चीफ थे, उन्होंने उसी दौरान नौकरी से इस्तीफा दिया और कांग्रेस में शामिल हो गए थे. इसके बाद उन्होंने उसी साल लोकसभा चुनाव लड़ा, जीता भी और कुछ समय बाद कांग्रेस छोड़ने का फैसला ले लिया. यही फैसला उन पर कार्रवाई की वजह बना था.
बनाई थी जोरम नेशनलिस्ट पार्टी
लालदुहोमा ने मिजोरम में एक क्षेत्रीय राजनीतिक दल 'जोरम नेशनलिस्ट पार्टी' का गठन किया. वो इसी पार्टी के फाउंडर और अध्यक्ष हैं. साल 2018 के मिजोरम विधानसभा चुनावों में उनकी पार्टी गठबंधन 'जोरम पीपुल्स मूवमेंट' में शामिल हो गई, जिसके साथ उन्होंने 2018 में मिजोरम विधानसभा चुनाव लड़ा था. गठबंधन पार्टी ने आधिकारिक रूप से उन्हें मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया था. हालांकि तब तक गठबंधन पार्टी आधिकारिक रूप से भारत के चुनाव आयोग से मान्यता प्राप्त नहीं कर सकी थी. इसलिए 2018 में लालदुहोमा ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था.
2019 में इलेक्शन कमीशन में रजिस्टर्ड हुआ था 'जोरम पीपुल्स मूवमेंट'
वह आइजोल वेस्ट I और सेरछिप सीट दोनों जगह से चुनाव जीते और उन्होंने सेरछिप विधानसभा का प्रतिनिधित्व किया. उन्होंने सेरछिप सीट को इसलिए चुना क्योंकि इस सीट पर वो वर्तमान मुख्यमंत्री ललथनहवला को 410 वोटों से हराकर चुनाव जीते थे. हालांकि उनकी सरकार तो नहीं बनी लेकिन विधानसभा में उन्हें विपक्षी नेता के रूप में जरूर चुना गया. उन्होंने चुनाव निर्दलीय लड़ा था जबकि इसी कार्यकाल के बीच उनका गठबंधन राजनीतिक दल 'जोरम पीपुल्स मूवमेंट' 2019 में चुनाव आयोग में रजिस्टर्ड हो गया. रजिस्टर होने के बाद वे इस राजनीतिक दल के अध्यक्ष बने.