बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बिहार यात्रा के दौरान दिए गए DNA वाले बयान पर आड़े हाथों लिया है. नीतीश कुमार ने पीएम मोदी को एक खुली चिट्ठी लिखा है. इस पत्र में उन्होंने कहा कि जनसभा में जो आपने बयान दिया था, उससे बिहार के लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंची है.
गौरतलब है कि मोदी ने पिछले दिनों बिहार यात्रा के दौरान अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने कहा था कि नीतीश कुमार के डीएनए में गड़बड़ी है. इसी बयान को लेकर नीतीश कुमार ने मोदी को जमकर निशाना साधा है. उन्होंने पत्र में लिखा, 'आपके इस बयान से बिहार और बाहर रहने वाले लोगों के सम्मान को धक्का लगा है.'
पढ़ें, पीएम मोदी के नाम नीतीश कुमार का खुला खत-
माननीय मोदी जी,
कुछ दिनों पहले बिहार में एक जनसभा को संबोधित करते हुए आपने मेरे डीएनए पर जो टिप्पणी की, उससे मुझे और समाज के एक बड़े तबके को गहरी ठेस पहुँची है. मेरा मानना है कि आपके इन शब्दों से न सिर्फ बिहार बल्कि बिहार से बाहर रहने वाले लोगों ने भी खुद को अपमानित महसूस किया है. आप कुछ दिनों में फिर बिहार आने वाले हैं. मैं आपको उन सभी लोगों की ओर से यह पत्र लिख रहा हूँ जो आपकी इस टिप्पणी से आहत हुए हैं. यह आम विचार है कि आपके द्वारा की गयी यह टिप्पणी आपके पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है.
लेकिन, ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि हम लोगों पर इस तरह की टिप्पणी की गयी हो. इसके पहले भी आपके साथी और भाजपा नेता श्री नितिन गडकरी जी ने कहा था कि “जातिवाद बिहार के डीएनए में है”. मोदी जी, यह एक विडम्बना ही है कि पिछले ही साल इन्हीं बिहारवासियों ने आप पर विश्वास करते हुए आपकी अगुवाई में बहुमत की सरकार बनाने में महत्वपूर्ण योगदान किया था. यह वही राज्य है जहाँ मानव सभ्यता फली-फूली. इस धरती ने इतिहास की अनेक महान विभूतियों को जन्म दिया है. मेरा मानना है कि इस तरह के वक्तव्यों से जनता के मन में आपके नेतृत्व के प्रति विश्वास में कमी आयी है.
मैं बिहार का बेटा हूँ. इस लहजे से मेरा और बिहार के लोगों का डीएनए एक जैसा ही है. मोदी जी, आप जानते हैं कि मेरे पिता एक स्वतंत्रता सेनानी थे और माँ एक सामान्य गृहिणी. मैं बिहार के ग्रामीण परिवेश के एक साधारण परिवार में पला-बढ़ा हूँ. चालीस वर्षों के राजनैतिक जीवन में मैंने गाँधी, लोहिया, जेपी के आदर्शों पर चलने का प्रयत्न किया है और अपनी क्षमता के अनुसार जनता के हित के लिए काम किया है. हमारा यह मानना है कि आपके वक्तव्य ने मेरे वंश पर सवाल तो उठाया ही है, साथ ही, बिहार की विरासत और बिहारी अस्मिता को भी ठेस पहुँचाई है. इस तरह के वक्तव्य इस धारणा को भी बल देते हैं कि आप और आपकी पार्टी हम बिहारवासियों के प्रति पूर्वाग्रह से ग्रसित हैं. मुझे आश्चर्य होता है कि आपके सचेत विवेक ने इन वक्तव्यों की गंभीरता को कैसे नहीं समझा?
अतः इस पत्र के माध्यम से मेरा आपसे यह अनुरोध है कि आप अपने शब्दों को वापस लेने पर विचार करें. मुझे पूरा विश्वास है कि ऐसा करने से लोगों की आहत भावनाओं को राहत मिलेगी. जिससे आपके प्रति न सिर्फ उनका सम्मान बढ़ेगा, बल्कि उनकी नजरों में आपका कद और भी ऊँचा हो जायेगा.
आपका,
नीतीश कुमार