पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की नेता महबूबा मुफ्ती ने नीतीश कुमार और अब्दुल्ला पिता-पुत्र जैसे नेताओं के सेक्युलर होने पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि अपने फायदे के लिए ये लोग एनडीए सरकार का हिस्सा बन गए थे. महबूबा ने देश में कई राजनीतिक दलों के सेक्युलर चरित्र पर सवाल खड़े किए.
उन्होंने कहा कि गुजरात सहित देश के कई हिस्सों में हुए साम्प्रदायिक दंगों पर काफी राजनीति हो रही है. महबूबा ने कहा कि नरेन्द्र मोदी अगर प्रधानमंत्री बनते हैं तो कश्मीर मुद्दे पर वह अटल बिहारी वाजपेयी के पदचिन्हों पर ही चलेंगे.
'मेल टुडे' से खास बातचीत में महबूबा ने कहा कि फारूक अब्दुल्ला-उमर अब्दुल्ला, नीतीश कुमार और उन जैसे अन्य लोगों को फायदा दिखा तो वे एनडीए में घुस गए. उन्होंने वहां सत्ता का सुख प्राप्त किया और उसके बाद एनडीए छोड़कर चले गए. उन्होंने बीजेपी को साम्प्रदायिक दल घोषित कर दिया. क्या उनके किसी दल से जुड़ने से यह तय होगा कि कम्युनल कौन है और सेक्युलर कौन? मुजफ्फरनगर दंगों के बाद क्या किसी ने इस्तीफा दिया? या फिर 1984 के सिख दंगों के बाद किसी ने पद छोड़ा? वे दंगों के मामले में इतने सेलेक्टिव क्यों हो जाते हैं?
उन्होंने कहा कि कई वर्षों से दंगे हो रहे हैं. लेकिन किसी चीफ मिनिस्टर ने इस्तीफा नहीं दिया. उन्होंने कहा कि अगर राज्य के प्रमुख का दंगों में हाथ न भी हो तो उसमें उन दंगों के लिए माफी मांगने का साहस होना ही चाहिए, बेशक उसका हाथ उनमें न हो क्योंकि वह उनकी रक्षा के लिए ही उस पद पर है. मोदी को भी गुजरात दंगों के लिए माफी मांगनी चाहिए.
उन्होंने कहा कि कांग्रेस को दंगों के बारे में तो बात भी नहीं करनी चाहिए क्योंकि वह एंटी कम्युनल बिल संसद से पास भी नहीं करवा पाई. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने मोदी को रोकने के लिए साम्प्रदायिकता का कार्ड खेला. दरअसल यूपीए का प्रदर्शन ही इतना घटिया था कि उससे देश में दंगे बढ़े.
महबूबा का कहना था कि कांग्रेस ने मोदी को सत्ता में आने से रोकने के लिए एक अभियान चलाया लेकिन यूपीए की अक्षमता, भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था में गिरावट वगैरह ने मोदी को मजबूत बनाने में मदद की.
उन्होंने कहा कि अफज़ल गुरू फांसी पाए लोगों में 29 वें नंबर पर था. उसके पहले बेअंत सिंह का हत्यारा था और राजीव गांधी के हत्यारे थे. लेकिन उनके पहले यूपीए सरकार ने गुरू को फांसी पर लटका दिया ताकि साम्प्रदायिक कार्ड खेला जा सके और मोदी को रोका जा सके लेकिन वह उसमें बुरी तरह असफल हुई. यूपीए ने सोचा कि एक कश्मीरी मुसलमान को फांसी पर लटका कर वह मोदी को रोक लेगी लेकिन वह उसमें सफल नहीं हुई. इससे जम्मू-कश्मीर के लोग और अलग-थलग हो गए.
महबूबा मुफ्ती को मोदी से काफी उम्मीदें हैं. मोदी ने कहा है कि वह कश्मीर पर वाजपेयी जी की नीतियों का अनुसरण करेंगे. यह स्वागत योग्य वक्तव्य है. हमें इसके लिए इंतज़ार करना होगा और देखना होगा कि वह क्या करते हैं. लेकिन सत्ता में आने के बाद बीजेपी में इतना साहस होना चाहिए कि वह कुछ बड़े और गैर परंपरागत कदम उठाए.