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खींवसर उपचुनाव: क्या बच पाएगा हनुमान का किला? BJP और कांग्रेस ने बढ़ाई मुश्किल

राजस्थान में हनुमान बेनीवाल के साथ कांग्रेस का इंडिया गठबंधन टूट गया. माना जा रहा है कि राजस्थान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के नेता हनुमान बेनीवाल के बीच इस बात को लेकर वर्चस्व है कि जाटों का बड़ा नेता कौन है.

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खींवसर उपचुनाव (फाइल तस्वीर)
खींवसर उपचुनाव (फाइल तस्वीर)

राजस्थान (Rajasthan) के खींवसर उपचुनाव में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के नेता हनुमान बेनीवाल अपनी जिंदगी के सबसे कठिन चुनावी रण में हैं. हनुमान बेनीवाल की पत्नी कनिका बेनीवाल आरएलपी से चुनाव लड़ रही हैं, तो बीजेपी से हनुमान बेनीवाल के साथी रहे रेवतराम डांगा फिर से बीजेपी की तरफ से मैदान में हैं. कांग्रेस ने इंडिया ब्लॉक तोड़ते हुए अपने पुराने प्रत्याशी सवाई सिंह चौधरी की पत्नी डाक्टर रतन सिंह को चुनाव में उतारा है. उम्मीदवार कोई भी हो मगर असल मुकाबला तो हनुमान बेनीवाल और उनसे लगातार हारते ज्योति मिर्धा के बीच हो रहा है. बीजेपी ने हर बार हनुमान विरोधी राजपूत वोट काटने वाले दुर्ग सिंह चौहान को अपनी पार्टी में शामिल कर हनुमान बेनीवाल की मुश्किलें बढ़ा दी हैं.

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खींवसर विधानसभा सीट, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी की राजधानी भी कही जाती है. इस सीट पर 2008 से लेकर आज तक हनुमान बेनीवाल का मुकाबला कोई भी पार्टी नहीं कर पाई है. इस सीट पर हनुमान बेनीवाल ही लगातार जीत रहे हैं. हनुमान बेनीवाल ने 2008 में बीजेपी प्रत्याशी के रूप मैं खींवसर सीट जीते. उसके बाद वसुंधरा राजे और राजेंद्र राठौड़ पर विवादित बयान देने के कारण हनुमान बेनीवाल को पहले पार्टी ने निलंबित किया, उसके बाद उनको निष्कासित किया. उसके बाद निर्दलीय चुनाव जीते और फिर 2018 में अपनी ही पार्टी के सिंबल से चुनाव लड़े. 

2019 में भारतीय जनता पार्टी से गठबंधन करके सांसद बने तो उपचुनाव में भाई नारायण बेनीवाल को खींवसर का विधायक बनाया. साल 2023 में भाई की जगह खुद लड़े मगर इस बार महज 2000 वोटों से जीते और 100 से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ रही आरएलपी कहीं नहीं जीत पाईस़, तो कांग्रेस पार्टी से गठबंधन करके एक बार फिर सांसद बन गए. इस बार खाली हुई सीट पर भाई की जगह अपनी पत्नी कनिका बेनीवाल को उतारा है.

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क्यों टूटा इंडिया ब्लॉक?

राजस्थान में हनुमान बेनीवाल के साथ कांग्रेस का इंडिया गठबंधन टूट गया. माना जा रहा है कि राजस्थान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के नेता हनुमान बेनीवाल के बीच इस बात को लेकर वर्चस्व है कि जाटों का बड़ा नेता कौन है. हनुमान बेनीवाल कांग्रेस के दिल्ली के नेताओं के संपर्क में ज्यादा रहते थे और कभी-कभी गोविंद सिंह डोटासरा पर कटाक्ष किया करते थे. लिहाजा इस बार गोविंद सिंह डोटासरा बेनीवाल से गठबंधन तोड़ने पर अड़ गए और चुप-चाप बीजेपी की नेता ज्योति मिर्धा के करीबी जाट नेता सवाई सिंह चौधरी की पत्नी डॉक्टर रतन चौधरी को टिकट देकर हनुमान बेनीवाल का रास्ता मुश्किल कर दिया है.

यह भी पढ़ें: खींवसर में RLP के हनुमान बेनीवाल का दबदबा कायम, 2 हजार के अंतर से कांग्रेस प्रत्याशी को हराया

विधानसभा चुनाव में हो चुका है कड़ा मुकाबला

खींवसर विधानसभा सीट पर तीसरे मोर्चे यानी आरएलपी पार्टी से बागी बीजेपी प्रत्याशी रेवत राम डांगा मैदान में आ गए और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के सुप्रीमो को कड़ी टक्कर दी थी. राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के प्रत्याशी हनुमान बेनीवाल को 79492 वोट मिले, जबकि बीजेपी प्रत्याशी रेवंतराम डांगा को 77433 मिले. वहीं, कांग्रेस प्रत्याशी तेजपाल मिर्धा को 27763 वोट मिले थे. निर्दलीय प्रत्याशी दुर्ग सिंह को 15877 और अभिनव राजस्थान पार्टी के प्रत्याशी डॉ अशोक चौधरी को 4357 वोट मिले. बीएसपी प्रत्याशी नेमाराम को 1155 और निंबाराम को 1159 वोट मिले. विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी और आजाद समाज पार्टी के गठबंधन की वजह से हनुमान बेनीवाल 2059 वोटों से चुनाव जीत गए.

