एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब विधानसभा चुनाव में भी दागियों की भरमार है. पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने वाले उम्मीदवारों के हलफनामे के आधार पर तैयार एडीआर की रिपोर्ट कहती है की 1276 कुल उम्मीदवारों में 315 के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं यानी लगभग 25 फीसदी पंजाब विधानसभा चुनाव के कुल उम्मीदवारों में से दागी हैं.
हालांकि 2017 के चुनाव में दागियों की मात्रा सिर्फ 9% थी. इतना ही नहीं कुल उम्मीदवारों में से 218 यानी 17 फीसदी के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं जबकि 2017 के विधानसभा चुनाव में सिर्फ 7% उम्मीदवारों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामले दर्ज थे.
सिलसिलेवार तरीके से अगर पार्टियों द्वारा उतारे गए उम्मीदवारों के अपराधिक रिकॉर्ड को देखें तो एडीआर की रिपोर्ट कहती है कि शिरोमणि अकाली दल के 96 उम्मीदवारों में से 65 यानी 68 फीसदी उम्मीदवारों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं, जबकि आम आदमी पार्टी के कुल 117 उम्मीदवारों में से 58 यानी 50 फीसदी के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं.
वहीं बीजेपी के 71 उम्मीदवारों में से 27 के यानी 38 फीसदी उम्मीदवारों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं तो वहीं कांग्रेस के कुल 117 उम्मीदवारों में से 16 के खिलाफ यानी 14 फीसदी उम्मीदवारों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं.
इतना ही नहीं अकाली दल के 63 फीसदी उम्मीदवारों के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज पंजाब विधानसभा चुनाव में भी दागियों की भरमार हैं तो वहीं आम आदमी पार्टी के 23 फीसदी और बीजेपी के 21 फीसदी उम्मीदवारों के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं.
एडीआर की रिपोर्ट कहती है कि पंजाब के कुल उम्मीदवारों में से 15 उम्मीदवार ऐसे हैं जिनपर महिलाओं के खिलाफ अत्याचार की शिकायतें हैं तो वहीं 2 उम्मीदवार ऐसे हैं जिनके ऊपर इंडियन पीनल कोड की धारा 376 के तहत मामले दर्ज हैं जबकि चार उम्मीदवारों के खिलाफ हत्या के मामले भी दर्ज हैं. कुल 35 ऐसे उम्मीदवार भी हैं जिनके ऊपर हत्या के प्रयास का मामला भी दर्ज है.
20 फरवरी को पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होना है. तमाम संस्थाएं और यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट भी कह चुका है कि दागियों को चुनाव में ना उतारा जाए लेकिन पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में ऐसा कोई राज्य नहीं है जो दागियों को टिकट देने में हिचकिचा रहा हो.