देश के 14 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में गुरुवार को लोकसभा चुनाव के तहत तीसरे चरण का मतदान संपन्न हो गया. लोकसभा के 543 सदस्यों को चुनने के लिए हुए मतदान के इस चरण के दौरान 91 सांसदों का चुनाव करने के लिए करोड़ों मतदाताओं ने मतदान किया. 14 राज्यों की 91 सीटों के लिए हुए मतदान में ज्यादातर जगहों पर वोटिंग में इजाफा हुआ है. दिल्ली, एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में तो जोरदार वोटिंग हुई है. मध्य प्रदेश. छत्तीसगढ़, जम्मू, केरल में भी अच्छी खासी तादाद में लोग मतदान के लिए उमड़े.
इस चरण में केरल की 20 सीटों, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र और ओडिशा में 10-10 सीटों, मध्य प्रदेश में 9 सीटों, दिल्ली की सभी सात सीटों, बिहार की छह सीटों, झारखंड की चार सीटों और छत्तीसगढ़, जम्मू, चंडीगढ़, लक्षद्वीप और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह की एक-एक सीट पर मतदान कराया गया है.
चंडीगढ़ में सबसे ज्यादा 74 फीसदी लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया. यहां 2009 के लोकसभा चुनाव में 64 प्रतिशत मतदान हुआ था.
दिल्ली में 64 फीसदी मतदान
शाम के छह बजे जब मतदान रुका तो आंकड़े खुलने लगे. खास कर दिल्ली, एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में
जबरदस्त वोटिंग की खबर आई. दिल्ली में 64.77 फीसदी मतदान हुआ. दिल्ली के पिछले लोकसभा चुनाव में 52
फीसदी वोटिंग हुई थी. यानी इस चुनाव में 12 फीसदी ज्यादा मतदान हुआ है. साउथ दिल्ली सीट में 62.67 फीसदी,
नॉर्थ ईस्ट सीट में 67.08 फीसदी, ईस्ट में 65.59, नॉर्थ वेस्ट में 61.38, वेस्ट दिल्ली में 65.64, चांदनी चौक में
66.88 और नई दिल्ली सीट में 65.03 फीसदी मतदान दर्ज किया गया.
उत्तर प्रदेश
पश्चिमी उत्तर प्रदेश ने वोटरों के उत्साह में दिल्ली को पीछे छोड़ दिया. यहां 65 फीसदी वोटिंग हुई. पिछली लोकसभा चुनाव में यहां 51.30 प्रतिशत वोट डाले गये थे. कई इलाकों में वोटरों ने अपनी जोरदार मौजूदगी से हैरान कर दिया. सहारनपुर में शाम के छह बजे तक 70 फीसदी मतदान रिकॉर्ड किया गया. सहारनपुर हाल के दिनों में इमरान मसूद के ऊटपटांग बयान से चर्चा में आया. ऐसे में सवाल उठा कि वोट देने के लिए उमड़ी ये भीड़ क्या चाहती है. सबने दम दिखाया, सबने दावे ठोंके.
बिजनौर लोकसभा क्षेत्र में 65.38 फीसदी मतदान हुआ. अलीगढ़ में 60 फीसदी लोग वोट देने निकले. बागपत में 65 फीसदी मतदान हुआ. गौतम बुद्धनगर में 59 फीसदी और गाजियाबाद में 60 फीसदी वोटिंग हुई. पिछले साल अगस्त में दंगों का दंश झेल चुके मुजफ्फरनगर में 67.78 फीसदी तथा शामली में 70.85 फीसदी मतदान होने की खबर है.
छत्तीसगढ़, ओडिशा और बिहार में नक्सली हिंसा
छत्तीसगढ़, ओडिशा और बिहार में नक्सली हिंसा की घटनायें हुईं जिनमें केन्द्रीय सुरक्षा बल के दो जवान मारे गये जबकि राज्य पुलिस का एक जवान शहीद हो गया. पिछले लोकसभा चुनावों के मुकाबले इस बार मत प्रतिशत काफी अधिक है. छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में 51.5 फीसदी मतदान हुआ. यहां पिछली बार 47.33 प्रतिशत मतदान हुआ था. चुनाव आयोग ने बताया कि सभी सीटों पर मतदान का प्रतिशत बढ़ सकता है. अनेक स्थानों से अभी अंतिम आंकड़ा आना बाकी है क्योंकि अनेक मतदान केन्द्रों पर मतदान के निर्धारित समय के समाप्त होने के बाद भी वोट करने के लिए लाइनों में लगे थे.
