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साबिर अली के मानहानि केस में नकवी को समन

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी को दिल्ली की एक कोर्ट ने आरोपी के रूप में समन भेजा है. नकवी के खिलाफ जदयू के पूर्व नेता साबिर अली ने मानहानि की शिकायत की थी. नकवी ने कथित तौर पर साबिर अली को इंडियन मुजाहिद्दीन के सह-संस्थापक यासीन भटकल से संबंधित बताया था.

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मुख्‍तार अब्‍बास नकवी
मुख्‍तार अब्‍बास नकवी

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी को दिल्ली की एक कोर्ट ने आरोपी के रूप में समन भेजा है. नकवी के खिलाफ जदयू के पूर्व नेता साबिर अली ने मानहानि की शिकायत की थी. नकवी ने कथित तौर पर साबिर अली को इंडियन मुजाहिद्दीन के सह-संस्थापक यासीन भटकल से संबंधित बताया था.

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मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट आकाश जैन ने कहा कि प्रथम दृष्ट्या नकवी पर राज्यसभा के वर्तमान सदस्य अली की मानहानि के आरोप को ध्यान में रखते हुए नकवी के खिलाफ कार्रवाई के पर्याप्त सबूत और आधार थे. अदालत ने नकवी को 9 जुलाई को पेश होने के लिए समन भेजा है. नकवी भी राज्यसभा के वर्तमान सांसद हैं. अदालत ने कहा कि यह कानून की सुविचारित व्यवस्था है कि किसी व्यक्ति को आरोपी के रूप में समन भेजने के लिए यह देखा जाए कि मामला बनता भी है या नहीं. यह अदालत इस बात से संतुष्ट है कि शिकायतकर्ता प्रथम दृष्ट्या यह स्थापित करने में सफल रहे हैं कि आरोपी ने ट्वीट के रूप में शिकायतकर्ता के खिलाफ सोशल नेटवर्किंग साइट पर लांछन लगाए ताकि शिकायतकर्ता की छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके.

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अदालत ने कहा कि आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 500 (मानहानि) के अपराध के मामले में कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त आधार है, इसलिए आरोपी को धारा 500 के तहत 9 जुलाई 2014 को समन किया गया है. अली ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि नकवी ने मार्च में उन्हें आतंकी भटकल का दोस्त कहा था और यह कहानी भारत और विदेश में सोशल मीडिया, अखबारों और चैनलों के माध्यम से छपी और प्रसारित हुई.

शिकायत में आरोप लगाया गया कि 28 मार्च 2014 की शाम को कुछ मीडियाकर्मियों के जरिए शिकायतकर्ता को आरोपी का ट्वीट दिखा. इसमें लिखा था कि आतंकी भटकल का दोस्त बजेपी में शामिल हुआ, जल्दी ही दाउद को भी स्वीकार कर लिया जाएगा. नकवी के इस ट्वीट के बाद 29 मार्च को बीजेपी ने अली की सदस्यता रद्द कर दी थी. साबिर अली ने कहा था कि वह आरोपी के ट्वीट से बुरी तरह आहत और स्तब्ध हुए जो कि बड़े राष्ट्रीय दैनिक अखबारों के 29 और 30 मार्च के अंकों में प्रमुखता से प्रकाशित हुई.

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