scorecardresearch
 

Bhucho Mandi Assembly Seat: पिछली बार कांटेदार हुआ था मुकाबला, क्या इस बार जीतेगी AAP

भूचो मंडी (Bhucho Mandi assembly seat) गांव से घिरा हुआ है और इस शहर में अंग्रेजों के समय से ही दाना मंडी बनी हुई है और रेलवे लाइन के साथ होने के कारण यह बठिंडा जिले में सबसे ज्यादा मालगाड़ी से सामान भरने वाले रेलवे स्टेशन के रूप में भी जाना जाता है.

Advertisement
X
Bhucho Mandi assembly seat
Bhucho Mandi assembly seat
स्टोरी हाइलाइट्स
  • भूचो मंडी में लगातार 2 बार जीत हासिल कर चुकी है कांग्रेस
  • 2017 के चुनाव में अकाली दल से कांग्रेस में आए प्रीतम जीते
  • भूचो मंडी सीट को नथाना विधानसभा सीट के नाम से जानते थे

पंजाब की 117 सदस्यीय विधानसभा सीट में भूचो मंडी सीट की क्रम संख्या 91 है और यह बठिंडा जिले में पड़ता है. इस सीट का इतिहास पुराना नहीं है. 2012 में यह सीट अस्तित्व में आई. पहले इस सीट को नथाना विधानसभा सीट के नाम से जाना जाता था.

Advertisement

सामाजिक तानाबाना  
भूचो मंडी सीट बठिंडा से 15 किलोमीटर दूर है और रामपुरा फूल से 22 किलोमीटर दूर है नथाना जो पहले सीट हुआ करती थी वह भूचो मंडी से 20 किलोमीटर दूर है.

भूचो मंडी अंग्रेजों के समय से ही रेलवे ट्रैक के ऊपर बसा हुआ शहर है. रेलवे स्टेशन की स्थापना भी अंग्रेजों के समय की हुई है जो सड़क मार्ग से चंडीगढ़ बठिंडा नेशनल हाईवे पर पड़ता है. इस सीट में ज्यादातर गांव से जुड़ी हुई सीट है. इसी असेंबली सीट के अंदर ही पांच बार के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के ससुराल का गांव भी पड़ता है.

भूचो मंडी शहर ज्यादातर गांव से घिरा हुआ है और इस शहर में अंग्रेजों के समय से ही दाना मंडी बनी हुई है और रेलवे लाइन के साथ होने के कारण यह बठिंडा जिले में सबसे ज्यादा मालगाड़ी से सामान भरने वाले रेलवे स्टेशन के रूप में भी जाना जाता है. भूचो मंडी के साथ ही एशिया की सबसे बड़ी छावनी बठिंडा भी लगती है.

Advertisement

 इसे भी क्लिक करें ---  Gidderbaha Assembly Seat: अकाली दल की परंपरागत सीट पर कांग्रेस का कब्जा बरकरार रख पाएंगे राजा वडिंग?

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
2012 में अस्तित्व में आई भूचो मंडी विधानसभा सीट पर अब तक दो बार चुनाव हुए हैं. इन दो चुनावों में कांग्रेस पार्टी का वर्चस्व रहा है. पहली बार 2012 में हुए चुनाव में कांग्रेस के अजायब सिंह भट्टी ने शिरोमणि अकाली दल के उम्मीदवार प्रीतम सिंह कोट भाई को 1288 वोट से मात देकर जीत दर्ज की थी.

2017 के चुनाव में भी कांग्रेस ने जीत हासिल की. शिरोमणि अकाली दल के हारे हुए उम्मीदवार प्रीतम सिंह कोटभाई कांग्रेस में शामिल हो गए और इस बार वह चुनाव लड़े तथा जीत गए.

2017 के चुनाव में जीते प्रीतम सिंह कोटभाई
2017 के चुनाव में जीते प्रीतम सिंह कोटभाई

भुच्चो मंडी से पहले इसे नथाना सीट के रूप में जानते थे. यहां पर शिरोमणि अकाली दल बादल ने 5 बार जीत दर्ज की जिसमें 1972, 1977, 1985, 1997 और 2002 शामिल है. कांग्रेस ने इस सीट पर 1980, 1992, 2007, 2012 और 2017 ने जीत हासिल की थी. 

2017 का जनादेश 
2017 के चुनाव की बात करें तो पिछले चुनाव में हार का मुंह देखने वाले अकाली दल के प्रीतम सिंह कोटभाई कांग्रेस में शामिल हो गए. प्रीतम सिंह ने आम आदमी पार्टी को बेहद कड़े मुकाबले में हराते हुए जीत हासिल की थी.
 
प्रीतम सिंह कोटभाई को 51605 वोट मिले तो आम आदमी पार्टी के जगसीर सिंह को 50960 वोट मिले और इस तरह से महज 445 वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी. तीसरे नंबर पर शिरोमणि अकाली दल बादल के उम्मीदवार हरप्रीत सिंह कोटभाई रहे थे. 

Advertisement

रिपोर्ट कार्ड
विधायक प्रीतम सिंह कोर्ट भाई का जन्म 10 अप्रैल 1966 को गांव कोट भाई तहसील गिद्दड़बाहा, जिला मुक्तसर में हुआ था. इनके पिता का नाम दौलत सिंह और माता का नाम तेज कौर है. उनकी पत्नी का नाम श्रीमती परमजीत कौर है. परिवार में एक लड़का और दो लड़की है.

विधायक प्रीतम सिंह कोटभाई मैट्रिक पास हैं. 2017 के चुनाव में चुनाव आयोग को दिए गए एफिडेविट के अनुसार इनके पास 5 करोड़ 72 लाख 36 हजार 706 रुपये की जायदाद है. इनका मुख्य पेशा खेती और पशुपालन है. बाद में डेयरी फार्मिंग में आ गए.

 

Advertisement
Advertisement