आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल को आज दुनिया अपने कंधे पर उठाना चाहती है, उनकी आंखों में एक नया सपना देखना चाहती है लेकिन एक समय था जब उनके अपार्टमेंट के गार्ड ने भी उन पर फब्ती कसी थी. यह कहना है AAP के प्रवक्ता आशुतोष का. उन्होंने आजतक के शो 'हल्लाबोल' में बताया कि केजरीवाल की हिम्मत के दम पर ही पार्टी आज यहां पहुंची है.
आशुतोष ने पुराना समय याद करते हुए कहा, 'पिछला एक साल आम आदमी पार्टी और हमारे तमाम साथियों के लिए सबसे संघर्षपूर्ण समय रहा. मैं आप लोगों से शेयर कर रहा हूं कि जब अरविंद केजरीवाल जी बनारस से लौटे थे, लौटने के बाद जब वो अपनी विधानसभाओं के अंदर गए तो कई ऐसे मौके आए जब उन्होंने दरवाजे की घंटी बजाई और डोर टू डोर जाकर अपना परिचय दिया. लोगों ने कई जगह पर उनके मुंह पर दरवाजे बंद कर दिए थे.'
'केजरीवाल के मुंह पर लोगों ने बंद किए थे दरवाजे'
आशुतोष ने आगे कहा, 'आज भले ही केजरीवाल को पूरी दुनिया अपने कंधे पर उठाना चाहती है, उनकी आंखों में एक नया सपना देखना चाहती है, लेकिन वो दिन भी था जब लोगों ने उनके मुंह पर दरवाजे बंद किए थे.' आशुतोष ने बताया, 'एक दिन वो (केजरीवाल) मुझे बताने लगे कि बनारस से लौटने के बाद एक दिन वो सुबह सुबह निकले तो उनके अपार्टमेंट के गार्ड ने उन पर फब्ती कसते हुए कहा था कि 'चले थे प्रधानमंत्री बनने अब क्या हालत हो गई है.' मुझे लगता है कि वो जो दिन था उससे उनकी लीडरशिप क्वालिटी का पता चला कि उनका मेटल क्या है.'
'केजरीवाल के जीवटपन से हमें ऊर्जा मिली'
केजरीवाल की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा, 'बहुत लोग होते जो टूट सकते थे लेकिन वो टूटे नहीं. क्योंकि अगर वो टूट जाते तो पूरी की पूरी टीम टूट जाती. लेकिन वो जो लड़ने का माद्दा था, जो संघर्ष का माद्दा था और जो जीवटपन था वो हम लोगों को ऊर्जा दे रहा था और मैंने यह एक अद्भुत व्यक्तित्व उनके अंदर देखा था. ये मैं इसलिए नहीं कह रहा हूं कि मैं उनकी तारीफ कर रहा हूं या उनकी पार्टी में हूं तो उनकी चापलूसी कर रहा हूं.'
'कई मौके आए जब हम टूट सकते थे...'
मीडिया से AAP में गए आशुतोष ने बताया, 'जब आप टर्निंग प्वॉइंट पर बैटिंग कर रहे होते हैं, तब अच्छी बल्लेबाजी का पता चलता है. जहां सब लोग रन बनाते हैं वहां तो कोई भी रन बना लेता है. मैंने पूरी टीम को देखा कि बहुत ऐसे मौके आए जब हम टूट सकते थे, पार्टी खत्म हो सकती थी. हम पर बहुत हमले हुए, व्यक्तिगत हमले भी हुए, कई केस खोले गए, हमारे फोन लगातार टैप होते रहे. लेकिन हमने यह बात तय कर ली थी कि हम सकारात्मक बातचीत करेंगे, हम गाली गलौच की भाषा नहीं बोलेंगे.'