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नीतीश-BJP के अलग होने के बाद बिहार में बढ़े सांप्रदायिक झगड़े

बिहार में जब से नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू और बीजेपी के रास्ते जुदा हुए हैं, प्रदेश में सांप्रदायिक संघर्ष की घटनाओं में तेजी आई है. अंग्रेजी अखबार 'द इंडियन एक्सप्रेस' की खबर के मुताबिक:

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सुशील मोदी, नीतीश कुमार
सुशील मोदी, नीतीश कुमार

बिहार में जब से नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू और बीजेपी के रास्ते जुदा हुए हैं, प्रदेश में सांप्रदायिक संघर्ष की घटनाओं में तेजी आई है. अंग्रेजी अखबार 'द इंडियन एक्सप्रेस' की खबर के मुताबिक:

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1. जनवरी 2010 से लेकर पिछले साढ़े तीन साल में जब बीजेपी-जेडीयू की गठबंधन सरकार सत्ता में थी, बिहार में कुल 226 सांप्रदायिक झगड़े हुए. लेकिन जून 2013 में नीतीश ने बीजेपी से नाता तोड़ लिया और तब से लेकर जुलाई 2015 तक बिहार में 667 सांप्रदायिक संघर्ष की घटनाएं हो चुकी हैं.

2. अखबार ने 38 जिलों के पुलिस रिकॉर्ड खंगालकर यह आंकड़े सामने रखे हैं. इनमें से 70 फीसदी संघर्ष की घटनाएं 18 जिलों में हुईं.

3. घटनाओं के कारणों पर नजर डालें तो लगता है कि ज्यादातर संघर्षों को जान-बूझकर हवा दी गई. ज्यादातर घटनाएं धार्मिक स्थलों पर मृत जानवरों के अवशेष (मस्जिद के पास सुअर, मंदिर के पास गाय) पाए जाने की वजह से हुईं.

4. कई घटनाएं इसलिए हुईं क्योंकि किसी धार्मिक जुलूस के मुस्लिम इलाके से गुजरने के दौरान कथित तौर पर भड़काऊ नारेबाजी की गई. साथ ही कई बार सामान्य घटनाओं, जैसे क्रिकेट मैच के दौरान हुए झगड़े ने भी सांप्रदायिक रूप ले लिया.

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5. जून 2015 से जुलाई 2015 में सबसे ज्यादा सांप्रदायिक संघर्ष गया में हुए. यहां ऐसी 39 घटनाएं हुईं. इसके बाद मुजफ्फरपुर (35), बेतिया (33), सीवान (33) और दरभंगा (32) का नंबर आता है.

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