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पंजाब में अकाली दल के साथ छोटे भाई की भूमिका में रहने वाली बीजेपी क्या बड़े भाई की रोल में दिखेगी?

पंजाब चुनाव के लिए बीजेपी का कैप्टन अमरिंदर सिंह और सुखदेव ढींडसा की पार्टी के साथ गठबंधन तय है. कैप्टन अमरिंदर दिल्ली की दौरे पर हैं और माना जा रहा है कि दोनों दलों के बीच सीट शेयरिंग फॉर्मूले पर सहमति बन सकती है. ऐसे में सवाल उठता है कि पंजाब में ढाई दशक तक अकाली दल के साथ छोटे भाई की भूमिका रही बीजेपी क्या अब कैप्टन के साथ बड़े भाई के रोल में आ पाएगी? 

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अमित शाह और कैप्टन अमरिंदर सिंह
अमित शाह और कैप्टन अमरिंदर सिंह
स्टोरी हाइलाइट्स
  • पंजाब में कैप्टन का बीजेपी के साथ गठबंधन!
  • अकाली के साथ बीजेपी 23 सीटों पर लड़ी है
  • बीजेपी इस बार पंजाब में बड़े भाई की भूमिका

कृषि कानून की वापसी और आंदोलन कर रहे किसानों की घर वापसी के बाद बीजेपी अब पंजाब विधानसभा चुनाव की जंग फतह करने की तैयारी में जुट गई है. पंजाब चुनाव के लिए बीजेपी का, कैप्टन अमरिंदर सिंह और सुखदेव ढींडसा की पार्टी के साथ गठबंधन तय है. कैप्टन अमरिंदर दिल्ली दौरे पर हैं और माना जा रहा है कि दोनों दलों के बीच सीट शेयरिंग फॉर्मूले पर सहमति बन सकती है. ऐसे में सवाल उठता है कि पंजाब में ढाई दशक तक अकाली दल के साथ छोटे भाई की भूमिका में रही बीजेपी क्या अब कैप्टन के साथ बड़े भाई के रोल में आ पाएगी? 

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कैप्टन अमरिंदर सिंह गुरुवार को तीन दिन के दिल्ली दौर पर पहुंचे हैं, जहां बीजेपी के शीर्ष नेताओं के साथ मुलाकात और पंजाब चुनाव को लेकर मंथन करेंगे. इस दौरान दोनों पार्टी के बीच मुख्य रूप से सीट बंटवारे को लेकर चर्चा होनी है, क्योंकि अब चुनाव में बहुत ज्यादा दिन नहीं बचे हैं. आम आदमी पार्टी और अकाली दल-बसपा गठबंधन अपने कैंडिडेट के नामों की घोषणा करना शुरू कर चुके हैं जबकि कांग्रेस ने अपने प्रत्याशियों के चयन के लिए कमेटी गठित कर दी है.

वहीं, बीजेपी ने कैप्टन अमरिंदर सिंह की पार्टी के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ने पर लगभग सहमति बना ली है. बीजेपी के अध्यक्ष जेपी नड्डा खुद भी यह बात आजतक के एजेंडा कार्यक्रम में कह चुके हैं. ऐसे में कैप्टन अमरिंदर दिल्ली दौर पर सबसे पहले बीजेपी के चुनाव प्रभारी व केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के साथ मुलाकात करेंगे. इसके बाद जेपी नड्डा और अमित शाह के साथ भी उनकी मुलाकात होनी है. माना जा रहा है कि बीजेपी के शीर्ष नेताओं के साथ मुलाकात के दौरान कैप्टन अमरिंदर सीट शेयरिंग को लेकर बातचीत कर सकते हैं. 

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दिलचस्प बात यह है कि अभी तक पंजाब में अकाली दल के साथ गठबंधन में रहते हुए बीजेपी जूनियर पार्टनर के तौर पर रही है. बीजेपी कभी भी 23 सीटों से ज्यादा पर पंजाब में चुनाव नहीं लड़ी है, लेकिन अब अकाली दल से नाता टूटने के बाद बीजेपी पूरे पंजाब में चुनाव लड़ने का दम भर रही है. ऐसे में बीजेपी कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ गठबंधन जरूर कर रही है,  पर बड़े भाई की भूमिका रहना चाहती है. 

पंजाब की कुल 117 विधानसभा सीटें है. माना जा रहा है कि बीजेपी पंजाब में कम से कम 70 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है और कैप्टन की पार्टी के लिए 35 सीटें छोड़ने के मूड में है जबकि बाकी बची 12 सीटें सुखदेव सिंह ढींडसा की पार्टी को दी सकती हैं. इस सीट शेयरिंग के फॉर्मूले पर मुहर लगती है तो निश्चित तौर पर बीजेपी पहली बार पंजाब की सियासत में बड़े भाई की भूमिका में चुनावी मैदान में होगी. 

हालांकि, बीजेपी भले ही पंजाब में ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़कर खुद को स्थापित करना चाहती हो, लेकिन ग्रामीण इलाके में अभी पार्टी के पास अपना सियासी आधार नहीं है. मालवा रीजन की ऐसे कई सीट हैं, जहां पर बीजेपी का संगठन तो है, पर आधार नहीं है. वहीं, किसान आंदोलन भले ही खत्म हो गया हो, पर किसानों के मन में अभी भी कसक बाकी है. 

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बीजेपी का पंजाब चुनाव में पूरा फोकस शहरी क्षेत्रों पर ही है, जहां पर किसान आंदोलन का असर या तो कम था या फिर न के बराबर था. वहीं, भले ही कैप्टन ने कांग्रेस को छोड़ दिया हो, लेकिन वह शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी दमखम रखते है. ऐसे में कैप्टन भी सीट शेयरिंग को लेकर अपना दमखम दिखा रहे हैं, लेकिन अपने सियासी पत्ते नहीं खोल रहे हैं. ऐसे में देखना होगा कि बीजेपी गठबंधन के बीच सीट शेयरिंग का क्या फॉर्मूला होता है और कौन कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगा. 

 

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