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बागी बड़ा फैक्टर, जाट और मेघवाल 

इस बार बीजेपी ने अपने सभी बागियों को बैठा लिया है, जिससे बेनीवाल विरोधी वोट बंटे नहीं. यहां पर हनुमान बेनीवाल के पक्ष के वोट हैं और दूसरे हनुमान बेनीवाल के विपक्ष वोट हैं, इसलिए हनुमान बेनीवाल की पार्टी के कमजोर होने की आशंका है. कांग्रेस प्रत्याशी जितने ज्यादा वोट तोड़ेंगे, हनुमान बेनीवाल को फायदा होगा. 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी की पूर्व सांसद डॉक्टर ज्योति मिर्धा ने अपने समर्थकों के साथ बीजेपी ज्वाइन कर ली थी. आज ज्योति मिर्धा के समर्थक पूर्व आईपीएससवाई सिंह चौधरी की पत्नी कांग्रेस से प्रत्याशी बनकर सामने आई हैं. अगर बीजेपी में पार्टी अंदर से घात को रोकने में सफल होती है, तो पहली बार बीजेपी के लिए यह सीट आसान हो जाएगी.

बेनीवाल का रहा है दबदबा

2008 में हनुमान बेनीवाल बीजेपी के टिकट पर 58760 वोटों से जीते थे. बीएसपी प्रत्याशी दुर्ग सिंह को 34317 और इंडियननेशनल कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी सहदेव को 17150 वोट मिले थे. हनुमान बेनीवाल ने 2008 में भारतीय जनता पार्टी से चुनाव जीतने के बाद से ही वसुंधरा राजे और राजेंद्र राठौड़ से मतभेदों के चलते इस्तीफा दे दिया. इस्तीफा देने के बाद उन्होंने नागौर, बाड़मेर, बीकानेर, सीकर, जयपुर में पांच किसान हुंकार रैलियों का सफलतापूर्वक आयोजन किया. 

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फिर हनुमान बेनीवाल ने 2013 विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को मात देते हुए 65399 वोटों से निर्दलीय चुनाव जीते थे. बीजेपी के प्रत्याशी भागीरथ को 28510 वोट मिले थे. बसपा प्रत्याशी दुर्ग सिंह को 42379 वोट मिले थे. कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी राजेंद्र को 9257 वोट मिले थे.

2018 के चुनाव में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के प्रत्याशी हनुमान बेनीवाल ने 86096 वोट  मिले थे. कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी सवाई सिंह चौधरी को 66148 वोट मिले, तो वहीं बीजेपी के प्रत्याशी रामचंद्र उत्तरा को 26809 वोट मिले थे. निर्दलीय प्रत्याशी डॉक्टर अनीता को 2279 वोट मिले, इंदिरा बीएसडी को 2230 वोट मिले थे.

2018 के विधानसभा सीट पर हनुमान बेनीवाल जीते थे, उसके बाद सांसद बने तो सीट खाली हुई. लोकसभा चुनाव में बीजेपी से गठबंधन करके नागौर के सांसद बन गए. उसके बाद भारतीय जनता पार्टी ने खींवसर की सीट छोड़ दी थी और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के प्रत्याशी उनके छोटे भाई नारायण बेनीवाल ने कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी हरेंद्र मिर्धा को 4500 वोटों से हराया.

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2023 का विधानसभा चुनाव

खींवसर विधानसभा सीट पर आरएलपी पार्टी से बागी बीजेपी प्रत्याशी बनकर रेवत राम डांगा मैदान में आ गए और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के सुप्रीमो को कड़ी टक्कर दी थी. राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के प्रत्याशी हनुमान बेनीवाल को 79492 वोट मिले, जबकि बीजेपी प्रत्याशी रेवंतराम डांगा को 77433 मिले. वहीं, कांग्रेस प्रत्याशी तेजपाल मिर्धा 27763 वोट मिले. निर्दलीय प्रत्याशी दुर्ग सिंह को 15877 और अभिनव राजस्थान पार्टी के प्रत्याशी डॉ अशोक चौधरी को 4357 वोट मिले. विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी और आजाद समाज पार्टी के गठबंधन की वजह से हनुमान बेनीवाल 2059 वोटों से चुनाव जीत गए.

