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Rajasthan Election 2023: राजस्थान की इन सीटों पर नहीं है एक भी महिला प्रत्याशी, पिछले चुनाव में ऐसी थी तस्वीर

राजस्थान में विधानसभा चुनाव दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है. बीजेपी और कांग्रेस के बागियों ने चुनाव रणनीतिकारों के पसीने छुड़ा रखे हैं. उधर, विधानसभा चुनाव से पहले महिला आरक्षण बिल पर जमकर हंगामा हुआ था. तब दोनों पार्टियां महिलाओं को टिकट देने का दावा कर रही थीं. मगर, राजस्थान में 81 विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जिन पर एक भी महिला ने नामांकन पत्र दाखिल नहीं किया है.

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प्रतीकात्मक फोटो.
प्रतीकात्मक फोटो.

राजस्थान में विधानसभा चुनाव की बिसात बिछ चुकी है. नाम वापसी के बाद अब सभी विधानसभा सीटों पर चुनावी समीकरण साफ होने लगे हैं. 200 विधानसभा सीटों में से 81 विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जिन पर एक भी महिला प्रत्याशी ने नामांकन नहीं भरा है. 40 प्रतिशत सीटों पर पुरुषों का वर्चस्व नजर आ रहा है. 

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दरअसल, राजस्थान विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और बीजेपी ने पूरी ताकत झोंक रखी है. पार्टियां और नेता हर पैतरा अपनाने में लगे हैं. विधानसभा चुनाव से पहले महिला आरक्षण बिल पर जमकर हंगामा हुआ था. तब दोनों पार्टियां महिलाओं को टिकट देने का दावा कर रही थीं. मगर, राजस्थान में 81 विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जिन पर एक भी महिला ने नामांकन पत्र दाखिल नहीं किया है.

इन सींटों पर महिलाओं ने नामांकन पत्र नहीं दाखिल किया

इनमें किशनगढ़, मसूदा, तिजारा, बहरोड़, रामगढ़, घाटोल, बांसवाड़ा, बायतू, पचपदरा, सिवान, चौहटन, नगर, भरतपुर, आसींद, मांडन, सहाड़ा, शाहपुरा, लूणकरणसर, हिंडोली, कपासन, बेगू, चित्तौड़गढ़, निंबाहेड़ा, बड़ी सादड़ी, चूरू, सरदारशहर, लालसोट, आसपुर, सागवाड़ा, चौरासी, पीलीबंगा, नोहर, भादरा, शाहपुरा, फुलेरा, दूदू, आमेर, झोटवाड़ा, किशनपोल, जैसलमेर, भीनमाल, जालौर, सांचौर, रानीवाड़ा, डग,  मनोहरथाना, पिलानी, नवलगढ़, फलोदी, लोहावट, लूणी, पीपल्दा, सांगोद, कोटा उत्तर, रामगंज मंडी, लाडनूं, डीडवाना, खींवसर, परबतसर, नावा, पाली, बाली, सुमेरपुर, धरियावद, प्रतापगढ़, भीम, कुंभलगढ़, नाथद्वारा, गंगापुर सिटी, फतेहपुर, लक्ष्मणगढ़, सीकर, सिरोही, पीपवाड़ा, मालपुरा, टोंक, देवली उनियारा, गोगुंदा, उदयपुर ग्रामीण, मावली और सलूम्बर का नाम शामिल है.

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2018 के चुनाव में क्या थे हालात

2018 के विधानसभा चुनाव में 189 महिला प्रत्याशी चुनाव मैदान में थीं. इस बार उनकी संख्या 183 है. साल 2018 में कुल 2294 प्रत्याशियों में 189 महिला थीं. इनमें से 24 ने जीत दर्ज की थी. इस बार चुनावी मैदान में 6 महिला प्रत्याशी कम उतरी हैं, जबकि हर पार्टी नारी शक्ति पर बात करती है. राजनीतिक पार्टियां बड़े-बड़े दावे करती हैं और समाज में उनको बराबर का अधिकार देने पर बहस होती है.

कांग्रेस और बीजेपी के बागी अभी भी मैदान में हैं डटे

बीजेपी के जो बागी नेता मैदान में हैं, उनमें यूनुस खान डीडवाना से, चंद्रभान आक्या चित्तौड़गढ़ से, प्रियंका चौधरी बाड़मेर से, रविन्द्र भाटी शिव सीट से, राजेन्द्र भादू सूरतगढ़ से, राजेन्द्र भाम्बू झुंझुनू से, राजेंद्र नायक सुजानगढ़ से, ताराचंद धायल सीकर से, कैलाश मेघवाल शाहपुरा से, आशा मीणा सवाई माधोपुर से, गुलाब सिंवर संगरिया से, जीवाराम चौधरी सांचौर से, विजय कुमार मीणा राजगढ़-लक्ष्मणगढ़ से, जसवीर सिंह खरवा मसूदा से, इन्द्र सिंह ब्यावर से, हिम्मत सिंह राजपुरोहित-मकराना से, प्रभुदयाल सारस्वत लूणकरणसर से, भवानी सिंह राजावत लाडपुरा से, मुकेश गोयल कोटपूतली से, बंशीधर बाजिया खंडेला से, आशु सिंह सुरपुरा झोटवाड़ा से और पवनी मेघवाल जालोर से मैदान में हैं.

कांग्रेस के यह नेता हैं बागी

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राजकरण चौधरी सरदारशहर से, बृजेश जाटव हिंडौन सिटी से (बीएसपी), कैलाश मीणा मनोहरथाना से, हबीबुर्रहमान नागौर से, नसीम अख्तर इंसाफ पुष्कर से, गोविंद शर्मा नगर से, आलोक बेनीवाल शाहपुरा (जयपुर) से, सुनील परिहार सिवाना से, जौहरी लाल मीणा राजगढ़-लक्ष्मणगढ़ से, फतेह खान शिव सीट से, राकेश बोयत केशोरायपाटन से और लूणकरणसर से वीरेंद्र बेनीवाल.

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