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मीरापुर उपचुनाव: मुस्लिम वोटों के बंटवारे से किसे होगा फायदा, एनडीए उम्मीदवार की उम्मीदें बढ़ीं

मीरापुर की विधानसभा सीट से मुस्लिम समाज ने 2022 के चुनाव में जिस तरह लोक दल प्रत्याशी को जिताकर विधानसभा भेजा था, क्या वह इस बार भी लोकदल का साथ देता है या फिर हमेशा से मुसलमानों का रहनुमा कही जाने वाली समाजवादी पार्टी की ओर अपना रुख करेगा.

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मीरापुर उपचुनाव: मुस्लिम वोटों के बंटवारे से किसे होगा फायदा, एनडीए उम्मीदवार की उम्मीदें बढ़ीं
मीरापुर उपचुनाव: मुस्लिम वोटों के बंटवारे से किसे होगा फायदा, एनडीए उम्मीदवार की उम्मीदें बढ़ीं

उत्तर प्रदेश की मीरापुर विधानसभा सीट पर 20 नवंबर को उपचुनाव होना है. जिसके चलते इस चुनाव में इस बार सब की निगाहें मुस्लिम मतदाताओं की ओर टिकी हुई हैं, क्योंकि इस सीट से चुनाव में चार मुख्य पार्टियों ने मुस्लिम समाज को टिकट दिया है. जिसमें आजाद समाज पार्टी से जाहिद हुसैन, बहुजन समाज पार्टी से शाहनजर, समाजवादी पार्टी से सुम्बुल राणा और एआइएमआइएम से अरशद राणा इस चुनावी मैदान में है. जिसके चलते इस बार देखना ये होगा की यहाँ का मुस्लिम समाज किसके सर अपना ताज सजाएगा.

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राजनीतिक जानकारों की मानें तो इस सीट का मुस्लिम समाज अधिकतर पिछले जो चुनाव हुए हैं उसमें समाजवादी पार्टी के साथ ही खड़ा हुआ नजर आया है. जिसके चलते 2022 के चुनाव में भी इस सीट से सपा लोकदल गठबंधन के प्रत्याशी चंदन सिंह चौहान ने यहां से जीत हासिल की थी, लेकिन इस बार समीकरण बिल्कुल विपरीत है क्योंकि इस चुनाव में इस बार लोकदल का एनडीए के साथ गठबंधन है जबकि 2022 में वह इंडिया गठबंधन के साथ इस सीट पर चुनाव लड़ा था.

अब ऐसे में देखना होगा कि यहां के मुस्लिम समाज ने 2022 के चुनाव में जिस तरह लोक दल प्रत्याशी को जिताकर विधानसभा भेजा था, क्या वह इस बार भी लोकल का साथ देता है या फिर हमेशा से मुसलमानों का रहनुमा कही जाने वाली समाजवादी पार्टी की ओर अपना रुख करेगा.

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देखना ये भी होगा कि जहां चार मुख्य पार्टियों ने इस उपचुनाव में मुस्लिम समाज के कैंडिडेट को मैदान में उतारा है तो क्या यहां का ये मुस्लिम समाज इस चुनाव में बिखर जाएगा. आपको बता दें कि इस सीट पर लगभग 3 लाख 25000 मतदाता हैं जिसमें सवा लाख के आसपास मुस्लिम मतदाताओं की संख्या है जिसके चलते इस सीट पर मुस्लिम मतदाता ही चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाता हैं, इसलिए सभी की निगाहें इस चुनाव में मुस्लिम समाज की ओर टिकी हुई हैं, जबकि ऐसे में एनडीए से लोकदल प्रत्याशी मिथलेश पाल इस मैदान में हैं. जानकार कहते हैं कि अगर मुस्लिम मतदाता बिखर जाता हैं तो उसका सीधा-सीधा फायदा लोक दल प्रत्याशी मिथलेश पाल को मिलेगा जिसके चलते इस सीट पर उनकी जीत और आसान हो जाएगी.

अब ऐसे में मुस्लिम मतदाताओं को रिझाने के लिए 16 नवंबर को अखिलेश यादव और 18 नवंबर को बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी का मीरापुर क्षेत्र में आना बताया जा रहा है, जहां वह जनसभाओं को संबोधित कर अपने प्रत्याशी के लिए चुनाव प्रचार करेंगे.

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