Exit Poll Punjab 2022: पंजाब में 117 विधानसभा सीटों पर वोटिंग 20 फरवरी को हुई थी. चुनाव के नतीजे भले ही 10 मार्च को आएं लेकिन इंडिया टुडे-एक्सिस माय इंडिया का एग्जिट पोल आ चुका है. इसमें ये बात साफ हो चुकी है कि पंजाब में आप के नेतृत्व में सरकार बन सकती है. आम आदमी पार्टी को सबसे ज्यादा सीटें मिलने का अनुमान लगाया जा रहा है. यहां AAP 76 से 90 सीटें तक जीतती हुई नजर आ रही है. अगर बात वोट शेयर की करें तो एग्जिट पोल के मुताबिक आम आदमी पार्टी को पंजाब की जनता ने 41 फीसदी वोट दिए हैं. ऐसे में ये सवाल लाजिमी है कि पिछली बार विधानसभा चुनाव में महज 24.9 फीसदी वोट शेयर हासिल करने वाली पार्टी सब पर भारी क्यों पड़ी?
ये है पंजाब में एग्जिट पोल का गणित
बता दें कि 2017 में पंजाब की जनता ने कांग्रेस पर भरोसा जताते हुए 77 सीटों पर विजय दिलाई थी. लेकिन बार इंडिया टुडे-एक्सिस माय इंडिया का एग्जिट पोल के मुताबिक पंजाब में कांग्रेस महज 19 से 31 सीटें जीतती हुई नजर आ रही है. इसका एक कारण पंजाब में अंदरूनी टकराव हो सकता है. क्योंकि चुनाव से पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह पार्टी से अलग हो गए थे. इसके बाद कांग्रेस ने चरणजीत सिंह चन्नी पर भरोसा जताते हुए उन्हें पंजाब की गद्दी सौंप दी थी. लिहाजा उन्होंने 111 दिन तक सूबे की सत्ता चलाई. वहीं पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू लगातार चन्नी से खफा रहे.
कांग्रेस में चलती रही अंदरूनी उठापटक
वह अपनी ही सरकार पर निशाना साधते रहे. समय-समय पर उन्होंने चन्नी सरकार को कमजोर बताने की कोई कसर नहीं छोड़ी. इसका बड़ा असर पंजाब की जनता पर हुआ हो, ये काफी हद तक संभव है. इसके साथ ही नवजोत सिद्धू सीएम कैंडिडेट की रेस में भी थे और खुद को सीएम फेस प्रोजेक्ट किए जाने की उम्मीद लगाए थे. लेकिन लुधियाना में हुई एक सभा में जब राहुल गांधी ने चन्नी को सीएम कैंडिडेट के तौर पर प्रोजेक्ट कर दिया तो सिद्धू की नाराजगी भी प्रियंका गांधी के मंच पर साफ तौर पर जाहिर हुई थी.
मंच पर संबोधित करने से सिद्धू का इनकार
इस दौरान उन्हें मंच पर जनता को संबोधित करने के लिए बुलाया गया था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया था कि वह संबोधित नहीं करेंगे. साफ है कि कांग्रेस में अंदरूनी टकराव के आसार बन गए थे. इसका बहुत हद तक लाभ आम आदमी पार्टी को मिला.
NDA में किसको कितनी सीटें मिलने का अनुमान
वहीं एग्जिट पोल के मुताबिक एनडीए पर भी लोगों ने भरोसा नहीं जताया. लिहाजा शिरोमणि अकाली दल को 7-11 और भाजपा को महज 1 से 4 सीटें मिलने का अनुमान है. पंजाब में भारतीय जनता पार्टी 65 सीटों पर चुनाव लड़ी थी. एनडीए गठबंधन में भाजपा, पंजाब लोक कांग्रेस और संयुक्त अकाली दल-ढिंसा शामिल हैं. इसमें पंजाब लोक कांग्रेस को 37 सीट और 15 सीटों पर संयुक्त अकाली दल-ढिंसा चुनाव लड़ी थी. ऐसे में साफ है कि एनडीए की फूट भी आम आदमी पार्टी के लिए फायदेमंद साबित हुई है. क्योंकि कृषि विधेयक के विरोध को लेकर अकाली दल और बीजेपी में ठन गई थी. लिहाजा मोदी सरकार में मंत्री रहीं हरसिमरत कौर ने इस मुद्दे पर इस्तीफ़ा दे दिया था.
पंजाब में AAP की झाड़ू चलने के ये हैं बड़े कारण
पंजाब में आम आदमी पार्टी का भगवंत मान सिंह को सीएम का चेहरा घोषित करने का दांव सफल रहा. पंजाब में पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाती नजर आ रही है. भगवंत मान के मालवा इलाके की 69 विधानसभा सीटों में से 63 सीटें आम आदमी पार्टी को मिलने का अनुमान है. इसके साथ ही आम आदमी पार्टी लगातार कांग्रेस पर अवैध खनन और भ्रष्टाचार के आरोप लगाती रही. साथ ही पंजाब की जनता के मन में ये बात बैठाने में भी सफल रहे कि अगर वे सत्ता में आए तो पंजाब को भी दिल्ली की तर्ज पर सुविधाएं मुहैया कराएंगे.
सत्ता विरोधी लहर का मिला AAP को लाभ
पंजाब में इस बार परिवर्तन की लहर चली. कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार के चलते कांग्रेस के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर थी. कांग्रेस ने सीएम पद से कैप्टन को हटाकर चरणजीत सिंह चन्नी को बनाया, लेकिन सत्ता विरोधी लहर को जीत में तब्दली करने में सफल नहीं हो सकी. ऐसे में कांग्रेस के खिलाफ पंजाब में बदलाव की बयार उठी, जिसे आम आदमी ने बेहतर तरीके से भुनाया और खुद को मजबूत विकल्प के तौर पर पेश किया.
दलितों की पसंद बनी आम आदमी पार्टी
कांग्रेस ने पंजाब में दलित वोटों को साधने के लिए कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटाकर दलित चेहरा चरणजीत सिंह चन्नी को सीएम बनाया. इसके बावजूद दलित मतदाताओं को कांग्रेस अपने पाले में लाने में सफल नहीं हो सकी. पंजाब में दलितों की पसंद आम आदमी पार्टी बनी.
अकाली दल-बसपा गणित फेल रहा
पंजाब में शिरोमणि अकाली दल का बसपा के साथ गठबंधन करने का दांव भी सफल होता नहीं दिख रहा है. अकाली दल और बसपा मिलकर भी दलित वोटों को अपने पक्ष में नहीं करती दिख रही हैं. सुखबीर सिंह बादल पंजाब में न सिख वोटरों को साध पाए, न ही दलितों को. सर्वे के अनुमान से यही दिख रहा है.
बीजेपी-कैप्टन गठबंधन सफल नहीं, AAP बनी विकल्प
पंजाब में कांग्रेस से नाता तोड़कर पंजाब लोक कांग्रेस बनाने वाले कैप्टन अमरिंदर सिंह बीजेपी के साथ मिलकर चुनावी मैदान में उतरे थे, लेकिन लोगों का दिल नहीं जीत सके. कैप्टन बीजेपी को संजीवनी देने में सफल नहीं हुए, इसके चलते लोगों का विकल्प आम आदमी पार्टी बनी.