'तुम मुझे यूं भुला न पाओगे, जब कभी भी सुनोगे गीत मेरे, संग संग गुन गुनाओगे...' यह अमर गीत मोहम्मद रफी ने गाया है. अब जो कोई भी उनके बेटे शाहिद रफी से बात करने के लिए फोन मिलाता है, तो कॉलर ट्यून में यह गाना सुनकर सम्मोहित हो जाता है. रफी के बेटे विधानसभा चुनाव में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं.
इन दिनों ऐसे बहुत से लोग हैं, जो शाहिद को हर रोज फोन करते हैं, क्योंकि वह महाराष्ट्र चुनाव में मुंबादेवी विधानसभा क्षेत्र से हैदराबाद की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं.
AIMIM पर सांप्रदायिक राजनीति करने के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन उसे भरोसा है कि पार्टी राज्य विधानसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करेगी. दक्षिण मुंबई के इस विधानसभा क्षेत्र में करीब 60 फीसदी मुस्लिम आबादी है. शाहिद के लिए यह राहत की बात है कि लोग उनसे उनके पिता का अमर गाना सुनाने की फरमाइश नहीं करते.
शाहिद ने कहा, 'राजनीति को लेकर लोग काफी परिपक्व हो चुके हैं. जब मैं बोलता हूं, तो वे धैर्यपूर्वक सुनते हैं. लोगों की प्रतिक्रिया बहुत ही सकारात्मक है और मैं इससे काफी अभिभूत हूं. चुनाव परिणाम क्या होगा यह मैं नहीं जानता. इसे मैं ऊपरवाले पर छोड़ता हूं.'
पार्टी के एक पदाधिकारी ने बताया कि समय बीतता जा रहा है और शाहिद के पास लोगों से बातचीत के लिए समय काफी कम है. यह विधानसभा क्षेत्र काफी घना है और भीड़-भाड़ वाला है. शाहिद और AIMIM का लक्ष्य है कि यहां के लोगों का जीवन स्तर बेहतर हो, लेकिन यह सब चुनाव परिणाम और जीत पर भी ही निर्भर है.
शाहिद की दिनचर्या इन दिनों सुबह से लेकर रात तक काफी व्यस्त रहती है. तंग गलियों में लोगों से मिलने से लेकर पार्टी के अन्य कार्यकर्ताओं के साथ बैठक तक. यह साउंड प्रूफ रिकार्डिंग स्टूडियो से पूरी तरह अलग है. शाहिद ने कहा कि जब वह हैदराबाद गए और AIMIM का काम देखा, तो वह इससे जुड़ने और महाराष्ट्र में इसके काम को आगे बढ़ाने के प्रति इच्छुक हुए.
मुंबादेबी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने के सवाल पर शाहिद ने कहा कि उनके पिता राष्ट्रीय या कहें अंतरराष्ट्रीय व्यक्तित्व थे. उन्होंने कहा, 'मुझे बांद्रा और मुंबादेवी में जिस तरह से लोगों का समर्थन मिल रहा है, वैसा देश के किसी अन्य हिस्से से भी मिलता, क्योंकि मेरे पिता के गाए गानों का असर लोगों के दिलो-दिमाग पर है.'