चक्रव्यूह में सुरजेवालाहरियाणा में कांग्रेस की दूसरी हाई प्रोफाइल सीटो में कैथल सीट का नाम आता है. कांग्रेस का यह मजबूत गढ़ माना जाता है. इस सीट पर लंबे समय से सुरजेवाला परिवार का कब्जा है. राहुल के राइट हैंड माने जाने वाले रणदीप सुरजेवाला हैट्रिक लगाने के मकसद से कैथल सीट से एक बार फिर मैदान में हैं. बीजेपी ने सुरजेवाला को उन्हीं के दुर्ग में घेरने के लिए साल 2000 में इनेलो की टिकट पर विधायक बने लीला राम पर दांव लगाया है. जबकि जेजेपी ने खुराना गांव के मौजूदा सरपंच रामफल मलिक को मैदान में उतारा है जिससे कांग्रेस और बीजेपी के समीकरण बिगाड़ते नजर आ रहे हैं.
कैथल विधानसभा सीट पर अभी तक कुल 14 बार विधानसभा चुनाव हुए हैं, जिनमें से 8 बार कांग्रेस ने जीत दर्ज की है. हालांकि बदले हुए समीकरण में बीजेपी काफी मजबूत स्थिति में है. ऐसे में सुरजेवाला के खिलाफ दो तरफा चक्रव्यूह रचा गया है. ऐसे में देखना होगा कि वह हैट्रिक लगा पाते हैं या फिर बीजेपी कमल खिलाने में कामयाब रहती है.
किरण चौधरी को विरासत बचाने की चिंता
हरियाणा के भिवानी जिले की
तोशाम विधानसभा सीट कांग्रेस की काफी महत्वपूर्ण सीटों में से एक है. पूर्व
मुख्यमंत्री चौ. बंसीलाल के गढ़ कहे जाने वाले तोशाम सीट का मुकाबला काफी
दिलचस्प बन गया है. बंसीलाल की विरासत को संभाल रही किरण चौधरी मौजूदा समय
में विधायक हैं और एक बार फिर तोशाम सीट से चुनावी मैदान में उतरी हैं.
किरण चौधरी को उन्हीं के गढ़ में घेरने के लिए बीजेपी ने शशि रंजन परमार और
इनेलो ने कमला देवी पर दांव लगाया है.
तोशाम सीट पर कांग्रेस का
2000 से कब्जा है और किरण चौधरी 2005 से इस सीट पर विधायक हैं, लेकिन बदले
हुए राजनीतिक समीकरण में इस सीट को बचाए रखना कांग्रेस के लिए आसान नजर
नहीं आ रहा है. बता दें कि तोशाम लोकसभा सीट भिवानी महेंद्रगढ़ लोकसभा
क्षेत्र में आती है, 2019 के चुनाव में किरण चौधरी की बेटी उतरी थीं, लेकिन
जीत नहीं सकीं. इसी के चलते किरण चौधरी को तोशाम सीट पर अपनी जीत के लिए
जद्दोजहद करनी पड़ रही है.