धोरों की धरती कहे जाने वाले राजस्थान में एक बार फिर रिवाज की जीत हुई है. राजस्थान में वर्ष 1993 से एक रिवाज चल रहा है. यहां हर पांच साल में सरकार बदल जाती है, ये रिवाज इस बार भी बरकरार रहा. कांग्रेस को उम्मीद थी कि रिवाज बदलेगा और गहलोत का जादू चलेगा. लेकिन ना तो जादू चला ना रिवाज बदला. लेकिन यहां कांग्रेस का राज बदल गया. मतगणना से पहले जीत के दावे कर रही कांग्रेस के खाते में सिर्फ 69 सीटें ही आई हैं, जबकि मरुधरा में 115 सीटों के साथ कमल खिला है.
राजस्थान में बीजेपी जहां अपनी जीत का जश्न मना रही है, वहीं कांग्रेस अपनी हार के कारण ढूंढ रही है. चुनाव जीतने के बाद वसुंधरा राजे ने जहां जीत का श्रेय पीएम मोदी, अमित शाह और जेपी नड्डा को दिया. वहीं अशोक गहलोत ने कहा कि हम विनम्रतापूर्वक राजस्थान के लोगों द्वारा दिए गए जनादेश को स्वीकार करते हैं. यह सभी के लिए अप्रत्याशित परिणाम है. यह हार बताती है कि हम अपनी योजनाओं, कानूनों और नवाचारों को जनता तक ले जाने में पूरी तरह से सफल नहीं हुए.
राजस्थान में जीत के बाद बीजेपी कार्यकर्ता बेहद उत्साहित हैं. अब इस बात पर मंथन का दौर शुरू हो गया है कि राजस्थान की कमान किसके हाथ में सौंपी जाए. लेकिन ये 5 बड़े कारण हैं जिसकी वजह से राजस्थान में बीजेपी ने कमल खिलाया है.
1. पीएम मोदी का जादू चला
राजस्थान में बीजेपी की जीता का पहला फैक्टर यही है कि चुनावी साल में पीएम मोदी ने राजस्थान में कई यात्राएं कीं. राजस्थान के हर कोने में उनकी रैलियां हुईं. चुनाव अभियान के अंतिम चरण में उन्होंने विशाल रोड शो किए. इस दौरान उन्होंने बार-बार गहलोत सरकार पर निशाना साधा. राजस्थान में बढ़ते महिला अपराधों की ओर वोटर्स का ध्यान खींचा. इसके साथ ही राजेंद्र गुढ़ा के लाल डायरी वाले मुद्दे को भी जमकर उछाला. पीएम मोदी की मेहनत मोदी मैजिक में तब्दील हो गई.
2. बीजेपी ने चला हिंदुत्व कार्ड
राजस्थान के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने उदयपुर में हुए कन्हैयालाल हत्याकांड का मुद्दा जोरशोर से उठाया था. 2022 में उदयपुर में कन्हैयालाल हत्याकांड की घटना को पीएम मोदी ने बार-बार उठाते रहे हैं, साथ ही सभी बीजेपी नेता बार-बार कांग्रेस पर 'तुष्टीकरण की राजनीति' को लेकर हमला करते रहे. बीजेपी ने बाबा बालकनाथ को उम्मीदवार बनाकर और अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण का जिक्र कर हिंदुत्व का कार्ड खेला. जिसका असर राजस्थान के वोटर्स पर हुआ. जिसका नतीजा चुनाव परिणाम में साफ तौर पर देखने को मिला है.
3. नारी सुरक्षा के मोर्चे पर नाकाम कांग्रेस
राजस्थान में दुष्कर्म औऱ महिला हिंसा अपराधों की संख्या बीते सालों में काफी बढ़ी है. बीजेपी वोटर्स के बीच ये नैरेटिव को सेट करने में कामयाब हुई. बीजेपी नारी सुरक्षा के मुद्दे पर लगातार कांग्रेस को घेर रही थी. मणिपुर में जब दो महिलाओं को निर्वस्त्र घुमाए जाने का मामला सामने आया था तो गहलोत ने इस पर बीजेपी को घेरने की कोशिश की थी, लेकिन बीजेपी ने इस पर करारा पलटवार किया था. प्रदेश बीजेपी ने गहलोत सरकार के कार्यकाल में राजस्थान में अपराध बढ़ने को लेकर लगातार हमला किया.
4. गहलोत-पायलट की रार का बीजेपी को फायदा हुआ
सीएम गहलोत की कल्याणकारी योजनाओं ने उनकी सरकार के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर को भले ही कम कर दिया, लेकिन मौजूदा कांग्रेस विधायकों के खिलाफ वोटर्स में आक्रोश था. राजनीतिक जानकारों की मानें तो कांग्रेस ने खामियों और निगेटिव इमेज के बाद भी कई विधायकों के टिकट नहीं काटे. इसका असर चुनाव परिणाम पर हुआ. इसके अलावा बीजेपी के दिग्गज नेताओं ने अशोक गहलोत-पायलट विवाद को भी जमकर उछाला. चुनाव पर इसका असर भी देखने को मिला है. बीजेपी नेताओं ने बार-बार दावा किया कि गहलोत-पायलट की लड़ाई के चलते राज्य का विकास रुक गया है. इतना ही नहीं, चुनाव अभियान के अंतिम चरण में पीएम मोदी ने कांग्रेस पर परिवारवादी राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा था कि इस पार्टी में जो भी नेता सच बोलता है उसकी राजनीति गड्ढे में चली जाती है. पीएम मोदी ने आरोप लगाया था कि कांग्रेस पार्टी राजेश पायलट से अपनी खुन्नस उनके बेटे सचिन पायलट से निकाल रही है. हालांकि कांग्रेस ने इसे गुर्जर वोटों को लुभाने की एक चाल के रूप में खारिज कर दिया था. लेकिन गहलोत-पायलट के बीच दरार जमीन पर दिखाई दी जो कि कांग्रेस की जीत में बड़ी बाधा बन गई.
5. पेपर लीक और करप्शन बने बड़ा मुद्दा
राजस्थान में करप्शन और पेपर लीक का मुद्दा चुनाव प्रचार में हावी रहा. बीजेपी ने सत्तारूढ़ पार्टी कांग्रेस को लगातार पेपर लीक को लेकर कटघरे में खड़ा किया. दरअसल, अक्टूबर के महीने में प्रवर्तन निदेशालय ने 2022 पेपर लीक मामले में कांग्रेस नेता गोविंद सिंह डोटासरा के आवास पर छापा मारा था. जिसने विधानसभा चुनाव से पहले सूबे में राजनीतिक हलचल को काफी हवा दे दी थी. गोविंद सिंह डोटासरा के बेटों अभिलाष और अविनाश को भी राजस्थान शिक्षक पात्रता परीक्षा पेपर लीक के मामले में तलब किया गया था. इस मुद्दे को बीजेपी ने अपना हथियार बनाया. इसके साथ ही राजेंद्र गुढ़ा के लाल डायरी वाले मामले को खुद पीएम मोदी ने कई बार उछाला.