बीजेपी नेता शत्रुघ्न सिन्हा ने संकेतों में अपनी ही पार्टी के खिलाफ बयान दिया है. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार को सिर्फ 13 महीने में नजर लग गई है. बिना नाम लिए उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को मेरी लोकप्रियता से जलन है.
बीजेपी पर लग रहे भ्रष्टाचार के आरोपों पर उन्होंने कहा, 'हमारी सरकार को नजर लग गई है.' इसके अलावा शत्रुघ्न ने कई मामलों पर अपनी बेबाक राय रखी. खुद को मंत्री पद न दिए जाने पर उन्होंने कहा, 'मुझे मंत्रालय नहीं दिया गया है. मैं उम्मीद करता हूं कि ऐसा किसी सजा के तहत न किया गया हो.'
घर को ठीक करने का दिया संकेत
बॉलीवुड के 'बिहारी बाबू' रहे शत्रुघ्न बिहार की राजनीति पर भी बोले. नीतीश और लालू के गठबंधन पर उन्होंने कहा, 'हर किसी को अपने गठबंधन और साथी चुनने का हक है. सबकी परीक्षा होनी बाकी है. बिहार की राजनीति जाति आधारित है. हमने इसे चुनौती की तरह लिया है. हालांकि समय बहुत कम बचा है लेकिन हम अपने घर को ठीक करके काफी कुछ कर सकते हैं.'
उन्होंने साफ किया कि वह मुख्यमंत्री पद की दौड़ में नहीं है. उन्होंने कहा, 'मेरी इच्छा और उम्मीद मुख्यमंत्री बनने की नहीं है. बस यही चाहता हूं कि जो भी सीएम बने, वह प्रदेश को आगे ले जाए.'
'सोनाक्षी की नहीं राजनीति में रुचि'
शत्रुघ्न से पूछा गया कि उनकी राजनीतिक विरासत को कौन आगे बढ़ाएगा. इस पर उन्होंने कहा, 'हम यह फैसला किसी पर थोपेंगे नहीं. अगर मेरे बेटों लव और कुश का इस ओर रुझान होगा तो मैं उनकी मदद जरूर करूंगा. सोनाक्षी की इसमें दिलचस्पी नहीं है.'
शत्रुघ्न ने ललित मोदी के मामले पर सीधी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा, 'यह बात करने का सही समय नहीं है. यह संवेदनशील मुद्दा है. हमारी पार्टी के नेता इसे हल करने की कोशिश कर रहे हैं. मैं इस मुद्दे पर बाद में बोलूंगा, अभी नहीं.'
हेमा का किया बचाव
दौसा सड़क हादसे मामले में उन्होंने हेमा मालिनी का बचाव किया. उन्होंने कहा, 'वह बहुत अच्छी और विनम्र महिला हैं. ऐसी परिस्थितियों में कई बार इंसान को तनाव हो जाता है. उन्होंने (ट्विटर पर) पूरी दुनिया को ट्रैफिक नियमों का पालन करने का संदेश दिया है. वह इन चीजों को लेकर काफी सतर्क रहती हैं. कई बार उन्होंने मुझे सीट बेल्ट बांधने के लिए कहा है.'
एफटीआईआई विवाद पर उन्होंने कहा, 'कई लोगों ने एफटीआईआई का हेड बनने की इच्छा जताई है. मैं मामले को पूरी तरह समझने की कोशिश कर रहा हूं. मुझसे न ही छात्रों ने संपर्क किया है और न ही सरकार ने इस बारे में बोलने के लिए मुझे अधिकृत किया है. हालांकि वे चाहते हैं कि मैं अंतरिम रूप से जिम्मेदारी संभाल लूं. मैं उनकी मदद करने और अपना योगदान देने को तैयार हूं.'