दिल्ली में किसकी और कैसे सरकार बने, इसे लेकर कयासों का बाजार गर्म है. इस बीच AAP नेता प्रशांत भूषण ने बीजेपी को सशर्त समर्थन देने की बात कहकर सियासी भूचाल ला दिया. लेकिन जैसे ही ये बात सामने आई AAP ने उनके बयान से किनारा कर लिया.
बीजेपी को दे सकते हैं सशर्त समर्थनः प्रशांत भूषण
दरअसल, प्रशांत भूषण ने न्यूज चैनल NDTV से कहा कि दिल्ली में सरकार बन सके इसके लिए AAP बीजेपी को मुद्दों पर आधारित समर्थन दे सकती है. उन्होंने कहा, 'अगर बीजेपी हमें लिखित में दे कि वो 29 दिसंबर तक जनलोकपाल बिल पास कर देंगे. इसके साथ दिल्ली में जनसभा का गठन होगा. इस स्थिति में समर्थन देने पर विचार कर सकते हैं.'
हालांकि उन्होंने इस इंटरव्यू में यह भी साफ किया कि यह उनकी निजी राय है इसका पार्टी से कोई लेना-देना नहीं.
प्रशांत भूषण के बयान से AAP का किनारा
हुआ भी कुछ ऐसा ही. जैसे ही मुद्दा गर्माया आम आदमी पार्टी ने अपने नेता के इस बयान से किनारा कर लिया. सूत्रों के हवाले से खबर आई कि प्रशांत भूषण के विचार निजी हैं पार्टी इस लाइन पर नहीं सोच रही.
चुनाव के अलावा कोई विकल्प नहीं: AAP
आपको बता दें कि सोमवार को AAP की चुनाव समिति की बैठक हुई थी. नतीजा निकला कि जनता ने सरकार बनाने का जनादेश नहीं दिया इसलिए विपक्ष की भूमिका निभाई जाए. मनीष सिसोदिया ने कहा कि पार्टी ने तय किया है कि हम विपक्ष में बैठेंगे. किसी से समर्थन न लेना है और न देना है. ऐसे में दोबारा चुनाव के अलावा कोई विकल्प नहीं है.
बयान पर प्रशांत भूषण की सफाई
विवाद को बढ़ता देख प्रशांत भूषण ने भी अपने बयान पर सफाई दी. न्यूज चैनल CNN-IBN के मुताबिक प्रशांत भूषण ने कहा कि बीजेपी को समर्थन देने का सवाल ही नहीं उठता. इस वरिष्ठ वकील ने कहा, 'मैं एक संभावना आधारित सवाल का जवाब दे रहा था. हमें पहले से पता है कि बीजेपी कभी AAP की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकती. बीजेपी कभी भी दिल्ली के वोटरों को AAP द्वारा किए गए वादों को पूरा नहीं कर सकती इसलिए समर्थन देने का सवाल ही नहीं.'