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नीतीश हमारे साथ थे तभी बिहार का विकास हुआः अमित शाह

प्रतिष्ठा का सवाल बने बिहार विधानसभा चुनाव में पूरी ताकत झोंक चुकी बीजेपी के निशाने पर मुख्य रुप से लालू प्रसाद यादव हैं. दस साल के शासन के बावजूद लोकप्रियता में काफी आगे चल रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर बीजेपी प्रत्यक्ष हमला करने से परहेज कर रही है. लेकिन लालू-राबड़ी राज के 15 साल और नीतीश के 10 साल को जोड़कर बीजेपी 25 साल के कुशासन से मुक्ति की अपील चुनावी सभाओं में लगातार कर रही है. तो क्या नीतीश के साथ सात साल सत्ता में रही बीजेपी अपने कार्यकाल को नजरंदाज कर रही है.

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भाजपा अध्यक्ष अमित शाह
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह

प्रतिष्ठा का सवाल बने बिहार विधानसभा चुनाव में पूरी ताकत झोंक चुकी बीजेपी के निशाने पर मुख्य रुप से लालू प्रसाद यादव हैं. दस साल के शासन के बावजूद लोकप्रियता में काफी आगे चल रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर बीजेपी प्रत्यक्ष हमला करने से परहेज कर रही है. लेकिन लालू-राबड़ी राज के 15 साल और नीतीश के 10 साल को जोड़कर बीजेपी 25 साल के कुशासन से मुक्ति की अपील चुनावी सभाओं में लगातार कर रही है. तो क्या नीतीश के साथ सात साल सत्ता में रही बीजेपी अपने कार्यकाल को नजरंदाज कर रही है.

इंडिया टुडे के साथ विशेष इंटरव्यू में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का मानना है कि कोई भी सरकार हो, उसकी ज्यादातर बातें सरकार के मुखिया पर निर्भर करती है. लेकिन नीतीश राज में विकास का श्रेय वे बीजेपी के सात साल साथ रहने को देते हैं. शाह कहते हैं, “बीजेपी जब तक बिहार की सत्ता में रही तभी तक विकास हुआ. अगर आप बीजेपी के हटने के बाद के दो साल के आंकड़े निकाल कर देख लीजिए, विकास में लगभग 40 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई है तो अपराध की दर में 82 फीसदी बढोतरी.”

नीतीश पर असमंजस

नीतीश से ज्यादा लालू पर हमला करने के मुद्दे को शाह मीडिया की नासमझी करार देते हैं. क्या नीतीश की छवि की वजह से बीजेपी का मुद्दा नहीं चल पाता, इसलिए लालू पर ज्यादा हमले कर रही है पार्टी? इस सवाल के जवाब में शाह कहते हैं, “ हमें लगता है कि मीडिया या तो हमारी बातों को समझ नहीं पाया या समझकर भी समझना नहीं चाहता. हमारा मुद्दा यही है कि नीतीश जब लालू के साथ जाते हैं तो विकास नहीं हो सकता. लालू के साथ नीतीश कुमार अगर विकास कर सकते थे अलग क्यों हुए. पहले तो दोनों ही साथ थे, लेकिन जंगलराज की वजह से अलग हुए. आज क्या हो रहा है, क्या परिवर्तन आ गया है. सिर्फ सत्ता प्राप्त करने के लिए जरुरत है.

क्या यह सिद्धांतों की राजनीति है?”  शाह कहते हैं कि एक कंधे पर लालू का अपराध और जंगलराज और दूसरे कंधे पर कांग्रेस का 12 लाख करोड़ रु. का भ्रष्टाचार को लेकर नीतीश अगर विकास की बात करते हैं तो वह बहुत खोखली नजर आएगी और कोई मानेगा नहीं. बिहार में आज यही जनता महसूस कर रही है. जबकि स्वाभाविक रुप से बीजेपी के बारे में उसका अच्छा ट्रैक रिकार्ड है. मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, राजस्थान, गोवा, महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड में जीते. एक साल पहले इज आफ डूइंग बिजनेस सूचकांक में झारखंड का स्थान 29वां था, बिहार 27वें नंबर पर था लेकिन एक साल में ही हम तीसरे नंबर पर आ गए और बिहार वहीं हैं. ये बताता है कि बीजेपी का विकास का क्या ट्रैक रिकार्ड है.

शाह ने इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में आरक्षण, गोमांस, दादरी की घटना से बिहार चुनाव में ध्रुवीकरण, मोदी सरकार के कामकाज, नौकरशाही के हावी होने, कालाधन और संगठन से जुड़े तमाम सवालों के जवाब दिए. पूरी बातचीत के लिए इंडिया टुडे के आगामी अंक की प्रतीक्षा करें.

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