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2024 में फिर उपचुनाव 

2024 के उपचुनाव में बीजेपी ने विधानसभा चुनाव में हारे हुए प्रत्याशी पर फिर के बार दांव खेला है औप राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के प्रत्याशी कनिका बेनीवाल के सामने अपने उम्मीदवार को मैदान में उतार दिया है. वहीं, कांग्रेस प्रत्याशी डॉक्टर रतन चौधरी भी मैदान में है. अगर तीनों पार्टियों में बड़ा नेता माना जाए तो कनिका बेनीवाल  हैं. खींवसर विधानसभा उपचुनाव में तीनों ही जाट नेता हैं और जाट नेता होने की वजह से तीनों में से मजबूत प्रत्याशी कनिका बेनीवाल हैं.

खींवसर में कुल 2 लाख 86 हजार 224 वोटर हैं, जिसमें पुरुष मतदाता 1 लाख 49 हजार 330 और 1 लाख 68 हजार 894 महिला मतदाता हैं. इसके अलावा, सीनियर सिटीजन 3123, युवा 6177 और PWD 2677 हैं. अगर लिंगानुपात की बात की जाए तो इसकी तादाद 917 है.

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खींवसर में जातीय समीकरण

  • जाट- 78601
  • मेघवाल- 33671
  • राजपूत- 35749
  • मुस्लिम- 11210
  • कुम्हार/प्रजापति- 10970
  • ब्राह्मण- 11823
  • नाईक- 10252
  • बावरी- 10001
  • सुथार- 10367
  • साध/राव- 9000
  • विश्नोई- 6286
  • देवासी- 5993
  • माली- 5246
  • गुर्जर- 4810
  • लुहार- 3394
  • राजपुरोहित- 3829
  • नाई- 3745
  • रावणा- 4173
  • हरिजन- 2529
  • स्वामी- 2155
  • सुनार- 1903
  • हिन्दू तेली- 2188
  • दर्जी- 1625
  • रैगर- 1543
  • धोली/ढाड़ी- 1441
  • बनिया- 1393
  • चारण- 1876
  • सिद्ध- 1045
  • बेलदार/खटीक- 1000
  • जोगी/बगारिया- 909
  • भार्गव/आचार्य- 726
  • सांसी/साटीया- 591
  • नाथ /भोपा- 534
  • गवारिया /बंजारा- 518
  • लखारा- 475
  • नट/भांड- 378
  • अन्य- 323

उपचुनाव के बीच कांग्रेस को झटका

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खींवसर उपचुनाव में अपना अस्तित्व बचाने की लड़ाई लड़ रही कांग्रेस को बीजेपी ने फिर झटका दिया है. बीजेपी की बड़ी नेता ज्योति मिर्धा कांग्रेस नेता पूर्व जिला अध्यक्ष सुखवीर सिंह चौधरी करीब एक दर्जन नेताओं को जयपुर बीजेपी मुख्यालय लेकर पहुंची, जहां प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने सबको बीजेपी का दुपट्टा पहनाकर बीजेपी में शामिल किया.

इस दौरान मदन राठौड़ बोले कि नागौर के कांग्रेस पार्टी के दो बार जिला अध्यक्ष रहे सुखबीर सिंह चौधरी 20 सूत्रीय कार्यक्रम उपाध्यक्ष भी रहे हैं. आज इनका कांग्रेस पार्टी से मोह भंग हो गया और इन्होंने भाजपा की रीति नीति को समझा. इसमें भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश उपाध्यक्ष ज्योति मिर्धा का पूरा सहयोग रहा सुखबीर सिंह चौधरी के साथ लादूराम कुंदन जो पहले पंचायत समिति सदस्य रहे हैं. मनमोहन चौधरी, युवा कांग्रेस अध्यक्ष विजेंद्र चौधरी, युवा कांग्रेस नेता भीम सिंह, गॉड पंचायत समिति सदस्य वर्जर राम चौधरी, पंचायत समिति सदस्य दिनेश वैष्णव, श्रवण बिश्नोई, सुखराम बिश्नोई, सुखवीर प्रजापत, अमराराम जाजड़ा, आदुराम लेगा सहित कई सरपंचों और पूर्व सरपंचों ने आज भारतीय जनता पार्टी ज्वाइन की है.

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इससे पहले ज्योति मिर्धा ने नागौर के कांग्रेस नेता दुर्ग सिंह चौहान को भी बीजेपी में शामिल किया था. राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के रेवतराम डांगा को पिछले चुनाव में बीजेपी में शामिल कर टिकट दिया था और इस बार भी वही चुनाव लड़ रहे हैं. नागौर में हनुमान बेनीवाल के बीजेपी छोड़ने के बाद से बीजेपी कमजोर थी लेकिन, जब से ज्योति मिर्धा कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुई हैं वो लगातार दूसरी पार्टियों के नेताओं को तोड़कर बीजेपी में शामिल कर रही हैं.
 

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