केरल
केरल में लोकसभा की सभी 20 सीटों के लिए हुए मतदान में 73.4 फीसदी वोट पड़े. यहां 2009 के लोकसभा चुनाव में 73.2 प्रतिशत मतदान हुआ था.
बिहार की छह सीटों पर 55 फीसदी मतदान
ओडिशा में माओवादी इवीएम मशीन छीन ले गये. बिहार की 40 में से छह सीटों के लिए हुए चुनाव में 55 फीसदी मतदान हुआ. पिछली बार यहां 41 फीसदी मतदान हुआ था. चुनाव आयोग ने बिहार के जमुई में 19, नवादा में दो और गया में एक मतदान केन्द्र पर मतदान स्थगित करने का निर्णय किया है क्योंकि सुरक्षा कारणों को देखते हुए वहां मतदान कर्मियों को नहीं भेजा गया. मतदान की ताजा तिथि जल्द घोषित की जायेगी.
झारखंड की चार सीटों के लिए 58 फीसदी मतदान
झारखंड की चार सीटों के लिए 58 फीसदी मतदान हुआ जबकि पिछली बार यहां 50.89 प्रतिशत मतदान हुआ था. कुछ छिटपुट छटनाओं को छोड़कर मतदान कुल मिलाकर शांतिपूर्ण रहा. राज्य की कुल 14 सीटों के लिए तीन चरणों में मतदान होना है. मध्यप्रदेश में नौ सीटों के लिए चुनाव हुआ जहां 54.13 फीसदी मतदान की सूचना है जबकि हरियाणा की सभी 10 लोकसभा सीटों पर 65 फीसदी मतदान हुआ जबकि बीते चुनावों में यहां 68 प्रतिशत मतदान हुआ था.
छिटपुट घटनाओं को छोड़कर हरियाणा की 10 लोकसभा सीटों पर चुनाव शांतिपूर्ण रहा जहां 73 फीसदी से ज्यादा मतदान हुआ. वहीं मध्यप्रदेश में नौ लोकसभा क्षेत्रों में औसतन 60.08 प्रतिशत मतदान हुआ.
लोकसभा चुनाव के नतीजे से तय होगा दिल्ली विधानसभा का भविष्य
लोकसभा चुनाव के नतीजे ही दिल्ली विधानसभा की भविष्य की स्थिति को तय करेंगे. अगर लोकसभा चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन अच्छा रहता है तो वह विधानसभा चुनाव के लिए आगे जा सकती है. इस चुनाव से दिल्ली में आम आदमी पार्टी के जनाधार के बारे में पता चल जाएगा.
हाल के दिनों में कयास लगाए जाते रहे हैं कि मध्य वर्ग में उसका जनाधार गिरा है. विधानसभा चुनाव में करारी हार का सामना करने वाली कांग्रेस ने दिल्ली में फिर से अपना जनाधार वापस पाने की कोशिश की है. दिल्ली के इन तीनों प्रमुख दलों भाजपा, कांग्रेस और आप ने दावा किया कि वे सभी सात सीटों पर जीत दर्ज करेंगे. कांग्रेस ने 2009 में सभी सीटों पर जीत दर्ज की थी. भाजपा का पूरा अभियान नरेंद्र मोदी पर केंद्रित था. टिकट के बंटवारे से नाराजगी के कारण शुरूआत में पार्टी के प्रचार अभियान पर असर पड़ा था. मोदी, लालकृष्ण आडवाणी, सुषमा स्वराज, राजनाथ सिंह और अरूण जेटली जैसे शीर्ष नेताओं ने पार्टी के लिए प्रचार किया.
प्रतिष्ठित नयी दिल्ली सीट से कांग्रेस उम्मीदवार माकन ने संवाददाताओं से बातचीत में कांग्रेस के उन समर्थकों का समर्थन फिर से हासिल करने का भरोसा जताया जिन्होंने चार महीने पहले हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी का दामन छोड़कर आप का साथ दिया था. केजरीवाल ने तिलक लेन स्थित अपने आवास के पास अपना वोट देने के बाद कहा कि कांग्रेस ने पहले ही अपनी हार स्वीकार कर ली है जबकि भाजपा के नरेंद्र मोदी यह सोच रहे हैं कि वह प्रधानमंत्री बन गए हैं. केजरीवाल अपनी मां, पिता और पत्नी के साथ वोट डालने के लिए पहुंचे थे. उन्होंने लोगों से मतदान करने की भी अपील की.