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बालकनाथ, बालमुकुंद, प्रताप पुरी और ओटाराम... राजस्थान के वो 4 महंत, जो BJP के टिकट पर पहुंचे विधानसभा

राजस्थान विधानसभा चुनाव में इस बार बीजेपी के टिकट पर चुनाव जीतकर सात महंत भी विधानसभा में पहुंचे हैं. चारों संतों की जीत का अंतर भी काफी बड़ा रहा है. इनमें बाबा बालकनाथ, बालमुकुंदाचार्य, प्रताप पुरी और ओटाराम देवासी का नाम शामिल है.

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बाबा बालकनाथ, बालमुकुंदाचार्य, महंत प्रताप पुरी, ओटाराम देवासी ( बाएं से दाएं )
बाबा बालकनाथ, बालमुकुंदाचार्य, महंत प्रताप पुरी, ओटाराम देवासी ( बाएं से दाएं )

राजस्थान विधानसभा चुनाव के सभी 199 सीटों के नतीजे घोषित हो चुके हैं जिसमें से भारतीय जनता पार्टी ने 115 सीटों पर जीत हासिल की है. इस इलेक्शन में बीजेपी ने चार संतों को भी चुनावी मैदान में उतारा था और सभी ने शानदार जीत दर्ज की है. यानि हिंदुत्व को लेकर बीजेपी ने जो रणनीति तैयार की थी वो चुनाव में पूरी तरह कारगर रही.

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जिन चार संतों ने जीत हासिल की है उनमें से एक बाबा बालकनाथ को तो सीएम का तक दावेदार माना जा रहा है जो तिजारा सीट से चुनाव जीते हैं.तो आइए जानते हैं उन चार संतों के बारे में जो अब विधायक के रूप में विधानसभा में नजर आएंगे-

बाबा बालकनाथ (तिजारा)

बाबा बालकनाथ अलवर से सांसद भी हैं. बालकनाथ की तुलना उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की जाती हैं और उन्हें ‘राजस्थान का योगी’ भी कहते हैं. तिजारा विधानसभा सीट से उन्होंने कांग्रेस के इमरान खान को 6173 वोटों से हराया.  बालकनाथ ने 2019 के लोकसभा चुनाव में अलवर से कांग्रेस के भंवर जितेंद्र सिंह को हराया था. बालकनाथ बीजेपी के फायर ब्रांड नेता माने जाते हैं. उनके चुनाव प्रचार में खुद यूपी के सीएम योगी भी पहुंचे थे. उन्हें 'फ्यूचर सीएम' भी बताया जा रहा है. उनके चुनाव लड़ने से तिजारा सीट हॉट सीट बन गई थी.

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बाबा बालकनाथ

39 साल के बालकनाथ को सीएम के दावेदार के रूप में भी देखा जा रहा है जो बीजेपी के हिंदुत्ववादी एजेंडे पर फिट बैठते हैं. यही वजह है कि चुनाव से पहले जब राजस्थान में बीजेपी ने अपनी इकाई का ऐलान किया था, तब उन्हें उपाध्यक्ष बनाया था. बालकनाथ नाथ संप्रदाय की सबसे बड़ी गद्दी बोहर मठ के महंत हैं जिसका प्रभाव राजस्थान ही नहीं बल्कि हरियाणा में भी है और रोहतक में इस मठ की कई सारी यूनिवर्सिटी, कॉलेज, अस्पताल, स्कूल हैं.

हवामहल से बालमुकुंदाचार्य

जयपुर की हवामहल सीट पर बीजेपी उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने वाले बालमुकुंदाचार्य ने कांग्रेस के प्रत्याशी आरआर तिवारी को 974 वोटों से शिकस्त दी. बालमुकुंदाचार्य को जहां 95989 वोट मिले तो वहीं कांग्रेस उम्मीदवार को 95015 वोट मिले. हाथोज धाम के संत  बालमुकुंदाचार्य  जब नामांकन करने के लिए पहुंचे थे तब उनके हाथ में हनुमान की गदा थी और उनकी तस्वीर खूब वायरल हुई थी. बालमुकुंदाचार्य अखिल भारतीय संत समाज राजस्थान के प्रमुख हैं.

बालमुकुंदाचार्य

ओटाराम देवासी (सिरोही)

ओटाराम देवासी ने सिरोही सीट पर 35805 मतों से जीत हासिल की है. ओटाराम देवासी ने कांग्रेस के संजय लोढ़ा को हराया. ओटाराम को जहां 114729 वोट मिले तो वहीं संजय लोढ़ा को 78924 वोट मिले. ओटाराम राम देवासी अपने समाज के धर्मगुरु हैं और उनके लाखों फॉलोअर्स भी हैं. 2005 में उन्हें राज्य पशुपालक कल्याण बोर्ड का संयोजक बनाया गया था. इसके अलावा वो 2008 और 2013 में सिरोही से विधायक बने. पूर्व में बीजेपी सरकार में गोपालन मंत्री भी रह चुके हैं. उन्होंने साल 2018 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी के टिकट पर तीसरी बार चुनाव लड़ा था. जिसमें उन्हें निर्दलीय उम्मीदवार ने 10 हजार से ज्यादा वोटों से हरा दिया था. 

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ओटाराम देवासी

मंहत प्रताप पुरी (पोकरण)

पोकरण विधानसभा सीट से बीजेपी के प्रत्याशी के रूप में महंत प्रताप पुरी ने 35427 मतों से शानदार जीत हासिल की है. दूसरे नबंर पर कांग्रेस के शाले मोहम्मद रहे जिन्हें प्रताप पुरी के 112925 वोटों के मुकाबले 77498 वोट मिले.  इस सीट पर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के देवीलाल तीसरे स्थान पर जिन्हें 4690 वोट मिले.

मंहत प्रताप पुरी

प्रताप तारातारा मठ के प्रमुख हैं और राजस्थान के बाड़मेर जिले के महाबार गांव से ताल्लुक रखते हैं. सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहने वाले प्रताप पुरी सामाजिक एकता को लेकर भाषण देते रहे हैं. 
 

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