दिल्ली एमसीडी चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज़ हो गया है. डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने मंगलवार को एमसीडी की 2011-2012 में तैयार की गई इंटरनल ऑडिट रिपोर्ट को जारी करते हुए बीजेपी पर आर्थिक गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं.
मनीष सिसोदिया ने रिपोर्ट दिखाते हुए बताया कि साल 2011-12 में तीनों एमसीडी के मुख्य लेखा परीक्षक द्वारा आयोजित ऑडिट में वित्तीय अनियमितताओं को दर्शाया गया था जिसमें 244 करोड़ रुपए की गड़बड़ी सामने आई. इस रिपोर्ट से बीजेपी शासित एमसीडी ने भी इनकार नहीं किया है.
तीनों एमसीडी की ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक-
उत्तरी नगर निगम में 115 करोड़ रुपये की गड़बड़ी के आरोप हैं.
1) 55.8 करोड़ रुपये- "विभाग ने विज्ञापन और थिएटर टैक्स का भुगतान करने के लिए प्रस्तुत किए गए 71 चेक के संबंध में 55.8 करोड़ रुपए की बकाया राशि वसूल ही नहीं की है" (ऑडिटर की टिप्पणी). यह जून 2008 से फरवरी 2011 की अवधि के लिए हैं.
2) 4 करोड़ रुपये - एक व्यवसायिक संपत्ति पर संपत्ति कर को नहीं जमा करने / बहुत कम राशि जमा करने के कारण नुकसान हुआ (यूनिटेक एम्यूजमेंट पार्क लिमिटेड, रोहिणी).
3) 4.6 करोड़ रूपए - सड़क के निर्माण में वित्तीय अनियमितताएं (आरयूबी) जीटी रोड़ औद्योगिक क्षेत्र में RUB, सावन पार्क की ओर की सड़क (दिल्ली-अंबाला लाइन पर).
4) 1.3 लाख रूपए - पाठ्य पुस्तकों में भी घोटाला हुआ. ऑडिट में पाया गया कि 4720 पाठ्य पुस्तकें मीठापुर सब्ज़ीमंडी के मेन स्टोर से नगर निगम प्राथमिक विद्यालय, आजादपुर गांव –II को जारी की गईं लेकिन जब स्कूल का बुक स्टॉक जांचा गया तो ऐसी कोई जानकारी और किताबें ही नहीं मिलीं.
पूर्वी एमसीडी में 83 करोड़ रुपये की गड़बड़ी के आरोप हैं.
1) वर्ष 1988-89 से वर्ष 2011-12 के बीच के सालों के दौरान ज़ोन के विभिन्न विभागों के ड्राइंग और वितरण के अधिकारियों द्वारा तैयार की गई 54.5 करोड़ रुपए की अस्थायी एडवांस राशि अब तक एडजस्ट ही नहीं की गई है.
2) अनाधिकृत निर्माण को तोड़ने को लेकर कोई एक्शन नहीं लिया गया जिससें एमसीडी ने प्रॉपर्टी मालिकों / बिल्डरों को ही ग़लत तरीक़े से लाभ पहुंचाया हैं.
3) विभिन्न नगर निगमों में 2.913 एकड़ की पार्क ज़मीन पर अतिक्रमण किया गया है, इस पर कोई एक्शन नहीं लिया गया.
दक्षिणी एमसीडी में 50 करोड़ रुपये की गड़बड़ी के आरोप हैं.
1) 22.6 करोड़ रूपए - वर्ष 1998-99 से वर्ष 2011-12 के दौरान क्षेत्र के विभिन्न विभागों के ड्राइंग और वितरण के अधिकारियों द्वारा तैयार की गई अस्थायी एडवांस राशि को अभी तक एडजस्ट ही नहीं किया गया है.
2) 1 करोड़ रुपये - कियोस्क के माध्यम से विज्ञापनों के डिसप्ले की टेंडरिंग ही नहीं की गई जिसकी वजह से ये नुकसान नगर निगम को हुआ.
3) 1 करोड़ रुपये – प्रॉपर्टी टैक्स के कुछ बाउंस हुए चैक की राशि को नगर निगम की तरफ़ से कभी लेने की कोशिश ही नहीं की गई, 1 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ.
मनीष सिसोदिया ने बताया कि रिपोर्ट के आधार पर जब-जब एमसीडी को संबंधित शिकायत को लेकर आवश्यक स्पष्टीकरण, सूचना, रिकॉर्ड या फिर अन्य कोई दस्तावेज़ प्रस्तुत करने के लिए कहा गया तो एमसीडी अधिकारियों की तरफ़ से ना तो कोई जवाब दिया गया और ना ही उन शिकायतों और प्रश्नों पर कोई बातचीत ही की गई. आम आदमी पार्टी का दावा है कि सत्ता में आने के बाद तीनों निगमों का ऑडिट कराया जाएगा.
रिपोर्ट - पंकज जैन।