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Pathankot Assembly Seat: पठानकोट में फिर से हाथ को जीत दिला पाएंगे अमित विज?

पठानकोट विधानसभा सीट पर कांग्रेस का कब्जा है. कांग्रेस के अमित विज इस समय पठानकोट विधानसभा सीट से विधायक हैं. अमित विज के सामने सीट पर कब्जा बरकरार रखने की चुनौती होगी.

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पंजाब Assembly Election 2022 पठानकोट विधानसभा सीट
पंजाब Assembly Election 2022 पठानकोट विधानसभा सीट
स्टोरी हाइलाइट्स
  • सेना और वायुसेना का बेस है पठानकोट
  • 2007 और 2012 में जीती थी बीजेपी

पंजाब के पठानकोट को जम्मू कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के प्रवेश द्वार के रूप में भी जाना जाता है. इसीलिए अक्सर हिमाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर की यात्रा पर जाने वाले पर्यटक पठानकोट में ही रुकते हैं. पठानकोट की भौगोलिक स्थिति की बात करें तो एक तरफ से ये हिमाचल और दूसरी तरफ से जम्मू कश्मीर की सीमा से सटा है. यहां से एक ट्रेन हिमाचल प्रदेश के लिए चलती है.

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पठानकोट की  प्राकृतिक सुंदरता और समृद्ध इतिहास ने इसे पंजाब का एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल बना दिया है जो अपने धार्मिक स्थलों के लिए भी प्रसिद्ध है. पर्यटक स्थल के साथ-साथ पठानकोट वर्तमान में भारतीय सेना और भारतीय वायुसेना का बेस भी है. पठानकोट जिले की बात करें तो जिले की कुल जनसंख्या 6 लाख 26 हजार 154 है.
 
राजनीतिक पृष्ठभूमि

पठानकोट विधानसभा सीट की राजनीतिक पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो साल 2007 से लेकर 2017 तक इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का कब्जा रहा है. साल 2007 में बीजेपी के मास्टर मोहन लाल ने कांग्रेस के अशोक शर्मा को 8535 वोटों से हराया था. 2012 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के अश्विनी शर्मा ने कांग्रेस के रमन भल्ला को 17 हजार 856 वोट के अंतर से हराया था.

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2017 का जनादेश

साल 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के अमित विज ने बीजेपी के अश्विनी शर्मा को 11 हजार 170 वोट के अंतर से हराया था.  2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने अमित विज को चुनावी रणभूमि में उतारा था. अमित विज पर जनता ने भी विश्वास जताया और 11 हजार 170 वोट के बड़े अंतर से विजयश्री दिलाकर अपना प्रतिनिधित्व करने के लिए विधानसभा में भेजा.
 
विधायक का रिपोर्ट कार्ड

पठानकोट के विधायक अमित विज का जन्म 9 नवंबर 1977 को हुआ था. इनके पिता का नाम अनिल विज था. अमित विजके दो बच्चे हैं. एक बेटा और एक बेटी. विधायक अमित विज ने 2017 के विधानसभा चुनाव में पहली बार चुनाव लड़ा था. विधायक अपने विधानसभा क्षेत्र को बुनियादी समस्याओं से निजात नहीं दिला सके. सीवरेज, ट्रैफिक, गंदे पानी की समस्या मुद्दा बनते रहे हैं. विधायक के कई चुनावी वादे अधूरे हैं.

 

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